Thursday, 9 April 2015

Kuli Aur Tangewale

ट्रैन उस छोटे से स्टेशन पे जब रुक गयी तो रात के 9:00 बजे थे। उस लॉन्ग स्टॉप का यह रुट असल में शाम को 4:00 बजे आता था। पर ट्रैन लेट होने से इतना टाइम लगा। जिस स्टेशन पे ट्रैन रुकी वो गॉव इतना बड़ा नहीं था। पर वो स्टेशन इंडस्ट्रियल एरिया से २० किमी दूर होने से काफी ट्रैंस वहांपर रूकती थी. जब ट्रैन रुकी तो 30-40 लोग उतर गये।
उन लोग में प्लेटफार्म पे एक 40-42 साल की औरत उसकी 20 साल की बेटी के साथ उतर गयी । जो लोग ट्रैन से उतरे, वो जल्दी जल्दी निकल गये और सिर्फ 3-4 लोग ही, थे अब प्लेटफार्म । आरती जो अपनी बेटी पूजा के साथ उतरी अपनी पति से मिलने आइ थी। आरती का पति , उस इंडस्ट्रियल एरिया में काफी अच्छी पोस्ट पे था और आज 4 महीने हो गये थे, वो एक प्रोजेक्ट पे था। इन 4 महीने में ना ही वो घर आ सका था और ना आरती उससे मिल सकी थी। प्रोजेक्ट कंपनी के लिए बड़ा इम्पोर्टेन्ट था और आरती का पति प्रोजेक्ट मैनेजर होने से अपने लिए वक़्त ही नहीं दे पा रहा था। अब पूजा के कालेज को छुट्टियां लगने से उसने अपनी बीवी और बेटी को बुला लिया था।
आरती ने यहां वहाँ देखा पर उसका पति कहीं नजर नहीं आ रहा था। उसका पति उसे लेने आने वाला था, पर वो अभी तक आया नहीं था और इस लिए आरती और उसकी बेटी अकेली खड़ी थी प्लेटफार्म पे। जिस ट्रैन से वो आई थी, वो ट्रैन भी धीरे-धीरे करके स्टेशन से निकल गयी थी। आरती ने शिफॉन की लाल साड़ी और ब्लाउज पहना था। स्लीवलेस ब्लाउज से उसके गोरे आर्म्स सेक्सी लग रहे थे। ब्लाउज टाईट होने से, अंदर की ब्रा का आउटलाइन साफ नजर रहा था।
पूजा ने शार्ट जींस स्कर्ट और टाईट शार्ट टी शर्ट पहना था। टी शर्ट इतना टाईट था की उसकी चूंचियां उभरी उभरी दिखाई दे रही थी और टी शर्ट शार्ट होने से काफी बार उसका बेल्ली बटन भी दीखता था। दोन माँ बेटी, एकदम सेक्सी दिख रही थी और अब ऐसी जगह खड़ी थी जहां के लोग ने कभी इतनी सुंदर औरते देखी नहीं थीं।
आरती उसके सामान के साथ खड़ी थी तो एक कुली उसका सामान उठाने आते बोला- “मेमसाब, कुली चाहिए मैं सामान उठाऊँ आपका…”
आरती ने उस कुली के कपड़े देखते नजरें दिखाते कहा- “कैसे-कैसे गंदे कुली रखे हैं रेलवे ने स्टेशन पे। नहीं हमें कुली नहीं चाहिए। हमारे पास इतना सामान नहीं है ना पूजा की कुली चाहिए ”
पूजा ने भी उस कुली को देखते ना कहा।
उस कुली ने उन माँ-बेटी को ऊपर से नीचे तक देखते, आहें भरते कहा- “क्यों मेमसाब… क्या हम इतने गंदे है…
अरे मेमसाब, आजमा के देखो तो समझ ना मेमसाब की कैसे कुली है हम… कहो तो आप दोन को एक साथ उठाऊँ…” दोन को उठाने की बात करते वक़्त उस कुली के नजर में क्या फीलिंग्स थी, वो आरती की नजर से छुपी नहीं थी।
पर इस अंजान जगह आरती कुछ बोल भी नहीं सकती थी। प्लेटफार्म अब पूरा खाली हो गया था स्टेशन मास्टर उसका असिस्टेंट और इन तीन के सिवा और कोई नहीं था वहाँ। आरती ने अपनी नजर में गुस्सा दिखाते पर आवाज में वही नरमी रखते कहा- “सामान उठाने की बात जाने दो, यह बताओ, यहां से गॉव और वो इंडस्ट्रियल एरिया कितने दूर हैं गॉव में कोई अच्छा होटेल है क्या… और इसके बाद कोई train हैं क्या …”
वो कुली पूजा के एकदम पास खड़े होके बोला- “कल सुबह अगली ट्रैन आएगी, अब तो मेमसाब, गॉव
स्टेशन से 3 क॰मी॰ दूर है और वो एरिया तो 20 क॰मी॰ दूर है। मेमसाब, हमारा गॉव इतना छोटा है की कोई ढंग का लॉज भी नहीं है उसमे। और जो लॉज है एकदम गंदा और बदनाम है, जहां आप जैसे परिवार एक मिनट भी नहीं रह सकते। वैसे मेमसाब, आप रात को कहा ठहरोगी…”
उस कुल, को एक बार देखते आरती को लगा की उसे कुछ सुना डालँ पर वो कुछ नहीं बोल सकी उसने इधर-उधर अपने पति को खोजते कहा- “हमको तो यही रुकना है। हमारे पति हमें लेने आने वाले हैं। हमारे पति उस इंडस्ट्रियल एरिया में काम करते हैं और हम उनसे मिलने आये हैं। हम वेटिंग रूम में उनका वेट करेंगे पूजा…”

पूजा उसके बैग उठाते नाराजी से बोल,- “ममी, देखा डैडी कैसे हैं… उनको मालूम है की हम दोनों यहां अजनबी हैं लेकिन फिर भी हमको लेने नहीं आये…”
आरती ने अपनी हैंड बैग उठाके उस कुली की तरफ देखते जवाब दिया- “पता नहीं उनको कुछ काम आ गया होगा बेटा। चल हम वाइतोंग रूम में उनकी राह देखते हैं और तू उनको फोन लगा। वैसे भी प्लेटफार्म पे लाइट बहुत कम है और कोई लोग भी नहीं दिख रहे…”
जैसे आरती वेटिंग रूम की तरफ जाने लगी तो उस कुली ने बिना बोले उनका बाकि सामान उठाके वेटिंग रूम में ले जाके रखते, आरती के सीने की तरफ देखते कहा- “ठीक है मेमसाब, जैसे आपकी मर्जी । वैसे मैं यहां बाहर ही सोया हूँ कुछ लगे तो मुझे बुलाना। मेरा नाम जहीर है। मेमसाब, मेरा घर यह, बाजू में है, अगर आप चाहे तो हमारे घर रुक सकती हो आपकी बेटी के साथ। यहां वेटिंग रूम में कोई नहीं होता है रात में …” आरती जहीर की इस बात पे कोई जवाब नहीं देती तो जहीर बाहर जाके, वेटिंग रूम के एकदम सामने, प्लेटफार्म पे एक कपड़ा बिछा के, आरती की तरफ पैर करके लेटते गया। आरती ने अपने पति को मोबाइल लगाया। जब उसके पति ने फोन उठाया तो आरती ने उनसे पूछा की वो स्टेशन क्यों नहीं आये उनको लेने।
अपनी बीवी की बात सुनके उसका पति एकदम सन्न \ रह गया। आरती का पति काम के सिलसिले में दो दिन बाहर गया था और वो यह बात भूल ही गया था की उसकी बीवी और बेटी आने वाले थे। उनका कोई स्टाफ भी नहीं था िजसको वो बोलते की जाके उनकी बीवी और बेटी को ले आये। आfखर में आरती के पति ने उनको कल रात का वक़्त किसी लॉज में निकालने को कहा और यह भी कहा की वो परस सुबह उनको लेने आएँगे। आरती ने फोन कट किया और सोचने लगी की परसो सुबह तक का वक़्त कैसे निकाला जाए। उसने पूजा को इसके बारे में कुछ नहीं बताया।
वेटिंग रूम में काफी लाइट्स थी। उन दोन के सिवा उस रूम में और कोई नहीं था। आरती एक चेयर पे बैठी और सामने के टेबल पे अपने पैर रखे। ऐसा करने से उसकी साड़ी जरा ऊपर की तरफ उसके घुटने तक उठ गयी। आरती ने साड़ी नीचे नहीं की। जब उसकी नजर बाहर लेटे जहीर की तरफ गयी तो उसने देखा की जहीर की लुंगी घुटने के ऊपर उठी थी। अचानक आरती ने जो देखा उसे धक्का लगा। वेटिंग रूम की लाइट जहीर के ओपन लुंगी में रोशनी डाल रह, थी िजससे आरती को जहीर का लंड साफ दिख रहा था। जहीर बेखबर होके लेटा था। आरती की नजर बार-बार उसके उस लंड की तरफ fखंची जा रह, थी। आरती ने पूजा को देखा तो पूजा एक मैगजीन पढ़ रह, थी।
आरती ने भी उसके पास की किताब उठाके उसके पीछे से जहीर का लंड देखने लगी। इधर जहीर प्लेटफार्म पे लेटा था, पैर आरती की तरफ करके और आरती को देख रहा था। आरती और पूजा के जिस्म के बार में सोचके उसका लंड खड़ा हुआ था। अब तो आरती के घुटने तक के नंगे पैर देखके उसे और भी अच्छा लग रहा था। अपने लंड की तरफ देखते हुवे उसने एक बार आरती को पकड़ा।
तो बेशर्म बनके, अपना लंड सहलाते वो बोला- “क्या हुआ मेमसाब, आये क्या आपके पति…

जहीर के सवाल से जरा शरमाते आरती ने कोई जवाब नहीं दिया। बुक पे पीछे अपनी नजर डालते आरती सोचने लगी की जहीर का लंड कितना मोटा है। और कितने झांट के बाल भी है उसके लंड पे। आज इतने महीने से पति से दूर रहके गुजारने से आरती बेहाल थी। उससे लगा था की आज रात पति के साथ खूब मस्ती करुँगी
पर अब परसो तक उसका पति नहीं आनेवाला था। इतने दिन भूखे रहने से आरती लंड के लिए तड़प रही थी और अब जहीर का काला मोटा लंड देखके उसके जिस्म में आग लगने लगी थी। आरती इसी सोच में डूबी थी जब पूजा ने उससे कहा की वो यहां बैठके बोर हो गयी है और जरा प्लेटफार्म पे चक्कर लगाने जा रही है। आरती ने उससे रोका नहीं और बुक पढ़ने का नाटक करने लगी। जैसे ही पूजा उसके सामने से निकल गयी, आरती चुपके से जहीर को देखने लगी।

इधर पूजा को रूम से बाहर आते देखकर जहीर ने सोचा, की बेटी को पास ले लू तो माँ हाथ आ ही जाएगी इसलिए उसने अपना ध्यान आरती से हटाके बाहर आ रही पूजा पे लगाया। पूजा रूम के बाहर आई। उसने देखा की वो कुली सो रहा है। पूजा उसके पास आके खड़ी हुई। पूजा जहीर के इतने पास खड़ी थी की जहीर को नीचे से, पूजा की स्कर्ट के नीचे से उसकी गोरी गोरी टांगे दिखने लगी। पूजा की पैंटी, भी जहीर को दिख रही थी और नीचे सोते हुए उससे पूजा के बड़े मम्मे भी नजर आ रहे थे।
यह सब देखके जहीर का लौड़ा और टाईट हो गया।

पूजा का ध्यान उसपे नहीं है, यह देखके जहीर ने आरती की तरफ देखते अपना लंड मसलते एक स्माइल देते अपनी जीभ होंठों पे घुमाया। जहीर के इस इशारे को देखते ही आरती समझी की उसका इशारा उसकी जवान बेटी पूजा की तरफ है। जहीर का यह इशारा देखते आरती ने कुछ सोचके पूजा को अंदर बुलाया। पूजा जब जहीर
की तरफ पीठ करके, अपना बैग खोलने लगी, तो आरती ने जहीर को देखते अपना मुँह बिगड़ते उससे अपनी नाराजी दिखाई।

भले आरती ने जहीर को देखते मुँह बिगाड़ा था, पर अब उसकी चूत भी गर्म हो रही थी।
आरती को देखते, स्माइल करते, जहीर लुंगी में हाथ डाल के लंड सहलाने लगा। आरती की नजर अपने लंड पे है देख के जहीर ने अपना लंड इतना बाहर निकला की आरती को उसके लंड का काला हेड नजर आये और अब जहीर आरती के सामने अपना आधा नंगा लौड़ा सहलाते बार-बार आरती को और झुकी हुई पूजा की गांड को देखने लगा। आरती समझी की जहीर पूजा को भी देख रहा है, पर वो जहीर का लंड देखके इतनी बेबस हुई थी की पूजा को कुछ बोल भी नहीं पा रही थी।

जहीर के आधे नंगे लंड से नजर हटाके आरती ने घड़ी देखी तो रात के 10:30 बज गये थे। उसके पति का फोन भी नहीं लग रहा था। कुछ सोचके आरती ने पूजा को कहा- “बेटी, उस कुली को बुलाके लाओ। हम लोग तो रात भर यहां रुक नहीं सकते। उसने बोला है तो उसके घर चलेंगे। दिखने में तो भला आदमी लगता है और इस
अंजान जगह हम माँ-बेटी कब तक अकेले रुक सकते हैं… वैसे भी तेरे डैडी तो नहीं आएँगे, परसो सुबह तक। तो जाके उस कुली को बुला…”

जहीर के घर रुकने की असली वजह आरती ने पूजा को नहीं बताई, पर जहीर का लंड देखके उससे रहा भी नहीं जा रहा था। जहीर को आरती ने क्या कहा यह सुनाई नहीं आया, पर जैसे ही उसने पूजा को आरती की तरफ टर्न करते देखा, उसने अपना लंड लुंगी में डाला। पूजा की टाईट गांड, गोरी टांगे और साइड से मम्मे जहीर देख रहा था और साथ-साथ आरती का पूरा भरा सीना भी दिख रहा था। आरती ने अब अपनी एक टाँग दूसरी टाँग पे ली थी जिससे उसकी गोरी गोरी टांगे उसे दिख रही थी।

पूजा बाहर आके, जहीर के पास खड़ी होके उससे आवाज देने लगी।
सोने का नाटक कर रहे जहीर ने एक बार फिर नीचे से सीने तक पूजा की जवानी देखते आँखे खोली। पूजा बोली- “सुनो, चलो, तुम्हे मम्मी बुला रही हैं…”
पूजा के सामने आराम से उठते, खड़े होके, लंड एडजस्ट करके जहीर रूम में गया। पूजा बाहर ही खड़ी थी। आरती के पास जाके, अपना लंड सहलाते जहीर बोला- “क्या है मेमसाब… क्यों बुलाया मुझे…” फिर स्माइल करते आगे बोला- “तुम दोन में से किसको उठाना है, मेरा मतलब किसका सामान उठाना है, या तुम दोनों को एक साथ उठाना है क्या…”

आरती ने जहीर का इशारा समझा और बोली- “देखो स्टेशन से बाहर तक छोड़ दो, यहां काफी अंधेरा है और अब कोई भी नहीं है यहां…” पूजा को बुलाते आरती बोली- “पूजा, तुम आगे जाके किसी टैक्सी को रुको। मैं इस कुली के साथ अपना सामान लेकर आती हूँ…”
पूजा ने अपनी हैंड बैग उठाई और स्टेशन के बाहर चल पड़ी। अपनी तरफ ऊँगली और जाती हुई पूजा की तरफ इशारा करते आरती आगे बोली- “कितना किराया लोगे यह सब माल समान उठाने का…” फिर जहीर की लुंगी की तरफ, उसके लंड को देखते आरती बोली- “मेरा नाम आरती है और यह मेरी बेटी पूजा है…”
आरती की आँख में चमक और हवस साफ दिख रही थी। आरती की गोरी टाँग और सीने को देखते जहीर बोला- “मेमसाब, आप अभी इस अंधेरे में कहां जाओगी… गॉव यहां से काफी दूर है और गॉव में कोई लॉज भी नहीं है…” आरती को देखते अपना लंड बेफिक्री से सहलाते जहीर आगे बोला- “मेमसाब, सब माल समान उठाने का भाड़ा अगर देखो तो आप इतनी बड़ी हैं और आपकी जवान बेटी, मतलब कम-से-कम पूरी रात और एक ज्यादा मर्द लगेगा तुम दोनों को उठाने में …” आरती को आँख मारते जहीर आगे बोला- “वैसे वो माल सaमान
उठान पड़ा तो बहुत मजा आएगा हमको, इतना जवान और कसा माल है। खूब मस्ती से उठाऊँगा उसे पूरी रात। वैसे तुम भी कुछ कम नहीं हो, शादीशुदा हो तो तुम्हारे साथ भी बड़ा मजा आएगा, क्या सच कह रहा हूँ ना मैं मेमसाब…”

आरती समझती है की जहीर भी वही चाहता है जो उसके दिल में है और आरती बोली- “तुम फ़िक्र मत करो, वो आगे देखूँगी, पहले टैक्सी तो मिलने दो। तुम वो सब मुझपे छोड़ दो। वो माल मिले ना मिले यह माल जरूर मिलेगा तुमको…” यह कहते आरती ने अपनी तरफ इशारा किया और आगे कहा- “जहीर, वैसे वो माल अभी
कमसिन है ना इसलिए उसका मत सोचो, मैं हूँ ना, ठीक है…”

आरती के जवाब से खुश होके, जहीर ने नीचे झुकके सब सामान उठाया। सामान लेके खड़े होते उसने आरती को एक बार पूरी तरह देखते कहा- “कोई बात नहीं अगर हमें यह माल भी मिला तो। ठीक है मेमसाब, आपकी बेटी टैक्सी लाने तक हम वहाँ चले क्या… वैसे मेमसाब, कितनी उमर है इस माल की और उस माल की… आप दोनों माँ बेटी नहीं बल्कि बहन लगती हैं इसलिए पूछ रहा हूँ। और मेमसाब, आप रात में कहाँ रुकोगे…”

जहीर के सामने झुकके, अपनी बैग उठते, उसे अपना क्लीवेज दिखाते आरती बोली- “पहले यहां से बाहर तो चलो, फिर सोचंगे कहां रात गुजरनी है। एक बात बता, तू मेरी बेटी को ऐसे घूर-घूर के क्यों देख रहे हो…”

आरती का क्लीवेज देखके, होठों पे जीभ घुमाते जहीर बोला- “मेमसाब वो माल मस्त है आपका, एकदम कमसिन और फ्रेश, सच्ची बोलू मेमसाब… आपकी बेटी मस्त जवानी से भरी है, बिलकुल आप जैसे , इसलिए मैं उसे घूर घूर के देख रहा था। वो भी कैसे मस्त दिखा रही थी उसका बदन…” यह कहते जहीर ने आँख मरी।

अपने चहेरे पे गुस्सा दिखाते, पर दिल में खुश होके आरती बोली- “क्या बोलता है तू जहीर…” जब लड़की की माँ उससे इतना बढ़ावा दे रह, थी तो जहीर क्या पीछे रहता। सब सामान अपने कंधे पे लटकाते, दोन हाथ खुले रखते जहीर बोला- “सच्ची मेमसाब, देखा नहीं आपकी बेटी के मम्मे कैसे उभरे हुये हैं बिलकुल एक औरत जैसे है और उसकी गोरी गोरी टांगे मुझे दीवाना कर रही है। कसम से, आपकी की बेटी को तो रात भर उठाना पड़े तो उसको खूब मजा दूंगा। उससे दिखा दूंगा की असल मर्द क्या होता है। मेमसाब आपकी बेटी माल और उस इस माल बनी माँ की उमर क्या है…”

जहीर के जवाब से आरती को यकीं हुआ की उसने आज रात जहीर के घर गुजारने का फैसला करके कोई गलती नहीं की थी। जो मर्द एक माँ के सामने उसकी बेटी को रात भर चोदने की बात कर सकता है, वो आरती जैसे अनुभवी औरत को कितनी मजा दे सकता है इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। दोनों प्लेटफार्म से उतर
के एक ऐसी जगह आये थे जहां लाइट कम थी और जमीन पे पानी था। आरती चलते-चलते जरा लड़खड़ाई तो जहीर ने उसे पकड़ा।
अपने आपको संभालते आरती बोली- "जिसे तू बेटी की माल माँ बोल रहा है वो मैं 42 साल की हूँ और इस माल माँ की बेटी 20 की है। जहीर तुझे शर्म नहीं आती एक माँ के सामने उसकी बेटी के बारे में ऐसी गन्दी बात करते…”
आरती की कमर में हाथ डालते, उससे संभालते जहीर बोला- “मेमसाब संभल के चलो, वहाँ कीचड़ है। क्या मेमसाब, मजाक करती हो… आप तो 35 साल का माल लगती हो और उस माल की उमर 16-17 से ज्यादा नहीं लगती। आप दोन माँ बेटी नहीं बहन लगती हो…”
जहीर का हाथ अपनी कमर से हटाके, आरती ने अब कीचड़ से बचने, अपने साड़ी घुटन के ऊपर उठाई। इससे अब जहीर को आरती के घुटन के ऊपर तक के नंगे पैर साफ दिखने लगे। अपना लंड सहलाते जहीर आगे बोला- “यकीं नहीं आता की वो 20 साल की है, 16-17 साल का मस्त तैयार माल लगती है तेरी बेटी। वैसे मेमसाब, अगर आप बुरा ना मानो तो हमारे घर रुक सकती हो रात भर। बोलो
क्या आप तैयार हो पूरी रात हमारे घर में गुजारने के लिए… पूरी रात तुम माल माँ-बेटी को आराम से रखूँगा मैं।
आपकी बेटी अकेली गयी है, यहां के लोग बहुत हरामी है, कोई उठाके ले गया उस माल को और रात भर ऐश की आपकी बेटी के साथ तो… आपकी बेटी मस्त है, एकदम गरम माल है और उसका बदन भरा हुआ है, तो कोई हरामी मर्द अपनी गर्मी उतारने ले जा सकता है उसे। चलो जल्दी मेमसाब…” यह कहते जहीर ने आरती की गांड पे हाथ घुमाया।
पूजा के बारे में कह गयी बात सुनके आरती को अच्छा लगा। जहीर सच ही बोल रहा था। उसकी बेटी थी ही इतनी मस्त की मर्द का दिल आ ही जाता उसपे और पूजा ने जो कपड़े पहने थे उसमे तो किसी भी मर्द को उसे चोदने की इच्छा ज र होगी। आज की रात तो जहीर के साथ गुजारनी थी, पर पहली बार उसका हाथ एकदम
ओपन्ली अपनी गांड पे लगते ही आरती को अच्छा लगा। कितना मादक और गर्म हाथ था उसका। आरती ने अपनी गांड पे घूम रहे जहीर के हाथ को बिना हटाए कहा- “क्या मतलब है तेरा… तुम्हारी बेटी जैसी है वो जहीर, 21 की उमर है उसकी पर तुम यह सब क्यों पूछ रहे हो…”
आरती की तरफ से कोई रुकावट ना देखते, जहीर ने अब बिंदास उसकी गांड मसलते कहा- “बस ऐसी ही पूछ रहा हूँ तेरी बेटी के बारे में। माँ कसम मेमसाब, आपकी बेटी एकदम मस्त लगती है इसलिए पूछा मैंने यह सब। क्या आपकी बेटी को कोई मसलता है क्या … नहीं उसका सीना तुम्हारे इतना ही उभरा हुआ और तुम्हारे इतना ही बड़े हैं इसलिए पूछा मैंने। और मेमसाब, मुझे तो बेटी है ही नहीं और अगर ऐसी बेटी होती तो ना जाने मई क्या करता, इसमें क्या बेशर्मी मेमसाब… अब मेरी बात छोड़ो, यह बोलो, तुम मेरी पैंट की और खास कर मेरी कमर के नीचे की तरफ क्या देख रही थी स्टेशन पे…”
एक तो अपनी बेटी और अपने बारे में जहीर के खयाल सुनके, अपनी गांड पे इतने बेफिक्री से हाथ घुमाने और अब उसके इस सवाल से आरती एकदम हक्का बक्का रह गयी।
पहले उसने कुछ समझा नहीं की क्या जवाब दे पर वो बोली- “तूने पैंट कहा पहनी है… यह तो लुंगी पहनी है तूने। हमारे यहां कुली लोग नार्मल पेंट या लहँगा पहनते है और उनके कपड़े काफी साफ सुथरे होते है, तुम्हारे जैसे गंदे नहीं…” यह कहते आरती का ध्यान फिर जहीर के लंड पे गया।
आरती के देखने पे जहीर दूसरे हाथ से अपना लंड मसलने लगा। चलते-चलते एक छोटे से पाटहोल की वजह से आरती आफ बैलेंस हो गयी और करी करीब गिर ही गयी, पर जहीर ने पीछे से दोन हाथ उसकी कमर में डालके उससे संभाला। आरती को संभालते-संभालते, जहीर के हाथ उसके सीने तक गये और आरती के दोन मम्मे उसके हाथ में थे। गिरने से बचने के लिए आरती ने सपोर्ट के लिए हाथ पीछे लिया और जहीर की कमर पकड़ी। जब तक जहीर के हाथ उसके मम्मे पे गये, आरती संभाल चुकी थी, पर अब जहीर को अपनी तरफ से ग्रीन सिग्नल दिखने के बहाने उसने बैलेंस के सपोर्ट ढूँढ़ते-ढूँढ़ते जहीर का लंड पकड़ा। लुंगी में बिना अंडरवेअर के जहीर के लंड को पकड़ते ही आरती को अहसास हुआ की जहीर का लंड एकदम कड़क और गर्म है जैसे कोई लोहे का रोड हो। “अरे-अरे मेमसाब संभाल के चलो…” आरती के मम्मे जरा मस्ती से मसलते जहीर ने उसे खड़ी किया।
आरती खड़ी होने के बाद उसने जहीर का लंड छोड़ दिया पर जहीर ने अभी उसने अपना हाथ मम्मे से बिना हटाए कहा- “आप ठीक हो ना मेमसाब…”
आरती ने बिना बोले हाँ में सर हिलाया। जहीर अब उसके मम्मे बहुत मस्ती से दबाते, गांड पे लंड रगड़ने लगा। कुछ पल जहीर ने उसे ऐसे खड़े-खड़े ही रगड़ लिया। आरती को भी बड़ा अच्छा लग रहा था जहीर के हाथ से मम्मे और लंड से गांड रगड़ के लेना इसलिए उसने जहीर को रोका नहीं।
आरती के ब्लाउज में हाथ डालते जहीर बोला- “आह, क्या मस्त माल है तू मेमसाब। आज की रात हमारे साथ आ, ऐसा मजा दूंगा की टी ज़िन्दगी भर याद रखेगी हमारे लंड को। मेमसाब, सच बोलता हूँ, पूरी रात तुझे और तेरी कमसिन बेटी को चोदके बेहाल कर दूंगा…”
आरती को यकीं था की जहीर जो बोल रहा है, वैसा ही कर भी सकता है और आरती उसी के लिए उसके साथ चल पड़ी थी। दोन स्टेशन के एग्जिट के एकदम पास थे। अब बाहर जाने का वक़्त आया था तो आरती ने जहीर को अपने से दूर किया और स्टेशन के बाहर चली गयी। जहीर उसके पीछे सामान लेकर था ही। पूजा को
वहाँ हैरान खड़ी देख, आरती कुछ समझी नहीं।
पूजा को टैक्सी नहीं मिली थी पर वहाँ के 3-4 तांगेवाले, पूजा को अपने में घेरे हुए, उसे घूर-घूर के देख के गन्दी कमेंट्स पास कर रहे थे। आरती ने वो नजारा देखा और जल्दी से पूजा के पास गयी। अब तो रात को जहीर के घर रुकने का आईडिया उसने फिक्स ही कर दिया क्यूंकि अगर वो यहां और जरा टाइम रूकतीतो उसकी बेटी
को वो हरामी तांगेवाले ना जाने कैसे-कैसे चोदते।
पूजा के पास जाके, उसका हाथ पकड़ते, हलकी आवाज़ में आरती बोली- “पूजा, हम ऐसा करते है, आज रात यह जहीर चाचा के घर रुकेंगे…” यह कहते आरती ने साइड में खड़े जहीर को देखके स्माइल दिया जिससे जहीर समझा की आरती आज रात उससे चुदवाने तैयार थी।
अपनी माँ को देखके पूजा को भी अच्छा लगा और पूजा ने हाँ में सर हिलाया।
पूजा के मम्मे को देखते जहीर बोला- “हाँ… क्यों नहीं मेमसाब, क्या कहती हो पूजा बेटी…”
अपनी माँ को तैयार देख पूजा भी हाँ बोली। जहीर को देखके वहाँ खड़े तांगेवाले वहाँ से निकल गये। पूजा बैग लेने झुकी तो आरती ने जहीर को आँख मरते कहा- “क्यों ना हम लोग एक टांगा ले, ताकि चलके जाने में और थक नहीं जायेंगे…”
आरती की मरी आँख का इशारा समझते जहीर वहीँ एक साइड में खड़े टांगे के पास ले गया और बोला- “हाँ ठीक है मेमसाब, चलो ताँगे से चलते है हमारे घर। हमारे दोस्त सलीम का है टांगा है। अरे सलीम भाई, टांगा खली है क्या… सवारी है हमारे घर तक की…”

सलीम ने उन सेक्सी माँ बेटी को अच्छे से देखते कहा- “हाँ मेमसाब, तैयार हूँ ना मैं। आओ, आराम से चढ़ो ऊपर आप दोनों । चलो बैठो तो हमारे ताँगे में…” सलीम ने देखा की जहीर उससे पूजा को दिखा के इशारा कर रहा था। जहीर का इशारा समझते सलीम बोला- “जहीर, छोटी मेमसाब को हमारे पास बैठा दे और तुम पीछे बैठो बड़ी मेमसाब के पास, ताकि हमारे घोड़े पे लोड ना आये, ठीक है…”
आरती और जहीर ने हाँ में सर हलाया और आरती बोली,- “पूजा, तुम आगे बैठो, मैं यह समान ले के इसके साथ पीछे बैठती हूँ…”
पूजा अपनी माँ की बात मान गयी और ताँगे में चढ़ने झुकी। इस झुकने से सलीम को पूजा के पूरा क्लीवेज साफ दिख गये। पूजा को चढ़ने में मदद करने के बहाने, सलीम ने उसका एक हाथ पकड़ते कहा- “जहीर, भाड़ा कौन देगा और यह लोग तुम्हारे घर कैसे आ रहे हैं…”
जहीर पूजा के पीछे आके खड़े रहते बोला- “अरे सलीम, मैं भाड़ा दूंगा और यह मेमसाब से टिप भी मिलेगी तुझे। चल तो सह, तू…”
पूजा चढ़ नहीं पा रही यह देख के जहीर उसे मदद करने के बहाने, उसकी कमर पकड़ते ऊपर चढ़ाते कहा- “आओ पूजा, मैं तुमको सलीम के ऊपर चढ़ने मदद करता हूँ…”
जहीर की डबल मीनिंग की बात पूजा छोड़के सब समझे पर कुछ नहीं बोले। पूजा को चढ़ने में मदद करने के बहाने, सलीम ने उसके मम्मे मसल डाले तो पूजा जरा अनकम्फर्टबल हुई यह देख के जहीर बोला- “अरे बेबी, क्या हुआ… तुमको तकलीफ हो रही है क्या मेरी मदद से… देख तेरी मम्मी को, कैसे मेरी मदद से अब ऊपर चढ़
जाएंगी…”
पूजा सलीम के साथ बैठ गयी तो आरती के पीछे खड़े होके, उसकी गांड मसलते जहीर बोला- “चलो मेमसाब, आपकी बेटी को आगे की तरफ सलीम के साथ चढ़ा दिया, अब आप हमारे साथ, ऊपर चढ़ जाओ, मेरी मदद से…”
जहीर की बात पे खुश होके, उसे आँखे मारते और उससे गांड मसलवाते, आरती भी ऊपर आई। जब जहीर उसके पास बैठा तो आरती ने हलके से उसका लंड दबाया। जहीर के बैठने के बाद आरती ने देखा की पूजा आगे की तरफ देख रही थी और यह मौका देखके उसने जहीर के लंड को पकड़ा और जहीर ने एक हाथ आरती की कमर में डालके, उसे पास खींचते दूसरे हाथ से उसकी चूची पकड़ते बोला- “चलो सलीम, आराम से चलना रोड खराब है…”
टांगा चलने लगा। चार तरफ पूरा अंधेरा था। जहीर का लंड मसलते, आरती ने दूसरे हाथ से अपना पल्लू खुद नीचे गिराया। जहीर ने देखा की ब्लाउज में आरती का भरा सीना नंगा होने को मचल रहा था। कमर में डाला हाथ मम्मे पे लाते, उसे कसके मसलते जहीर बोला- “पूजा बेटी ठीक से बैठी हो ना… सलीम जरा देखो बेबी को कोई तकलीफ ना हो, जरा अपने से सटाके बिठाओ बेबी को। यह शहर की लड़कियां और औरत को ताँगे की आदत नहीं इसलिए उनको सटाके बिठाना चाहिए और उनके हाथ में पकड़ने को कुछ देना चाहिए…”
आरती के मम्मे मसलते जहीर हलकी आवाज में बोला- “मेमसाब, बड़े मस्त है आपके मम्मे कितने कड़क हैं और भरे हैं। आज रात मजा आएगा…”
जहीर की बात पे हलकी स्माइल करके आरती ने उसका लंड दबाया।
जहीर की बात सुनते सलीम ने भी पूजा को अपने से सटा लिया जिससे वो अब आसानी से उसकी जांघ मसल सके और मम्मे मसल सके।
अब दोनों हाथ से जहीर का लंड सहलाते आरती हलके से जहीर के कान में बोली- “क्या देखे नहीं ऐसे मम्मे कभी तूने… वैसे तेरा लौड़ा भी बहुत मोटा काला और कसा हुआ है, मजा आएगा आज रात तुम्हारे साथ गुजारने में …” ]
टर्न होके आगे देखते आरती आगे बोली - “हाँ पूजा, ठीक से बैठो। कुछ पकड़ के बैठ ताकि धक्के ना लगे जैसे मैंने एक रोड पकड़ा है। सलीम, तेरा टांगा तो काफी अच्छा है। क्या भाड़ा होगा जहीर के घर तक का…”
पूजा की जांघ मसलते, उसका हाथ पकड़ के अपने लंड पे लाने की कोशिश करते सलीम बोला- “अरे मेमसाब, आपकी यह बेबी देगी वो भाड़ा होगा ठीक है ना बेबी…”
पूजा समझ रही थी की सलीम क्या चाहता है पर वो अभी इसके लिए तैयार नहीं थी। एक तो साथ में माँ होने का डर और दूसरी बात यह की पूजा किसी और को चाहती थी, उससे चुदवाती थी और उसे धोखा नहीं देना चाहती थी। पर मौके की नजाकात और वक़्त देखते उसने सलीम को अपनी जांघ मसलने द, पर उसका लंड नहीं पकड़ा।
आरती के मम्मे अब और जोर से मसलते जहीर बोला- “अरे सिर्फ देखा है तूने इसे अभी, अब इसे सहला और रात को इस लंड से चुदवा ले मेमसाब, असली मजा तो तब मिलेगा तुमको…”
एक हाथ से जहीर के हाथ अपने सीने पे दबाते, आरती ने दूसरा हाथ लुंगी के नीचे डालके उसके नंगे लंड को सहलाते, उसकी झांट पे हाथ घुमाते कहा- “रात की बात रात को, अभी जितना करने मिल रहा है करो…”
आरती का ब्लाउज खोलते जहीर उसके निप्पल से खेलते बोला- “अरे लेकिन तब तक यह तो देखो की माल कैसा है जो आपकी चूत चोदेगा मेमसाब…”
सलीम जानबूझ के खराब रोड से टांगा ले जा रहा था। ऐसा करने से पूजा बार-बार सलीम से टकरा रह, थी और सलीम को उसके मम्मे दबाने का चांस मिल रहा था। सलीम भी उसको मदद करने के बहाने उसके मम्मे सहला रहा था, पर अभी तक पूजा ने उसके लंड को पकड़ा नहीं था। जब सलीम ने उसके मम्मे जरा जोर से मसले तो पूजा जरा नाराजी से बोली- “मम्मी, मुझे यहां आगे अच्छा नहीं लग रहा। बार-बार बैलेंस जा रहा है और धक्के लग रहे है। यहां तांगेवाले से बार-बार टकरा रही हूँ…”
जहीर का हाथ अपनी ब्रा में घुसाते आरती बोली- “बेटा बस 2-3 मिनट की बात है, अभी आ जाएगा जहीर चाचा का घर…”
आरती की नंगी चूची दबाते जहीर बोला- “हाँ-हाँ बेटी, बस अभी घर आएगा मेरा…” आरती का हाथ लंड पे दबके रखते और दूसरे हाथ से उसका पूरा ब्लाउज खोलते जहीर बोला- “सलीम भाई, ठीक से चलो तो भाड़ा भी मिलेगा और टिप भी समझे…”
सलीम ने हाँ में सर हलाया और पूजा को मसलना शुरू रक्खा। इधर जहीर ने आरती का सर पकड़ के नीचे झुकाना चाहा और आरती ने उसकी बात मानते एक बार जहीर का लंड किस करते कहा- “रात को सब करुँगी जहीर, अभी जरा रुक थोड़ा टाइम…”
पर जहीर ने जरा गुस्से से उसके मम्मे मसलते, उसके चहेरे पे लंड घुमाते कहा- “बहनचोद, मेरा लंड ऐसे खड़ा किया क्या… अब रात ही है ना अभी साली…” यह कहते जहीर ने आरती के सीने से उसका पल्लू हटाया। टाईट ब्रा में दबी चूचियाँ देखके जहीर से रहा नहीं गया और आरती की चूचियाँ मसलनी शुरू की। मुश्किल से 2-३ मिनट ही जहीर उसकी चूचियाँ मसल रहा था की सलीम ने टांगा जहीर के घर के सामने खड़ा किया। जहीर ने अपना हाथ हटाया और लंड को लुंगी के नीचे डाला।

No comments:

Post a Comment