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पापा प्लीज........ 3

सीमा भाभी लैपटॉप ऑन करती हुई बोली,"रात में ही चैटिंग हुई थी... जब मैं बोली ना कि उसकी और पिक्स दो ना , वो काफी अत्छी लगती हमें... मतलब बहाने रही थी...समझ रही है ना..." सीमा भाभी कहती हुई रूपा से पूछी... रूपा हां में सर हिला सहमति जताई...

सीमा भाभी,"पहले तो वो बोला कि पहले तुम दिखाओ...ही..ही.. मैं तो डर ही गई थी कि अब क्या करूँ... पर फिर वो बोला कि लो देखो और उंगली करो...ही...ही.. " तब तक लैपटॉप ऑन हो गई थी... रूपा की नजर स्क्रीन पर टिक गई...

सीमा भाभी,"पता है मैं भी अभी तक नहीं देखी... सोची रूपा के साथ देखूंगी तो और मजा आएगा...ही...ही...ही... वो सारी चीज बंडल में भेज दिया था और मैं डाउनलोड कर रख ली..."

रूपा मन ही मन सोचने लगी कि कमीनी रात में रहती तब ना देखती... वो तो तुम उस स्टूडियो वाले यहाँ गई थी लेने... और उसका चक्कर क्या है ये मेरी भी समझ में नहीं आ रहा है... खैर देखती हूँ...

तभी सीमा भाभी एक नई फोल्डर ओपेन की और पिक्स पर झट से क्लिक कर दी...ताकि फूल स्क्रीन में दिखे रूपा को... वो कुटील मुस्कान के साथ सोच रही थी कि इसकी डिम्पल भाभी के कारनामे तो दिखे तब पूछती हूँ ना कि कौन अच्छी है वो रंडी या मैं नकचढ़ी...

स्क्रीन पर ज्यों ही तस्वीर उभरी, दोनों भक्क से रह गई... सीमा भाभी तो ये देख ही चुकी थी तो कोई फर्क नहीं पर रूपा के लिए ये सब मुश्किल लग रही थी देखने में ही... तस्वीरें एक काले रंग की विशालकाय लंड की थी...
पूरी स्क्रीन पर वो और भयानक लग रही थी...

रूपा अपनी आँख बंद करती तो कभी हल्के से खोलती... कभी कनखियों से सीमा भाभी की तरफ देखती... सीमा भाभी तो देखते ही मंत्रमुग्ध हो गई थी...मन ही मन जल रही थी कि कमीनी ऐले ऐसे लंड भी खा चुकी है...

फिर रूपा का ध्यान आया तो रूपा की झिझक को हटाती हुई बोली,"अरे ऐसे क्या शर्मा रही है... लेने वाली शर्माई ही नहीं तो हम दोनों को क्या? वो भी सिर्फ फोटो से... अभी देखो कैसे तुमऽहारी प्यारी भाभी इसे घोंटती है पूरी की पूरी..."

सीमा भाभी अगली तस्वीरें निकाली पर ये भी लंड की ही... सीमा भाभी बोली,"अरे वाह! ये पतला पर दस इंची हथियार खा चुकी है... ये सैम्पल है रूपा. . आगे सब की पूरी सेट पिक्चर हैं..."

तीसरी पिक्स, वो भी लंड की ही पर अलग... चौथी... एक और नई लंड की... पाँचवी...अलग प्रजाति की पर थी लंड ही... छठी सातवीं, आठवीं .... सब के सब... करीब पचास तस्वीरें थी पर सब में बस लंड ही लंड...कोई छोटा,कोई मोटा...कोई लम्बा, कोई बौना...

सूमा भाभी के चेहरे पर हवाईया उड़ने लगी कि शाला,कितनी मेहनत से मार्केट गई थी लाने और वो हमें उल्लू बना दिया... पर रूपा से बोल नहीं पा रही थी...रूपा भी ऐसी तस्वीरें देख थोड़ी खुश तो जरूर हुई कि डिम्पल भाभी की तस्वीरें नहीं है...पर टेंशन भी बढ़ गई कि गड़बड़ है कुछ...

सीमा भाभी तरह तरह के लंड देख पहले तो उनकी बूर फुदकने लगी थी पर अगले ही पल जब डिम्पल की तस्वीरे नहीं आई तो बूर से निकली पानी वापस बूर में ही समा गई थी... वो तो अंदर ही अंदर जल रही थी

सीमा भाभी का सारा मजा धरा ही रह गया...कितनी खुश होती जब सामने डिम्पल सी एक से बढ़ कर एक हॉट तस्वीरें आती... पर साला हमें ही चुतिया बना दिया... उन्हें तो चैन नहीं मिल रही थी... तुरंत पिक्चर को बंद की और फोल्डर में गौर से देखने लगी...

अचानक उन्हें एक ऑडियो क्लिप मिली... रूपा की नजर भी वहीं पर थी... दोनों ऑडियो क्लिप देखते ही एक दूसरे की ओर मुड़ नयनों से बात करने लगी कि क्या है ये? सीमा भाभी धड़कते दिल से क्लिप ओपेन की...

"नमस्ते सीमा मैडम, कैसी हैं...अरे पगला गया हूँ मैं भी... इ तऽ ऑडियो मैसेज है तो बेकारे ना हाल चाल पूछ रहे हैं... खैर उम्मीदत: आप ठीक ही होंगी...

अब मुद्दे की बात... आप ये जो कर रही हैं एकदम गलत है मेरे लिए... सो प्लीज अभी से चुपचाप अपने काम से मतलब रखिए...डिम्पल क्या कर रही है, क्या वहीं कर रही है वो सब जाने दीजिए...

ये मेरी लास्ट वॉर्निंग है मैडम, पहली वार्निंग तो मैं देता नहीं... और हाँ दो बात और, पहली ये कि आप सोच रही होंगी कि मैं कौन हूँ... यो ज्यादा दिमाग लगाने सी जरूरत नहीं है... मैं आपके पूरी फैमिली को जानता हूँ और आप सब के नेचर से वाकिफ हूँ...

तो जाहिर है कि आप ये सब डिम्पल सो बदनाम करने के लिए सर रही हैं...और इससे नुकसान मेरा होगा...आप बोलेगी, तो वो कुछ इधर उधर ग्लानि में कर दी तो फिर पुलिस वाले तार से तार जोड़ हम तक पहुँच सकते हैं... मैं ये नहीं चाहता...उम्मीद करता हूँ आप समझ गई होगी...

और अब दूसरी बात, आपको जो ये तस्वीरें भेजी है मैंने ये सब आप ही के लिए है...क्योंकि आप भी तो हसीं हैं, जवां है तो मन तो इधर उधर होता होगा ही और आप रहती भी हैं हिरोइन की तरह... साड़ी पहनना छोड़ दोगी तो कच्ची कली लगोगी अब भी...

और ये सब फोटु हमारे क्लाइंट सबकी हैं जिनमें कुछ देशी हैं और कुछ विदेशी...अगर इच्छा हुई हमारे साथ जुड़ने की तो उस स्टूडियो वाले को जाकर ये मेमोरी कार्ड के साथ एक रूपये का सिक्का दे देना...मैं आपसे मिल लूंगा फिर...

आप हमें एक रूपया दोगी और मैं आपको लाखों दूंगा और साथ में मस्ती भी... सोच समझ कर फैसला लेना... मेरे यहाँ शहर के अमीर से लेकर रिक्शे वाले तक आते हैं... कोई दिक्कत नहीं होगी...

जाते जाते, डिम्पल को मैंने नहीं बहकाया है... मेरा तो ये धंधा है जिसमें मैं बस लड़की देखता हूँ... वो कैसे मेरे निकट तक आने पर मजबूर हुई मुझे नहीं पता... मजबूर इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि वो काफी डरी सहमी थी...

पर इन सब से मुझे क्या लेना देना... उसी समय शाली को भेज दिया काम पर... कोई विदेशी था शायद... शाले ने जम के फाड़ा था... शादी शुदा होने के बावजूद शाली झटके ले कर चल रही थी... कुंवारी भर तो अपने आशिक को खूब मजे दी थी...

खैर, वो सब अलग बात है... अब अपनी बात खत्म कर रहा हूँ...पर आप ये मत भूलना कि अभी से आप इस मामले में कोई हस्तक्षेप नहीं करेंगी...अगर की तो डिम्पल को तो घरेलू रंडी बना कर रखे हैं ना पर तुम्हें तो बाजारू रंडी बना कर कोठे पर बिठा कर रखेंगे...वो भी इसी शहर में... वो है ना वातानुकूलित कोठा, वहीं..

और हाँ मेरा बाल बांका ना पुलिस कर सकती है और ना तेरा वो ससुर कालीचरण या उसके तीनों बेटे... समझी ना... हर तरह के और बड़े लोगों से नजदीकी बनाए रखता हूँ तो सेफ महसूस करता ही हूँ और साथ मैं भी धीरे धीरे उनकी तरह पैसा वाला बड़ा आदमी हो जाऊंगा...

खुदा हाफिज......" 


ऑडियो क्लिप समाप्त हो चली थी पर अब ना तो सीमा भाभी कुछ बोल रही थी और ना रूपा... सीमा भाभी पर तो पहाड़ जैसे उलट गया हो... वो बस शून्य में देखी जा रही थी... ना हिल-डुल रही थी और ना बोल पा रही थी...

रूपा ने चुप्पी तोड़ती हुई बोली,"भाभी....ऐ भाभी...."पर सीमा भाभी पर तो कुछ असर ही नहीं हो रही थी... रूपा ने सीमा भाभी के कंधे पर हाथ रख झकझोरती हुई पुकारी,"भाभीऽ....."

"हँ..हाँ...वो.... मैं...मैं देखना शाले की क्या करती हूँ...मेरे साथ इतना बड़ा खेल...जरूर कमीनी मेरे बारे में बता दी होगी...पहले कुतिया को अभी बता के आती हूँ... रंडी का खून पी जाऊंगी...तू रूक ,मैं अभी आती हूँ..."सीमा भाभी नींद से जगती सी होश में आते ही बक बक करने लगी...

रूपा,"भाभी...क्या बकवास कर रही हो... आप कहीं नहीं जा रही...ओके...आपको पता है कि डिम्पल भाभी को इस बारे में पता है और वो बता दी है..." रूपा के सवाल सुन सीमा भाभी शांत हो बस रूपा की ओर देखती रही...

रूपा,"भाभी, वो डिम्पल भाभी के साथ हम सबको जानता है...डिम्पल भाभी उसे कुछ नहीं बताई होगी और उन्हें तो ये भी नहीं पता है कि हम दोनों इस बारे में कुछ जानते हैं... पर एक बात है यहाँ कि आप जिस लड़के से बात करती हो फेसबुक पर वो शायद आपको नहीं जानता है... और ये जिसने भेजा है वो जानता है..."

सीमा भाभी की झूठ सरासर पकड़ में आते ही वो थोड़ी मायूस सी हो गई... वो अभी तक ये नहीं बताई थी ये सब उसे किसी और ने दिया है...रूपा उनके चेहरे पर आई रंग देख बात को शालीनता और धैर्यपूर्वक बढ़ाने की सोची...

रूपा,"भाभी, कौन है ये जिसने ये क्लिप दी है...?" रूपा सीधी सीमा भाभी से सवाल कर गई और जब तक कुछ नहीं जानती, कुछ सोच नहीं सकती थी... सीमा भाभी की नजरें अब सीधी फर्श को छेद कर रही थी...

सीमा भाभी कुछ देर चुप रहने के बाद बोली,"नहीं देखी कि कौन है वो...दरअसल कल रात जब चैटिंग से पिक्स मांगी तो उसने बोला कि वो अभी आउट ऑफ स्टेशन है और बाकी पिक्स साथ नहीं था..."रूपा गौर से सारी बात सुनने में लग गई...

"फिर वो बताया कि अगर वो कुछ कष्ट करे तो मिल सकती है...मैं पूछी कैसे? तो उसने कैलाश के स्टूडियो का पता बताया... बोला वहाँ बोलना आर.जे. भेजे हैं तो वो दे देगा... फिर आज गई स्टूडियो तो मुझे उसी ने दिए..." सीमा भाभी पूरी बात बता दी...पर रूपा अभी कहाँ चुप रहने वाली थी...

रूपा,"जब गई थी वहाँ तो वहाँ कोई था जो..."

सीमा भाभी,"...नहीं, वहाँ और कोई नहीं था...अकेला था वो..."

रूपा,"..कैलाश कुछ बोले....."

सीमा भाभी,"नहीं..."

रूपा की समझ कुछ नहीं आ रही थी कि कैसे वो जानें कि ये कौन हो सकता है...उसे जब कुछ नहीं सूझी तो वो अपना फोन निकाली और सीमा भाभी की तरफ बढ़ाती हुई बोली,"भाभी, ये क्लिप दे सकती हो..."

सीमा भाभी रूपा के पास फोन देखते ही बोल पड़ी,"हाँ पर क्लिप ले कर क्या करोगी और ये फोन किसका है..?" सीमा भाभी फोन को ले उसे लैपटॉप से अटैच करने लगी...

रूपा,"आज ही खरीदवाई हूँ... पापा तो गुस्से हो गए थे पर किसी तरह मम्मी उन्हें मना ली..."रूपा हल्की मुस्कान के साथ जवाब दी... सीमा भाभी क्लिप डाल पूछी...

सीमा,"रूपा, मेरी तो कुछ समझ में नहीं आ रही है कि क्या करूँ..."

रूपा,"अरे भाभी, प्रेशर मत डालो अपने दिमाग पर...अब हम दोनों हैं तो कुछ सोच ही लेंगे...और हाँ एक अलग फोल्डर में पिक्स भी..."

सीमा भाभी पिक्स सुनते ही हल्की मुस्कुराती हुई बोली,"क्या बात है जी...कुछ कुछ होने लगी है क्या..." रूपा तो यही चाहती थी कि भाभी कुछ नॉर्मल हो...तभी तो वो भी कुछ सटीक चीजें सोच सकती हैं...

रूपा,"भाभी, इतनी हॉट चीजें देख कुछ ना हो ये संभव है क्या..." रूपा प्यारी सी मुस्कान देती तिरछी नजरों से सीमा भाभी की तरफ देखती हुई बोली....

सीमा भाभी सारी पिक्स भी डालती हुई बोली,"हाँ है तो काफी हॉट पर आगे क्या करना है..." सीमा भाभी एक बार फिर वापस मुद्दे की बात पर पहुँच गई...

रूपा,"आगे क्या करना है इसके लिए सुबह तक वेट करना पड़ेगा भाभी... तब तक आप निश्चिंत हो रहिए...कल मैं आपसे भेंट करूंगी फिर सोच के बताती हूँ..."

तब तक सारी पिक्स डाल दी गई थी...रूपा फोन ली और पिक्स चेक करने के बाद भाभी के फोन पर अपना नम्बर सेव की और फिर निकल गई...

रूपा अपने गेट से बाहर निकली ही थी कि फोन बजने लगी...कनक थी... रूपा सोची चलो ठीक है अभी मैं ही करती... वो फोन रिसीव कर बात करती हुई बढ़ती रही...

रूपा सारी बात कनक को बतलाती चली गई...कनक बड़े गौर से सुनती जा रही थी...उसकी उत्सुक पल पल बढ़ने सी लग गई थी...कितनी जल्द वो क्लिप सुने ताकि अगर वो जानी पहचानी लगे या फिर पहचानने की कोशिश करे...

कनक पूछी भी कि कैलाश की आवाज तो नहीं है ना...रूपा की बात सुनते हुए कनक सोच भी ली थी कि वो अभी ही सुनेगी... रूपा अभी पिक्स शेयर नहीं कर सकती थी नेट से, तो मजबूरन कनक को आना पड़ता...

उसने रूपा को कुछ देर में मिलने की बात कह फोन रखी और तमाचा का नम्बर डायल करने लगी...शाम काफी घिर आई थी... उसने मम्मी को बोल दी कि मम्मी, बगल के कैफे से आ रही हूँ...आधे घंटे लगेंगे...

उसकी मम्मी इजाजत भी दे दी कि बगल में ही तो जा रही है...तमाचा फोन रिसीव करते ही बोला,"हाय मेरी जान, क्या कर रही हो और इस वक्त कैसे याद की.."

कनक,"ठीक हूँ, तुम अभी कहाँ हो..."

तमाचा,"अभी तो मैं बस यूँ ही घूम रहा हूँ..क्यों?"

कनक,"मिलने आ सकते हो..?"

तमाचा की चमक गई,"इसमें भी ना कहने की बात थोड़े ही है...दिन से मेरा लंड तनतनाया हुआ है..."

कनक तमाचा की बात काटती हुई बोली,"मैं कैफे के पास आ रही हूँ...तुम जल्दी से आ जाओ..."

तमाचा,"शाली आज पिछवाड़ा भी लूंगा...आज तक मना करती रही है आज नहीं मानूंगा मेरी रानी..."

कनक,"पहले आओ तो..."

तमाचा,"ओके बेबी, बस दो में मिनट पहुँचा..."
तमाचा फोन काटते ही अपनी बाइक सरपट भगाया...कनक भी कुछ देर में कैफे से कुछ दूर पहले तमाचा को खोजने लगी... कनक कैफे के पास पहुँची उसी पल तमाचा की बाइक भी आ के रूकी....

कनक पलक झपकते ही तमाचा के पीछे सवार हो गई और अपनी दोनों चुची उसकी पीठ में धंसाती हुई उसे जकड़ ली... तमाचा के शरीर में तुरंत करंट दौड़ गई और वो कई गुने जोश से भर बाइक को पुनः बढाया...

कनक अगले ही पल बोली,"रूपा के घर तरफ चलो..."

तमाचा बाइक को बढ़ाता हुए मुस्काता हुआ बोला,"अरे वाह, उसके घर कोई नहीं है क्या...फिर तो रात भर पार्टी चलेगी और साथ में रूपा की भी...ओह नो...मर जावा..."

रूपा,"अबे कुत्ते , कभी तो कुछ अच्छा सोचा कर...हर वक्त चोदने की ही फिराक में लगा रहता है...मिलना है रूपा से और वो अकेली नहीं है तो तुम कुछ देर बाहर ही वेट करोगे...समझे..."

तमाचा की तो झांट सुलग गई कि शाली अपने काम के चक्कर में मुझे बुलाई है...खैर, कम से कम इसकी तो मारूंगा ही... वो बोला,"इतनी भी क्या जरूरत थी अभी मिलने की..."

कनक,"कुछ लेनी है और वो जरूरी है इस वक्त... "

तमाचा,"भोसड़ी मैं नहीं सुन सकता हूँ क्या?"

कनक,"अभी नहीं पर जरूरत पड़ी तो जरूर सुना दूँगी..."

तमाचा कनक की बात सुन अपना एक हाथ से कनक के हाथ को पकड़ खिंचते हुए बोला,"शाली तब तक लंड की सेवा तो कर, तभी तो बाइक चलाने में आनंद आएगा...और बात तो बताना ही पड़ेगा क्योंकि दिन से ही अंदर बेचैनी सी हो गई है... वो स्टूडियो पर जो मैं गलती कर दिया था आगे से..."

कनक अपने हाथ से तमाचा के लंड को भींचती हुई बोली,"पता है पर तुम्हें सब बातें खुल के बता भी देती तो कुछ हाथ नहीं लगता...क्योंकि जिनसे मिलने गई थी वो आया ही नहीं था...वो बस कुछ सामान वहाँ छोड़ दिया था वही लाने गई थी..."

तमाचा को सामान सुन थोड़ा झटका लगा...वो आश्चर्य से पूछा,"कैसा सामान था और मामला क्या है...ये तो बता...क्या मेरा दिमाग खा रही हो यार..."

कनक की हंसी निकल पड़ी तमाचा की हालत देख और तमाचा के गर्दन पर किस करती हुई बोली,"बेबी, ब्लैकमेलिंग का लफड़ा है..."

तमाचा का दिमाग अब सही में चकराना शुरू हुआ...बोला,"भोसड़ी रंडी...शाली दिखने से तो नहीं लगती कि वो ऐसा कर सकती है..."

कनक,"अरे वो नहीं करती...कोई और है जो किसी को ब्लैकलमेल कर रहा है और उसके बारे में किसी ने सीमा भाभी को हल्की बात बताई...सीमा भाभी और जानने की इच्छुक हुई तो वो सीमा भाभी पर ही लोच्चा लगा दिया और धमकी दे डाला कि चुपचाप रहो वर्ना..."

तमाचा,"अबे...कौन है वो मादरजात...पहचानती हो उसे...?"

कनक,"नहीं, बात फंस गई तो रूपा ने वो क्लिप ले रखी है अपने पास...वही लेने जा रही हूँ...सुनने के बाद शायद कुछ बात बनेगी..."

तमाचा,"हाँ ये ठीक है पर मुझे भी सुनाना...नहीं मालूम चली तो शहर के हर दलाल से मिलूंगा और उससे बात करूँगा...तब तो पहचान हो ही जाएगी..."

कनक,"हाँ ये तो और अच्छी होगी..."

तमाचा,"बहनचोद अब अच्छी लग रही है...तब से कह रहा बात बता तो बताती नहीं थी...खैर कोई बात नहीं...इतना याद रखना हमेशा मैं उतना बड़ा कमीना नहीं हूँ...चूतियापना काम या जबरदस्ती मैं किसी तरफ देखता भी नहीं..."

कनक तमाचा की सुन हल्की मुस्कुराई...पर बोली कुछ नहीं...वो कुछ देर में पहुँचने ही वाली थी... कनक बातचीत यहीं पर रोक दी और बोली,"अंदर ही चलना..."

तमाचा कनक की बात से मुस्कुराता हुआ बोला,"रूपा से मिलवा रही हो क्या...?" कनक तमाचा की बात पर हंसती हुई बोली,"चल, तू भी क्या याद करेगा...मिलवा ही देती हूँ..."

कनक जानती थी कि इस वक्त सब अपने घर के अंदर ही होगी... सीमा भाभी सिर्फ तमाचा को देखी है और कोई जानता तो है नहीं... कोई बहाना बना दूँगी आंटी से...बस केवल सीमा भाभी की नजर ना पड़े...

तमाचा,"ऐ , कुछ जुगाड़ करवाना ना... कम से कम किस तो देगी ना..." तमाचा बाइक को गली में करता हुआ गर्दन टेढ़ी कर बोला... कनक अँधेरे में अभी भी तमाचे के अकड़े लंड को मुठिया रही थी...

कनक,"मैं ना कहूँगी और ना कोई जुगाड़ करवाऊंगी... हाँ तुम खुद पूछना अगर वो मान गई तो तेरी किस्मत वर्ना..."

तमाचा,"चल ठीक है मैं ही पूछूंगा...बस गुस्सा की तो तुम मैनेज कर लेना..." तमाचा की बात सुन कनक हंसती हुई हामी भर दी...तब तक बाइक रूपा के घर तक आ पहुँची... कनक तमाचा को ले अंदर दाखिल हो गई...

कनक डोरबेल बजाई तो रूपा की जगह उसकी मम्मी गेट खोली...और फिर इस वक्त कनक को देख पहले तो चौंकी...फिर पूछ डालीकि इस वक्त...सब ठीक तो है ना कनक...

कनक,"हां आंटी, दरअसल एक कजन को स्टेशन छोड़ने आई थी... वापस जाते वक्त सोची थोड़ी रूपा से भेंट कर लूँ... ये हमारे पड़ोसी हैं...शाम के समय अकेले नहीं आ सकती तो इनके साथ ही आई थी..."

कनक बहाने बनाती हुई तुरंत कहानी गढ़ ली जिसे सुन पुष्पा विश्वास ना करे, संभव नहीं थी... पुष्पा बोली,"ओह, फिर ठीक है...अंदर आओ ना...रूपा कमरे में ही है..."

पुष्पा कहती हुई रूपा को भी आवाज लगाई...रूपा सुनती कैसे वो तो कान में इयरफोन ठूँस गाने जो सुन रही थी...कनक तब तक रूपा के रबम तक पहुँच हौले से गेट खोली तो रूपा की नजर कनक पर पड़ी...वो तुरंत उठ कर गेट तक आई...

रूपा की नजर कनक के पीछे तमाचे पर पड़ी तो वो भौचक्क रह गई पर कुछ बोल नहीं सकी...कनक रूपा की हालत देख हल्की मुस्कान देती आँख मार दी रूपा को... रूपा ना चाहती हुई भी मुस्कुरा पड़ी...

रूपा,"मम्मी, चाय बनाओ ना... " मम्मी चा बनाने किचन की तरफ चल दी...मम्मी के जाते ही रूपा तपाक से कनक से फुसफुसाती हुई बोली,"कमीनी, इसे क्यों लाई है..." कनक तमाचे की तरफ मुस्कुराती हुई देखी और बोली,"तुमसे मिलने के लिए बीच सड़क पर मेरे पैर पकड़ लिया तो क्या करती...अब क्यों मिलना चाहता है,खुद ही पूछ ले.. "

रूपा कनक की शैतानी जवाब सुन हल्की मुस्काई और तमाचा की तरफ देखने लगी...तमाचा भला ऐसे मौके क्यों छोड़ता...आखिर चांस लेनी जो थी...वो चट से एक फ्लाइंग किस रूपा को पास कर मुस्कुरा दिया...

रूपा सकपकाई और किचन की तरफ देखने लगी, पर मम्मी ओट थी...फिर वापस गुस्से भरी नजरे तमाचा पर गड़ाती हुई तमाचे के पास आई और बोली,"शाले होश में रहा कर..."

तमाचा रूपा से ऐसी भाषा को तनिक भी एक्सेप्ट नहीं कर पाया...वो कुछ कहने ही वाला था कि तब तक रूपा तमाचे की कॉलर पकड़ी और खींचती हुई अंदर की और चेयर पर बिठाती हुई बोली,"शरीफ की तरह चुपचाप बैठा रह..."

कनक ये देख हंसे बिना ना रह सकी और वो हंसती हुई बेड पर बैठ गई...रूपा भी अब हल्की मुस्कान के साथ तमाचे की तरफ घूरती कनक के साथ बैठ गई...तमाचे की समझ में अब आ गई थी कि रूपा उससे नहीं, बल्कि उसकी हरकतों से नफरत करती है... वो भी हंसता हुआ रिलेक्स हो गया था...

फिर रूपा ने झटपट फोन कनक को थमा दी...कनक ने सारी फोटों और क्लिप अपने फोन में डाली... साथ ही उस लड़के की आई डी भी ली तो कनक जिन तीन पर नजर रख रही थी उनमें से ही एक था...

तमाचा इन दौरान एक बार कुर्सी से उठ बेड पर रूपा से सट के जा बैठा था... जिसे देख रूपा के साथ साथ कनक भी अपने अपने सैंडल उतारने लगी थी पर ऐन वक्त पर तमाचा हंसता हुआ वापस कुर्सी पर था...

तब तक तीनों के लिए चाय आ गई थी...चाय रख पुष्पा वापस चली गई तो तमाचे को कुछ सूझी...तमाचा,"रूपा, पानी पिलाओ ना..."

रूपा,"ला रही हूँ..." कहती हुई उठी और पानी लाने चल दी...

तमाचा,"तो जा कहाँ रही हो...अपना वाला ही पिला दो..." तमाचे की बात भला रूपा कैसे ना समझती...वो एकाएक रूकी और तमाचे की तरफ लगभग दौड़ी और उसका गला पकड़ दबाती हुई बोली,"कुत्ते, यहीं मार दूंगी ज्यादा बोला तो... "

तमाचा गले पर दबाव पड़ने से थोड़ा बौखलाया जरूर पर अपने ऊपर झुकी रूपा की उभार के सामने वो भूल गया और अपनी एक अंगुली बढ़ा आहिस्ते से उभारों पर चलाते हुए नीचे करने लगा... महसूस होते ही रूपा तुनक के वापस खड़ी हो गई...

कनक हंसती हुई अपने फोन में फोटो भी देखी जा रही थी...तमाचा भी बिना कुछ बोले बस रूपा को देख हंस रहा था...रूपा कमर पर हाथ रख गुस्से और हल्की मुस्कान से तमाचे को घूर रही थी...रूपा मन मसोस कर बाहर निकली और पानी ला तमाचे के सामने पटक दी...

तमाचे अब कुछ देर शांत रहना ठीक समझा और चाय पीने में मशगूल हो गया... चाय खत्म होते ही तमाचा बोला,"कनक फोन दो तो... जरा सुनूं तो कैसी आवाज है वो..."

कनक,"नहीं, घर चलो फिर...यहाँ कहीं आंटी आ गई तो..." तमाचे कनक की बात सुन गेट की तरफ मुड़ा और वापस पलटते हुए गंभीरता की मुद्रा में बोला,"हम्म्म ठीक है फिर..."

तमाचा पुनः बोला,"और हाँ कनक, चाय पीने के बाद कुछ मीठा चाहिए मुझे...तो जल्दी से कुछ मीठा दो..." कनक तमाचे के मंसूबे समझ तपाक से बोली...

कनक,"मैं चाय थोड़े ही पिलाई हूँ जो दूँगी... रूपा पिलाई है उससे मांगो..."कनक साफ मुकर गई और मामला रूपा की तरफ पास कर दी...तमाचे भी मुस्काता रूपा की तरफ देखने लगा...

रूपा,"सोचना भी मत...चाय पिला दी...अब उठो और अपना रास्ता नापो..."रूपा की ना सुनने के बाद भी तमाचे बस उसी तरह देखता रहा जैसे वो लेगा ही...रूपा अब कनक को बोली,"कनक, अब जाओ...देर हो जाएगी तुम्हें...और ये कुत्ता की तरह कर भी रहा है..."

कनक हंसती हुई बोली,"ओके..."कनक कहती उठ के गेट तक चली गई और फिर रूकती हुई बोली,"चलो..." पर तमाचा कुर्सी पर जमा मंद मंद मुस्कुराता रूपा को ही देखे जा रहा था...रूपा तंग आती हुई तमाचे का हाथ पकड़ खींचती हुई रिक्वेस्ट सुरों में बोली,"प्लीज यार जाओ ना..."

तमाचा,"पहले दो फिर उठूंगा..."
रूपा,"मम्मी को बुलाती हूँ फिर तो जाओगे ना..." रूपा तमाचे को छोड़ बाहर बाहर की तरफ रूख की... कनक के पास पहुंची तो कनक रूपा को रोकती हुई बोली...

कनक,"रूपा, मम्मी को बताएगी कि मम्मी ये किस के लिए नहीं जा रहा है..."

रूपा,"हाँ बोल दूँगी...मुझे डर वर नहीं रहती...फंसेगी तू..."

कनक,"क्या यार...अच्छा एक काम कर... तू मुझे किस दे दे...मैं उसे पास कर देती हूँ... ये चलेगी?" तमाचे दोनों की बातें गौर से सुने जा रहा था और वो लेस्बिसन किस से कुछ ज्यादा ही रोमांचित हो उठा और तपाक से बोल पड़ा,"चलेगा नहीं, दौड़ेगा...मुझे तो बस चाहिए किसी तरह रूपा से...."

रूपा कनक की सलाह पर कुछ सोचने लगी...कनक दो तीन बार लगातार रूपा से "यस..? यस..?" पूछी तो रूपा हौले से मुस्काती ओके कह दी... हामी भरते ही कनक झटके देती हुई रूपा को अपनी बाँहों में जकड़ ली...

रूपा मुस्काती हुई बोली,"इसे बोलो नो टच..."

तमाचा,"प्रॉमिश नो टच..."

कनक रूपा को पीछे से जकड़ी थी तो कनक की चुची रूपा की पीठ पर धँसी थी और रूपा की चुची तमाचा की ओर...कनक एक हाथ सीधी रूपा की चुची पर रखती हुई सेफजोन में कर दी...दूसरी चुची भी कनक के केहुनी से दब गई थी...

कनक,"अब तो टच नहीं करेगा..." रूपा बस हम्म्म कर सकी... तमाचा तब तक रूपा के ठीक सामने पहुँच गया था... रूपा पर अब भी तमाचा की नजर गड़ी थी... तभी कनक दूसरे हाथ से रूपा का चेहरा अपनी तरफ की और अपने होंठ चिपका दी...

तमाचे ये स्कीन देख आह भर बैठा...वो सामने लेस्बिसन सीन रिअल देख आपा खोने सा लगा पर किसी तरह खुद पर काबू पाया... किस डीप थी काफी...कनक सारी रस निचोड़ रही थी... रूपा भी पूरी साथ दे रही थी... किस लम्बी चली...

किस रूकी तो दोनों हांफ रही थी पर अगले ही पल कनक तमाचे को इशारे कर दी कि पास किस ले लो... तमाचा आगे बढ़ा और रूपा से पूरी तरह चिपकता हुआ कनक के होंठो तक पहुँचा और शुरू हो गया...

तमाचे की दुगनी व्याकुलता से कनक पीछे की तरफ खिसक ली और दिवाल से जा लगी पर किस नहीं तोड़ी...जबकि रूपा की हालत तो और कनक से भी ज्यादा खराब होने लगी थी...चुची पर कनक का दवाब और उसकी बूर पर तमाचे का खड़े लंड दस्तक जो दे रहा था...

वो बीच में सैंडविच बनी सिसकने लग गई थी पर तमाचा अपने वादे पर अड़ा रहा और रूपा को अपने हाथ से छेड़ने की बजाय बस बदन से हौले हौले रगड़ते हुए कनक के होंठ से रूपा का रस निचोड़ने में लगा था...

जितनी संभव हो सकी तमाचा सारा रस निचोड़ डालने के बाद ही छोड़ा...छोड़ने के बाद वो यूं ही पड़ा रहा...रूपा को जब आभास हुई कि किस बंद हो गई है तो वो आँख खोली और तमाचे को जोर से धक्का दे दी...

धक्का पडते ही तमाचा पीछे सीधा बेड पर... जिसे देख दोनों की जोर से हंसी निकल पड़ी...दोनों को हंसते देख तमाचा भी जीभ से चटकारे लेते हुए उठ के खड़ा हो गया...

कनक तमाचे की तरफ देख अपने दोनों हाथ से रूपा की दोनों चुची पर रख मसलते हुए पूछी,"ये चाहिए...?" रूपा भी अब थोड़ी बेशर्म बन गई और बिना कनक की हाथ हटाए तमाचे की शक्ल देख हंसने लगी...

फिर कनक रूपा को छोड़ी और तमाचे से चलने बोली... तमाचे आनंदविभूत मुद्रा में रूपा को बाय बोला और कनक के साथ निकल गया...

कनक और तमाचा दोनों वापस निकल बाइक से घर की तरफ चल दिए... तमाचा रूपा के साथ हुए सीन को याद कर जोश में आहें भर रहा था अंदर ही अंदर... उसका लंड तो पैंट को फाड़ने पर उतारू हो चला था...

बाइक चलते ही कनक से बोल पड़ा,"ऐ, होटल चल रहा हूँ मैं... मेरे से सब्र नहीं हो रहा अब..."

कनक उसकी बात सुन थोड़ी सोच और गंभीर हो गई...वो कुछ देर पहले की सारी बात याद करने लगी...और वो भी अच्छी तरह समझ रही थी कि इसकी हालत कैसी हो गई होगी...आखिर उसरी भी पानी जो टपक चली थी...

पर समय की पाबंद थी इस वक्त तो ना चाहते हुए भी बोली,"प्लीज यार, सिर्फ आधे घंटे के लिए निकली थी और वैसे भी पांच मिनट ओवर हो गई है और घर पहुँचते-2..."

तमाचा,"वो सब मैं नहीं जानता...मुझे चाहिए तो चाहिए... मेरी हालत बहुत खराब है...अगर नहीं मिला तो पगला जाऊंगा..."तमाचा कनक की बात काट अपनी सफाई दे दी...

कनक,"मालूम है पर तुम ही बताओ...मम्मी को क्या जवाब दूंगी और अब पापा भी आ गए होंगे...कल सुबह जब कहोगे आ जाऊंगी.."

तमाचा,"शाली तो लंड क्यों खड़ा की...भोसड़ी जैसे हो पर इसको शांत कर नहीं तो यहीं सड़क पे चोद दूँगा..."

कनक तमाचा की बात पर कुछ चुप रही और फिर बोली,"चल पहले घर पहुँचती हूँ फिर कुछ सोचती हूँ..."

तमाचा,"बेवकूफ समझती है क्या...मादरचोद तू घर में घुस गई तो फिर वापस निकलेगी क्या? वो सब नहीं होगा...चल होटल या फिर तू बता कोई जगह..."

कनक उसकी बात से बेरूखी सुर में बरसी,"क्या यार...प्रॉमिश कह रही आऊंगी... बस एक बार मम्मी के सामने जाना जरूरी है... अगर नहीं आई तो कल मिलूंगी तो जो मर्जी कर लेना,मना नहीं करूंगी...प्लीज कम से कम ये बात मानो..."

तमाचा कनक से भली भाँति परिचित था तो वो बात मानने में ही ठीक समझा...बस अपनी प्रतिक्रिया बाइक की तेजी दिखाकर कनक को बता दिया... कनक हल्के से थैंक्स कहती हुई तमाचे से चिपक गई...

रात की वजह से सब अपने अपने घर में बंद थे...तमाचा सीधा कनक के घर के समीप बाइक रोका...कनक उतरी और "कॉल करती हूँ"कह तेजी से अंदर चल दी...

तमाचा भी बाइक से उतरा और वहीँ खड़ा रह इधर उधर देखने लगा... कोई पाँच मिनट में कनक एक बार फिर तमाचे के पास थी...कनक तमाचे का हाथ पकड़ी और अंदर कैम्पस में कर ली...

तमाचा ऐसे खुद को ले जाते देख कनक से धीमे स्वर में पूछा,"हे,मम्मी पापा नहीं है क्या..."

कनक उसे ले छत की तरफ सरपट भागती हुई बोली,"दोनों है, पापा आज ओवर पिए हुए हैं...कहीं पार्टी से आए हैं...मम्मी को बोल दी मुझे बदबू आ रही है... मैं छत पर हूँ...खाना बन जाए तो आवाज दे देना..."

तमाचा मामले को रिस्क में पड़ा देख बोल पड़ा,"अगर मम्मी आवाज ना दे छत पर आ गई तो..."

कनक,"नहीं आएगी...उनको सीढ़ी चढ़ने में प्रॉब्लम है...सांस फूलने लगती है...अब मुंह बंद करो और चलो जल्दी..."

तमाचा हल्के से मुस्कुराता हुआ कनक के साथ छत पर आ गया...खुले आसमान के नीचे... ऊपर पहुंचते ही कनक तमाचे से लिपट गई और अपने होंठ तमाचे के होंठ से सटा दी...

तमाचे भी कनक को कस के जकड़ता हुआ किस को डीप किस में तब्दील कर दिया...अपनी जीभ को कनक के अंदर दाखिल कर चलाने लगा...कनक भी तमाचे की जीभ को होंठो से दबा चुभलाती,चूसती,छोड़ती...

कुछ ही पलों में दोनों हाँफने लगे...किस टूट गई थी... समय ना गंवाते हुए तमाचा कनक की समीज पकड़ ऊपर करना शुरू कर दिया...कनक भी साथ दे दी और अगले ही पल वो सिर्फ ब्रॉ में थी...कनक हाथ पीछे कर बालों से पिन निकाल दी और सर को हिलाती हवा में ही सभी बालों को एडजस्ट कर ली...

तबतक तमाचा कनक की एक चुची पकड़ ब्रॉ के ऊपर से ही दूसरी चुची पर मुंह लगा दिया...कनक ये देखते ही तमाचे की पीठ पर एक चपत लगाती हुई बोली,"शाले, ब्रॉ गीली करेगा क्या...चल छोड़,खोल रही हूँ..."

कनक ब्रॉ की हुक खोल दी और तमाचा कनक की ब्रॉ पकड़ नीचे छोड़ दिया...तमाचा एक बार फिर नंगी चुची पर टूट पड़ा...अब वो पूरे ताव में था... पल भर में ही तोड़ मरोड़ कर कुचल सा दिया...कनक दर्द से बिफर पड़ी पर वो तमाचे के सर पकड़ और चूसने को कह रही थी...

तमाचा कनक की दोनों चुची निचोरने के बाद नीचे बढ़ने लगा और नाभि के पास पहुँच हल्की सी बाइट कर दी...कनक सिसक सी गई और तमाचे के बाल जोर से पकड़ और दबा दी...

जीभ से चुभला रस चूसने के बाद तमाचा खड़ा हुआ और अपना पैंट खोलने लगा...कुछ ही पल में काला नाग कनक के हाथ में थी...कनक उसे आगे पीछे करती घुटने के बल बैठ गई और अगले ही पल मुंह खोलती आधे से ज्यादा लंड घोंट गई...

तमाचे के पांव कनक की रसमयी मुख की गरमी पाते ही थड़थड़ा गया...वो अगले ही पल कनक के बालों को पकड़ झटके से अलग किया और कनक को वापस खड़ा कर दिया... कनक आश्चर्य से भर गई कि क्या हो गया इसे...

जवाब तुरंत मिल गया...तमाचा पीछे होता हुआ रेलिंग के सहारे जा टिका और अगले ही तेजी से कनक को बैठाया और अपना लंड कनक के मुँह में ठूँस दिया... कनक ऊबक सी गई और हिचकी लेने गई...औकात से ज्यादा जो अंदर चली गई थी...

पर तमाचा तो तमाचा ठहरा...उसे भला इन सब की क्या परवाह...वो दोनों हाथ से कनक के सर को दबोचा और लगा रौंदने... कनक गूँ-गूँ करती जा रही थी और दोनों हाथ से तमाचे के जांघों को दूर करने की कोशिश कर रही थी...

पर तमाचा तो पहले ही दीवाल से जा सटा था... जिससे कनक की प्रयास शत प्रतिशत विफल हो रही थी... तमाचे के मुख से वासना की आवाजें साफ सुनाई दे रही थी... वो खुले आसमान की तरफ मुंह कर आहें भर रहा था...

कनक की हालत बदतर होती जा रही थी... उसकी मुँह बिल्कुल बूर की तरह हो चली थी... जैसे बूर में लंड पेलते वक्त उससे पानी की धार बहती रहती है,ठीक उसी तरह उसके मुंह से ढ़ेर सारी लार,थूक बह रही थी...

तमाचा के लिए अब सब्र करना मुश्किल हो चला था... वो ऐन वक्त पर कल्टी मारा और अपना लंड कनक के मुंह से बाहर खींच लिया... कनक के गले से लंड निकलते ही वो खांसती हुई हांफ रही थी...

तमाचे एक पल भी रूकना नहीं चाहा और कनक को उसी अवस्था में जबरदस्ती खड़ा किया और उसकी सलवार खोलने लगा...कनक किसी तरह की विरोध करने की इच्छुक नहीं थी... तमाचे की दरिंदगी से वो कई बार परिचित थी...

तमाचा सलवार खोलने के तत्क्षण भींगी पेंटी को नीचे करता हुआ बोला,"मादरचोद, आज तेरी गांड मारूंगा... कभी मारने नहीं दी है..."

कनक आँखें दिखाती हुई बोली,"कमीने, आग बूर में लगाई है और मारोगे गांड़...चुपचाप आगे पेल...पीछे दर्द भी काफी होगी...पहली बार आठइंची पीछे नहीं लूंगी..."

तमाचा कनक को नंगी कर पीछे घुमा कर झुकाते हुए बोला,"रंडी चुपचाप ले ले...आराम से लूंगा... नहीं तो उठा के नीचे ले जाऊंगा और तेरे पियक्कड़ बाप के बगल में लिटा के चोदूँगा...समझी..."

कनक तमाचे की बात सुन लाल पीली सी आँख करती हुई बोली,"माधरचोद कहीं का... बाप का नाम मत लेना अभी से नहीं तो यहीं खून पी जाऊंगी..."

तमाचा कनक को कमर के ऊपर पूरी तरह झुका दिया जिससे कनक के दोनों हाथ जमीन पर टिक गए... तमाचे कनक को गुस्से में आते देख हल्के से मुस्काया और कनक की कमर को पकड़ अपना लंड उसकी बूर पर रगड़ते हुए बोला,"क्यों, डर लग रहा है क्या कि कहीं बाप नंगी देखा तो चोद ना दे..."

लंड अपनी बूर पर महसूस कर कनक सिसक पड़ी नीचे... सिसकती हुई कनक बोली,"कुत्ते, नंगी लड़की देख कौन रूकेगा...अब प्लीज डाल दो ना...मर रही हूँ...ऊफ्फ्फ्फ..."

तमाचा अब भी सुपाड़ा घिस रहा था...तमाचा कनक की बेसब्री देख कुछ रहम करता हुआ हल्का दबाव बनाता हुआ सुपाड़ा अंदर प्रविष्ट कर दिया... मोटा सुपाड़ा अंदर जाते ही कनक ईस्स्स्स्स्स कर पड़ी...

तमाचा कनक की कमर पर और पकड़ बना बोला,"तो कनक डॉर्लिंग, अभी बाप के पास ले चलूँ या बाद में..." कनक इस वक्त मछली की तरह मचल रही थी...वो जल्द से जल्द तृप्त होना चाहती थी...

कनक,"शाले, क्या बाप बाप लगा रखा है...अभी तू चोद बाद में जिसके पास कहेगा चलूंगी..." कनक गुस्से और वासना में पागल हो रही थी... जबकि तमाचे को ऐसे खेल में काफी आनंद आता था...

तमाचा ने हल्की हंसी हंसा और कमर को पकड़ करारा शॉट दे मारा... आठ इंची नाग दनदनाता हुआ कनक की बूर को भेदता छः इंच तक अंदर दाखिल हो गया... कनक की चीख निकलते निकलते बच गई या फिर कनक चीख को निकलने नहीं दी...

कनक थड़ थड़ कांपने लगी थी और दर्द से सुबकने लगी थी... वो छूटने की भरकस प्रयास कर रही थी पर तमाचे की नजबूत पकड़ एक इंच भी हिलने नहीं दे रहा था...वो बस सर को इधर उधर कर रह गई...

कुछ पल में जब कनक शांत हुई तो तमाचा बोला,"लगता है आजकल रंडी खाली खाली जा रही है...क्यों सच है ना?" कनक अभी भी दर्द महसूस कर रही थी...फिर भी बोली...

कनक,"हाँ अपने टाइप का कोई जल्दी मिलता नहीं है ना...सब चिपकू ही मिल रहे हैं और प्यार व्यार मैं कर नहीं सकती..."

तमाचा कनक की बात से खिलखिलाता हुआ अपना लंड सुपाड़ा छोड़ पूरा निकाल लिया और हमच के एक और शॉट मारा...अबकी बार पूरा आठ इंची कनक की बूर में उतर गया... कनक के मुख से एक भाप का गोला बाहर को निकल गई...जितनी जगह लंड लिया उतनी हवा बाहर...

तमाचे कनक की छटपटाहट देख बोला,"तेरी मां की चूत मारूँ शाली... पहले डाल डाल चिल्ला रही थी और जब डाला तो छटपटा क्यों रही हो..."

कनक लगभग रोते हुए सिसक के बोली,"शाले तेरा लंड रहता तब ना...तू तो गदहे वाला रखे हुए है तो फटेगी ही ना...प्लीज थोड़ा सा बाहर कर लो ना...ईस्स्स्स...ऊफ्फ्फ्फ..."

तमाचे अपने आदतन तपाक से जवाब दिया,"अपनी मां की बूर दिलवाएगी फिर निकालता हूँ..." कनक तो गुस्से से भर गई पर इस वक्त क्या कर सकती थी...बस दो चार गाली के सिवाए...

कुछ ही देर में कनक की दर्द काफी कम हो गई तो मंद मंद अपनी कमर नचाने लगी...तमाचा समझ गया कि अब सब ठीक है... वो अपने लंड को थोड़ा बाहर निकाला और फिर वापस...कनक के मुख से ओहह निकल गई...

पर अब तमाचा रूका नहीं...थोड़ा और बाहर और वापस जड़ तक...तमाचा धीरे धीरे पूरा लंड अंदर बाहर करने में लगा था...कनक हर एक शॉट पर ओहहह,उफ्फ्फ,आहहह कर रही थी...

कुछ ही पल में तमाचा पूरा लंड अंदर बाहर कर कनक की बजाने लगा...बीच बीच में थप्प थप्प चूतड़ भी बजा रहा था... कनक के बाल हर धक्के से छत की सतह को बटोर रही थी और चुची थिरक रही थी...

अचानक कनक चिल्लाती हुई बिफरी.. कनक,"वहाँ..आ...नहीँ...ई..ई...कुत्ते..ए..ए...निकाल उंगलीईई...बाहरऽरऽरऽ...."तमाचा अपनी एक उंगली गीली कर सीधा कनक की गांड़ में घुसेड़ दिया था जड़ तक...

पर तमाचे पर कोई असर नहीं... वो चुपचाप अपनी स्पीड बढ़ा कनक को चुप कर दिया और उंगली से गांड़ के अंदर कुरदने लगा...कभी वो उंगली को गोल गोल नचा छेद बड़ी करने में लगा था... कनक दोहरी मार से और तड़प गई...

कनक की सहनशक्ति जवाब देने लग गई...वो पल पल छूटने की कोशिश कर रही थी... वहीं तमाचा पूरे दमखम से पेले जा रहा था... अगले ही पल कनक चीत्कार करती हुई कांपने लग गई...

कनक की बूर से नदी बहने लगी जो छत को भिंगोने लगी...कनक बेहोश सी हो गई पर तमाचे पूरी ताकत से लगभग उठाए था... कनक झड़ रही थी साथ में तमाचा फच्च फच्च की आवाज से ठोके जा रहा था... कनक जब झड़ गई तो उसकी बूर तमाचे के लंड को पकड़ छोड़ कर रही थी...

तमाचा अभी नहीं झड़ा था... वो अब और तेजी से से फचाक-२ की ध्वनि उत्पन्न कर रहा था... कनक कुछ देर तक हाँफती रही फिर जब नॉर्मल हुई तो सर को घुमा कर तमाचे की तरफ की...

चांद की रोशनी में चेहरा तो स्पष्ट नहीं मालूम पड़ रही थी पर तमाचे को आभास जरूर हुई कि वो मेरी तरफ देख रही है...तमाचे धक्के को और तेज करते हुए बोला,"बोल मादरचोद, पेट से कर दूँ..."

कनक,"नहीं... बाहर गिराना..."कनक एक शब्दों में ही जवाब दे वापस सीधी हो गई... इस अवस्था में ज्यादा देर तक मुड़ नहीं सकती थी... तमाचा की रफ्तार और बढ़ गई...वो अब मंजिल की तरफ बढ़ रहा था...

अगले कुछ हिला कर शॉट मारने के बाद तमाचा अपना लंड तेजी से बाहर कर लिया...वो सिसकते हुए तेज गति से बोला,"जल्दी मुँह खोल भोसड़ी...."

कनक छूटते ही थोड़ी लड़खड़ाई पर जल्द ही संभलती हुई पलटी और घुटनों के बल तमाचे के पैर के पास बैठ मुंह खोल दी... तमाचे सट से लंड पेल दिया और बूर में पेलने की गति से ही पेलने लग गया...

दो चार धक्कों में ही तमाचा चीख पड़ा और लंड से रस बरसाने लगा...कनक की आँखें रस पाते ही स्वतः बंद हो गई और आनंद हो रस पान करने लगी... तमाचा झटके लेते हुए कनक के गले को तर कर रहा था...

तमाचा ढ़ेर सारा वीर्य छोड़ा जिसे कनक कई घूंटों में पी सकी... आखिर दिन से ही स्टॉक किए जो था... सारा रस निचोड़ने के बाद भी कनक नहीं हटी और मुरझाए लंड को चुभलाती बाकी बची रस को चाटने लगी...

तमाचा कनक की इस अदा से घायल सा हो गया और उसने अपने हाथों से कनक के गालों को सहलाते हुए बोला,"आहहह मेरी रानी...दिल खुशकर दी आज..."

कनक हल्की मुस्काती हुई आखिरी चुप्पे लगाई और लंड को छोड़ खड़ी होती हुई बोली,"शाले फिर भी कितना दर्द दिया...शर्म नहीं आती बोलते..."

तमाचा कुछ देर पहले की बात याद कर हंसते हुए बोला,"तुम हो ही इतनी गरम माल कि सब्र नहीं होता... " कनक तमाचे को बीच में ही चुप करती हुई बोली...

कनक,"चल अब जल्दी निकल... मम्मी अभी तक आवाज नहीं दी है,अब कभी भी दे सकती है..." कनक अपनी बात कहती हुई कपड़े पहनने लगी... तमाचे भी पैंट को ढ़ंग से पहन रहा था...

तमाचा,"हे, कल दिन में आना मेरे रूम पर...पिछवाड़ा लेना है..."

कनक उसकी बात सुन हंसती हुई बोली,"कतई नहीं...तुम बेरहम बन जाते हो...अगर फट गई तो घर कैसे आऊंगी..."

तमाचा,"आराम से करूँगा यार...क्रीम लगा के..."

कनक,"जरूरत नहीं..अब निकलो...बाकी बातें फोन पर करना..."कनक तमाचे को लगभग धकेलती हुई सीढ़ी की तरफ कर दी...

तमाचा हंसता हुआ "कल आना, इंतजार करूँगा मैं.." कहता हुआ नीचे बढ़ने लगा... कनक भी साथ आई... तमाचा को बाय कह कनक वापस रूम में घुस गई... तमाचा भी बाइक स्टॉर्ट किया और निकल पड़ा...

कनक अपने रूम में घुसते ही पहले तो बाथरूम गई... फिर फ्रेश होने के बाद निकली तो मम्मी खाने के लिए आवाज दे दी... कनक भी खाना खाने चल दी... खाना पीना होने के बाद कनक फोन निकाली और ऑडियो क्लिप सुनने लग गई...

जब कनक की समझ में नहीं आई तो उसने तमाचे को फोन घुमाई...तमाचा का फोन बिजी था... कनक कुछ देर वेट कर आवाज को हर किसी से मैच करवा रही थी मन ही मन, पर उसके जानकार व्यक्ति में से किसी की मैच नहीं हो रही थी...

कुछ ही पलों में तमाचा का फोन आ गया... कनक फुर्ती से रिसीव की और हैलो की... तमाचा हैलो सुनते ही बोलने लगा,"बहन की लौड़ी, एक घंटा पहले ही तो तेरी बूर फाड़ा था तो इतनी जल्दी फिर से कैसे खुजली मच रही है..."

कनक तमाचे की स्वभाव जानती थी...वो उसकी बात का जवाब एक छोटी हंसी के साथ दी और बोली,"ऑडियो सुना...?"

तमाचा,"हाँ सुना... पर अभी कुछ मालूम नहीं चला... शाला फोटो तो रंग बिरंगी है... साली रूपा तो देख के पनिया गई होगी यार..."

कनक,"हाँ, मुझे भी नहीं मालूम पड़ी... हे उसकी फेसबुक आईडी नहीं दी तुम्हें, चाहिए तो बोलो..."

तमाचा,"हाँ सजेस्ट कर देना...मैं एड तो हूँ ही...अभी उधर ही मिलते हैं चल..."

कनक,"हाँ ठीक है फिर...रूपा को भी बुलाती हूँ..."

तमाचा आश्चर्य से पूछा,"भोसड़ी रूपा तो नहीं थी ना पहले..."

कनक,"नहीं, आज ही आईडी बनाई है..."

तमाचा हामी भरता हुआ बोला,"हम्म्म्म...ग्रुप में लेना...वहीं चोदूँगा शाली को..."

कनक हंसती हुई बोली,"चोद लेना...चल बॉय..फेसबुक पर मिलती हूँ..."

तमाचा भी बॉय कह फोन रख दिया..

रात्रि भोजन के बाद कनक,तमाचा और रूपा तीनो फेसबुक पर आ धमकी... तमाचा तो पहले से ही मूड बना रखा था कि रूपा से मजे लेने हैं फेसबुक पर ही... बात बनी तो आमने सामने भी हो जाएगी...

उधर रूपा पहले तो हल्की फुल्की बात की पर जैसे ही तमाचा पहला कदम बढ़ाया कि रूपा दो कदम पीछे...कनक की तरफ से बस हंसी की स्माइली आ रही थी...रूपा ग्रुप में रहने के बाद भी ना के बराबर थी...

तमाचा लाख कोशिश किया कि रूपा सपोर करे,कुछ बात करे पर निराशा ही हाथ लगा... तमाचा गुस्सा भी हुआ पर कर भी क्या सकता था... बस कनक को गालिया सुनाने लगता... वो भी कम नहीं थी, एक के बदले चार सुनाती...

सामने होती तो ना डर रहती कि कहीं वो पेल ना दे... हार कर तमाचा नॉर्मल पर उतर आया तो रूपा भी भुक्क से हाजिर हो गई जवाब के साथ... तमाचा का खून तो मानो नस के बाहर दौड़ने लगी... खड़ा लंड को पाला जो मार दिया था...

इन सब के दौरान ही इन सब की नजर उस लड़के की आई.डी. पर पड़ी जो अब ऑनलाइन आया था... तमाचा खटाक से उसे इनबॉक्स में अपना छोड़ दिया,"हे ब्रो, तेरी प्रोफाइल तो मस्त है..."

तारीफ किसे नहीं पसंद होती, वो लड़का भी अपनी तारीफ सुन फूला नहीं समाया और सीना चौड़ा करते हुए "थैंक्स " भेजा... इतने में तमाचा दोनों को दोनों को आपस में बात करने बोल उस लड़के से लग गया...

पहले तो हल्की फुल्की बात किया फिर तमाचा लम्बी वाली गली से अपनी मंजिल की तरफ बढ़ते हुए पूछा,"हे, तुम्हारी फ्रेंड तो काफी मस्त मस्त है, एकाध से हमें भी मिलवाओ ना..."

लड़का स्माइली देते हुए,"हाँ, मुझे लड़कियो से दोस्ती काफी पसंद है..."

तमाचा,"सिर्फ दोस्ती या और कुछ भी..."

लड़का,"क्या यार, अब इतना भी फायदा नहीं मिलेगा तो दोस्ती किस काम की..."

तमाचा,"ग्रेट यार... इतने सारे में से एक दो की हमें भी तो दिलवा दो..."

लड़का,"दिलवा तो देता पर थोड़ा रिस्क है..."

तमाचा के चेहरे पर हंसी आ गई कि मामला पट रहा है...तमाचा,"यार बिना रिस्क का मजा क्या... वो तू मुझ पर छोड़ दे... बाकी अगर खर्चा पानी लगेगा तो भी मैं मैनेज कर लूंगा..."

लड़का,"हम्म्म्म...कोई गर्लफ्रेंड नहीं है क्या जो बर्दाश्त नहीं कर पा रहे..."

तमाचा दिमाग का भी इस्तेमाल कर रहा था... वो कोई भी जवाब ऐसे नहीं देना चाहता था कि उसे कुछ गड़बड़ लगे...तमाचा,"यार इतना बदसूरत और चवन्नी छाप तो हूँ नहीं कि ना हो...है एक पर शाली प्रपोज दिन से ही रट लगा कि शादी के बाद... दिखने में मस्त है तो छोड़ नहीं पा रहा.. शायद शादी भी हो जाए क्योंकि वो भी हमें छोड़ती नहीं..."

उस लड़के ने तमाचे की बात के जवाब में ढ़ेर सारी हंसी की स्माइली सेंड कर दिया... तमाचा भी मुस्कुरा दिया कि शाला, बात में तो उलझ गया...और उलझेगा कैसे नहीं बेटा,आखिर नेता का बेटा हूँ...

लड़का,"फिर तो सोचना पड़ेगा कुछ तेरे लिए..."

तमाचा तो इसी बात का इंतजार कर रहा था...तमाचा,"प्लीज यार, किसी से भी टांका भिड़वा दे ना...देख अभी भी शाला पूरा तैयार है..."

लड़का,"हम्म्म...मैं तुझे एक नम्बर देता हूँ...ठीक है...तू उस पर कॉल करना... वो तुम्हें तुम्हारी पसंद की लौंडिया दिला देंगे..."

तमाचा,"थैंक्यू यार...मैं तुम्हारा जिंदगी भर अहसान रहूँगा..."

लड़का,"ना भाई, एहसान की जरूरत नहीं है...बस वो जितना कहेंगे, उतना जेब ढ़ीली करना होगा..."

तमाचा,"उसकी फिक्र मत कर भाई...मेरा बाप पैसा छापता है मेरे लिए टक टका टक... अच्छा भाई अब जल्दी से नम्बर दे दे..."

लड़का,"ओके यार देता हूँ पर अभी नहीं कल करना होगा...आज वे शहर में नहीं हैं... कल आएंगे... तुम्हारे ही शहर के हैं...मैं तो काफी दूर हूँ तुम्हें तो पता ही है..."

तमाचा,"हाँ यार, पता है...माल कड़ाका देने बोलना यार..."

वो लड़का स्माइली से हंसता हुआ बोला,"उसकी फिक्र मत कर यार... बस एक बात का ख्याल रखना होगा कि तुम अपनी पहचान सही बताना..."

तमाचा कुछ आश्चर्य से पूछा,"हाँ यार बता दूँगा पर ऐसा क्यों?"

वो लड़का कुछ चुप रहा फिर बोला,"देख भाई बुरा मत मानेगा तो बताऊंगा..."

तमाचा,"नहीं यार, अब तुम मेरे दोस्त हो तो दोस्त की बात का क्या बुरा मानना..."

वो लड़का,"बात दरअसल ये है कि उनके सम्पर्क में हर तरह की लड़की है...बाजारू से लेकर घरेलू तक... तो जाहिर है घरेलू में कोई ऐसी भी हो जो तुम्हारे क्लोज हो तो ऐसे में अगर सही पहचान बता दोगे तो वो क्लोज से हट के माल दिलाएंगे...समझ रहे हो ना..."

तमाचा ना समझे, नामुमकिन ही था... वो तुरंत बोल दिया,"समझ गया यार...तुम उसकी चिंता मत कर...बस कोई घरेलू माल की जुगाड़ लगाना..."

लड़का,"ठीक है फिर...ये ले नम्बर **********...और इनको मैं बोल दूँगा... फिर तुम्हें उनके बताए जगह पर पहुंच जाना...ठीक है..."

तमाचा नम्बर एक अलग कागज पर जल्दी से नोट किया और फिर पूछा,"इनका नाम क्या है..."

लड़का,"आर.जे....पर वो सब मैं कर दूंगा...तुम्हें ज्यादा मेहनत नहीं करनी होगी... बस जब मैं तुम्हें कहूँ तू इनको फोन करना और इनके बताए जगह पर माल ले के पहुँच जाना मस्ती करने...ठीक है.."

तमाचा,"ठीक है भाई, थैंक्यू दोस्त...तुमने मेरे लिए इतना कुछ किया..."

लड़का हंसता हुआ इट्स ओके कहा और नींद आ रही कहता हुआ ऑफ हो गया...

तमाचा वापस कनक रूपा की ग्रुप में आया तो वहाँ काफी देर से सन्नाटा पसरा था...तमाचा दो तीन बार जब हाय हाय चिल्लाया तो कनक जवाब दी...

तमाचा,"भोसड़ी कहाँ बूर चुदवा रही है..."

कनक,"कुत्ते, रूपा भाग गई तो अकेली अचार डालती क्या यहाँ...कुछ मालूम चला..?"

तमाचा,"और नहीं तो क्या...तुम्हारी तरह थोड़ी ना हूँ जो नहीं मालूम पड़ेगी...रूपा भागी क्यों..?"

कनक,"क्या-२ ..कौन है वो..."कनक बेसब्री से पूछ बैठी...

तमाचा,"पता नहीं पर कल पता लग जाएगा...अभी बस नम्बर मिला है... आर.जे. नाम है इस भड़वे का... "

कनक,"नम्बर है तो अभी कॉल कर के देख ना..."

तमाचा गुस्से का स्माइली देते हुआ टाइप किया,"मादरचोद तू रंडी सब प्लान करती तो ठीक ठाक है पर जल्दबाजी कर मां बहन चुदवा लेती है... स्टेप से चल ना... तब तो सक्सेस होगी..."

कनक,"अच्छा अच्छा ठीक है... क्या प्लान है फिर..."

तमाचा अब नॉर्मल होता हुआ बोला,"हम्म्म्म...प्लान कुछ नहीं है... कल इससे बात होगी तो कोशिश करूँगा पहले मिलूँ किसी तरह..."

कनक कुछ आश्चर्य और कुछ उत्सुकता से पूछी,"शाले तुम्हें लगता है कि वो मिलेगा..."

तमाचा,"भोसड़ी नहीं मिलेगा ऐसे मुझे भी पता है... इसलिए तो चोदने का कार्यक्रम भी फिट किया हुँ...बहनचोद तुम दोनों की वजह से आज पहली बार पैसे दे कर चोदने के लिए राजी हुआ हूँ...और वो पैसे तुम दोनों देगी समझी ना..."

कनक की हंसी निकल आई फिर वो बोली,"शाले झूठ क्यों बोलता है...मैं खुद कई बार तेरे से पैसे ली हूँ..."

तमाचा,"अबे रंडी ठीक से याद कर... तीन दिन फ्री में चोदा था पहले... चौथी बार तुम रोने लगी थी कि मुझे पैसों की जरूरत है...हेल्प कर दो कुछ...तब हेल्प किया था कॉलेजफ्रेंड सोच कर... बूर के पैसे नहीं दिए थे..."

कनक,"अच्छा छोड़ो उन बातों को...अब नींद आ रही है...सोने जा रही हूँ...कल मिलते हैं..."

तमाचा मैसेज पढ़ते ही तेजी से टाइप करता हुआ सेंड बटन दबाया,"रूक भोसड़ी, रूपा क्यों भागी...ये तो बता..."

कनक पहले तो हैप्पी स्माइल दी फिर बोली,"भागी क्यों..? तूने गरम गरम बातें कह दी तो बेचारी गीली हो गई तो चली गई बी.एफ. से बात करने..."

तमाचा,"भोसड़ी रूपा कहीं की... शाली बी.एफ. से पेलवाती है और मुझे सटने तक नहीं देती...अच्छा कल मिल फिर बताता हूँ..."

अब कनक गुस्से से भरती हुई बोली,"कुत्ते, लिमिट में रह...वो तेरी तरह नहीं है जो कहीं भी मुंह मारे.. एक बी.एफ. है और उससे अभी तक सिर्फ बात ही करती है... तू उसे कुछ नहीं करेगा और ना कुछ पूछेगा...समझे..."

तमाचा,"हम्म्म्म...ठीक है...ठीक है..नहीं कहूँगा...पर यार एक बार दिलवा देना उसकी...बड़ी मन करता है उसे हमच्च के करने को..."

कनक,"शाले मैं नहीं दिलवाऊंगी...उसकी मर्जी हुई तो खुद दे देगी...पर इतनी बात याद रखना हमेशा अभी उसे कुछ भी ज्यादती मत करना...नहीं तो वो क्या, मैं भी बात तक नहीं करूंगी तुझसे..."

तमाचा,"शाली भड़कती क्यों है... वो दो चार बच्चे कर भी ले फिर देगी तो भी चलेगा...मैं अभी ही दिलवाने की थोड़ी कह रहा हूँ..."

कनक इस मैसेज की जवाब ढ़ेर सारी हंसी स्माइली से देती है...फिर टाइप करती है,"चल ठीक है...इतनी बेसब्री है तो कभी ना कभी दे ही देगी...चल बाय... सोने जा रही हूँ..."

तमाचा भी हैप्पी स्माइली के साथ गुड नाइट विश किया और ऑफलाइन हो गया... ऑफ होते ही तमाचा बाथरूम जा कस के मूठ मारा फिर सोया...

उधर रूपा तो सच में तमाचे की बात से काफी गरम हो गई थी... आखिर कैसे ना होती...एक तो भरपूर उफान मारती यौवन, जिनसे रूपा के तन पर के कपड़े पल पल दुआई मांगते कि प्लीज, आज भर छोड़ दो...

और साथ में कनक की किस, मसलन, मस्ती...याद आते ही रूपा तड़प सी उठती... काश, कोई मजबूत बांहें आए और कुचल कर रख दे मेरी जवानी को...बेचारी पर क्या कर सकती थी... अभी तक दिमाग जो काम कर रही थी...

फेसबुक बंद करते ही रोहन को फोन लगा दी...रोहन कई बार फोन बजने के बाद रिसीव किया तो सॉरी कहता हुआ बिजी होने की बात बोला...रूपा तो उखड़ सी गई कि इतनी रात गए कहाँ बिजी थे...

रोहन खैर कुछ ही पलों में अपनी मीठी बातों से रूपा को शांत कर ही लिया... और साथ ही एक चुंबन की मांग कर बैठा... रूपा ना नुकुर करने लगी, पर सच तो ये थी कि वो अगर सामने होता तो सब कुछ दे देती...

रूपा कई बार ना ना कहती हुई आखिर मान ही गई और रोहन के अनुमान के ठीक विपरित एक दो तीन चार.... करती हुई ना जाने कितनी किसें बरसा दी... रोहन तो आश्चर्य से भर गया और साथ ही वो रोमांचित भी हो गया...

और फिर तब से दोनों लग गए...एक बात बोलते और एक किस पास करते... अब तो रोहन की हिम्मत भी बढ़ गई थी... वो किस कहां दे रहा है ये भी कह देता... रूपा भी कहाँ पीछे रहती...

बात तब तक चलती रही जब तक कि दोनों के शरीर पर कोई बची ना रह गई... दोनों काफी खुल गए थे... और इस तरह बात करने में रूपा कई बार पानी भी छोड़ दी... रोहन बेचारा भी कब तक बचा रहता... वो भी अपने कपड़े भिंगो लिए थे...

दोनों काफी देर तक बातें करते रहे...ना जाने क्या क्या... बात तब बंद हुई जब रूपा को बाहर से कुछ आवाज आई...घड़ी पर नजर दौड़ाई तो तीन बज रहे थे... वो झट से बॉय कहती फोन रख दी...

और कुछ ही पलों में नींद की आगोश में समा गई...सुबह नियत समय पर मम्मी चाय देने आ गई... पर रूपा हिली तक नहीं... चाय रख मम्मी चली गई... नौ बजे करीब रूपा की नींद खुली तो टेबल पर चाय देखी...

वो डांट से बचने की जुगत में ठंडी चाय डकार ली और आँख मलती हुई बाथरूम में घुस गई... फ्रेश हो कर निकली तो किचन में और खुद ही चाय बनाई... और चाय लिए वापस कमरे में...

चाय पीते हुए फोन पर नजर डाली तो कई मिस्ड कॉल थी... नम्बर कनक की थी... रूपा फौरन कनक से बात की... सुबह-२ दो चार आशीर्वाद सुनाती कनक तमाचे की सारी बात कह डाली...

रूपा की आँखें भी चमक गई.... आर.जे. वही नाम तो है जो सीमा भाभी ने बताई थी...
रूपा कनक को बोल दी कि तमाचे को कहना पहले आर.जे. से मिल ले,फिर देखते हैं... कनक भी हामी भर दी...और फिर कुछ इधर उधर की बात कर फोन रख दी...

रूपा कुछ देर तक सोचती रही फिर अचानक ना जाने उसे क्या सूझी डिम्पल भाभी की नम्बर टाइप करने लगी... रिंग होने लगी और कुछ ही पलों में डिम्पल भाभी की हैलो भी रूपा को सुनाई दी...

रूपा को अच्छी तरह याद है कि डिम्पल भाभी ये नम्बर नहीं जानती है तो उसने प्रश्न कर बैठी,"डिम्पल जी से बात हो सकती हैं..?"

डिम्पल भाभी आश्चर्य भरी शब्दों में जवाब दी,"हाँ, मैं ही डिम्पल हूँ...कहिए..." पहली बार डिम्पल भीभी भी रूपा की आवाज नहीं पहचान पाई... डिम्पल की बात पर रूपा की हंसी निकल गई पर किसी तरह दबाती हुई बोली...

रूपा,"ओके, क्या आपके नीचे की बाल साफ हैं...किस करनी है...?"अचानक ऐसी बात सुन डिम्पल भाभी को चक्कर सी आ गई...वो कुछ पल खामोश रही पर अचानक उन्हें कुछ समझ आ गई और हंसती हुई बोली...

डिम्पल,"शैतान रूपा तू....." डिम्पल भाभी द्वारा पहचान लिए जाते ही रूपा खिलखिलाकर हंस पड़ी... डिम्पल भाभी भी रूपा के साथ हंसने लगी... डिम्पल भाभी फिर बोली,"कहाँ रहती है रूपा...आ नऽ मिलने..."

रूपा डिम्पल भाभी की ऑफर सुन बोल पड़ी,"क्यों, सँइया जी नहीं हैं क्या..." रूपा की शरारत शब्द सुन डिम्पल भाभी बोली,"..तभी तो बुला रही हूँ..."

रूपा,"ओके डिअर, मैं अभी आई..." और हंसी के साथ दोनों की फोन कटी और रूपा बाहर निकल गई... रूपा कुछ ही देर में डिम्पल भाभी के गेट पर खड़ी डोरबेल बजा रही थी...

डिम्पल भाभी मुस्काती हुई गेट खोली... गेट खुलते ही रूपा घुसी और बिना कोई पल गंवाए डिम्पल भाभी को दबोचती हुई जकड़ ली और अपने होंठ उनके होंठ से चिपका दी...

डिम्पल भाभी कसमसा सी गई... कुछ पलों की कोशिश के बाद डिम्पल भाभी रूपा के होंठ से आजाद होती हुई बोली,"पहले बैठ तो सही,भाग थोड़ी रही हूँ..."

रूपा अपनी आँख नचाती हुई बोली,"क्या करूँ, ऐसी माल सामने हो तो सब्र ही नहीं होती है ना..." और अपनी बात खत्म होते ही रूपा डिम्पल भाभी की एक चुची भी पकड़ के उमेठ दी जिससे डिम्पल कराह उठी..

डिम्पल भाभी,"बदमाश, जैसे भाई दम निकाल देते हैं वैसी बहन भी है...चल अंदर..." डिम्पल भाभी रूपा को धकेल कर खुद से अलग की और गेट बंद करने लगी... रूपा हंसती हुई भाभी के बेडरूम में जा पसर गई...

बेडरूम में आते ही भाभी के बारे में सोचने लग गई... आखिर भाभी कैसी रहती है खुले दिल से सबके सामने और अंदर ही अंदर कैसे जिंदगी जी रही है... कहीं ऐसा ना हो कि भाभी अपनी मर्जी से सब कर रही है...शायद... पर वो लड़का और आर.जे. तो कुछ अंश ब्लैकमेल की भी बात बोला था...

मतलब ये भी हो सकती है कि पहली बार ब्लैकमेल की गई हो और अब भाभी उनके रंग में रंग गई हो... आखिर ये चीज ही ऐसी ही होती है... मन ही मन रूपा ठान लेती है कि सच्चाई तो जरूर पता करूंगी...

तब तक डिम्पल भाभी अंदर आ गई और आते ही रूपा पर चढ़ सी गई और अपने दोनों हाथ रूपा की चुचियों पर रख मसलती हुई बोली,"अब बोल, कहाँ किस करेगी..."

रूपा सिसकी और हंसी के साथ बोली,"नीचेऽ...आहहहह..." रूपा की आवाज अगले ही पल बंद हो गई... डिम्पल भाभी ने तब तक रूपा के होंठ सिल जो दिए थे... डिम्पल भाभी रूपा को बेरहमी से मसलने लगी...

कुछ ही पलों में रूपा और डिम्पल पसीने से भींगने लग गई थी... रूपा की साँसें जल्द ही उखड़ने लगी... उखड़ती साँस देख डिम्पल भाभी किस तोड़ दी और रूपा के गाल को चूमने लग गई...

चूमती हुई डिम्पल भाभी बोली,"सच में लेगी या बस पूछ रही है.. "

रूपा नीचे से उत्तेजना वश कमर उचकाती बोली,"सच में..."

डिम्पल भाभी रूपा से जवाब सुन चूमना रोक दी और हल्की ऊपर आ उसकी आँखों में आँखें डाल कर देखने लगी और फिर मुस्कुराती हुई बोली,"लगता है अब हमारी रानी के ताले को चाभी की जरूरत है..."

रूपा मुस्कुराती आँखों से बस हूँ... कर दी... फिर डिम्पल भाभी अपनी जीभ निकाल रूपा के होंठ पर फेरती हुई ऊपर सरकी और सरकती हुई रूपा की चुची के ठीक नीचे आ जमी...ऐसे में डिम्पल की साड़ी सिमट कर जांघ तक आ पहुंची थी...

रूपा ऐसी अवस्था में भाभी को देख अपने हाथ बढ़ाई और साड़ी के अंदर सरका दी...अंदर घुसते ही हाथ सीधी डिम्पल भाभी की सच में चिकनी चूत पर जा चिपकी... डिम्पल भाभी की बूर स्पर्श होते ही रूपा चौंक सी गई...

बूर थी या कोई जलती अंगार...इतनी गर्म... रूपा तो महसूस की कि कहीं हाथ ना जल जाए... रूपा हाथ को एकबारगी पीछे खींच ली थी... जिससे डिम्पल भाभी हंस पड़ी...

डिम्पल,"बेबी, कुछ नहीं होगा..." रूपा हल्की झेंपती हुई मुस्कुराई और वापस हाथ बूर पर रख यहलाने लगी... डिम्पल की आहें निकल पड़ी...वो होंठों को चबाती सिसकियाँ रोकने की नाकाम कोशिश करती रही...

अगले ही पल रूपा डिम्पल भाभी को देख हाथ बाहर की और भाभी की कमर पकड़ पीछे की तरफ पुश की...डिम्पल हालत समझ पीछे खिसकी तो रूपा उसी पल उठने लगी...

और कुछ ही पलों में डिम्पल भाभी बेड पर चित्त लेटी थी और रूपा के कमर को उनके पैर लपेटे थी... रूपा तुरंत ही खिसक के उनके घुटने के पास हुई और झुकती हुई अपना चेहरा उनकी बूर के समीप कर ली...

और फिर साड़ी को ऊपर करती भाभी को पूरी नंगी कर दी... रसों से सरोबार चमकती चूत देख रूपा की आँखें फटी रह गई... वो बस देखती रह गई... ऐसी बूर डिम्पल भाभी की कैसे रह सकती है...

वो देखती हुई अपने हाथ हौले हौले बूर की तरफ बढ़ाने लगी... बूर पर हाथ रखते ही रूपा मदहोश सी हो गई... बूर की हलचल देख जो हाथ पड़ते ही अजीब तरीके से सिकुड़ रही थी...

डिम्पल भाभी रूपा की ओर से इतनी देर होती देख हल्की सर ऊपर कर रूपा को यूँ निहारते देख मुस्कुरा दी और सर को वापस पुनः रखती हुई बोली,"रूपा..."

डिम्पल भाभी की आवाज सुन रूपा सर ऊपर कर भाभी को जवाब में "हूँ..." बोली... रूपा की नजर भाभी की ऊपर नीचे करती चुची पर भी जा अटकी जो लगभग थिरकती सी लग रही थी... रूपा तो बस कायल सी हो गई...

डिम्पल,"मेरी इन्हीं अदाओं से तो सब पागल हो जाते हैं जैसे तुम हुई जा रही हो... "

रूपा भाभी के एक एक शब्द पर गौर की तो वो आश्चर्य से भर गई... वो किसी तरह पूछी,"मतलब भाभी..."

डिम्पल भाभी सर को ऊपर हाथ के सहारे की और रूपा की तरफ मुस्काती हुई बोली,"अब तुम जानती थोड़े ही नहीं हो बताऊँ... चल बहाने कर रही हो तो बता ही देती... तुम्हें मेरे बारे में दो चार दिन में जो भी मालूम हुई, वो सब सच है..."

रूपा की तो ये बात सुनते ही हाथ पांव ठंडी सी गई... वो मूक सी बन गई... अब डिम्पल भाभी को कैसे मालूम कि मैं भी जानती हूँ... इनको तो सिर्फ सीमा भाभी के बारे में मालूम होनी चाहिए थी...

रूपा की हालत तो अजीब हो चली थी... ना कुछ करते बन रही थी और ना कुछ कहते... डिम्पल भाभी मुस्काती हुई रूपा के चेहरे की बदलती रंग देख रही थी... रूपा भी अब सिर्फ डिम्पल भाभी की ही तरफ देखी जा रही थी...

कुछ देर की खामोशियाँ के बाद डिम्पल पूरी तरह उठ के बैठ गई...रूपा अभी भी स्टैचू बन भाभी की बूर की सुगंध ले रही थी पर रूपा के मन में तो कुछ और ही थी...

डिम्पल भाभी प्यार स् रूपा के सर पर हाथ फेरती पीछे गर्दन तक ले गई और अपने हाथ से रूपा की रूपा की सर पर दवाब दे डाली... रूपा के होंठ सीधी भाभी की बूर में जा धंसी... रूपा इसके लिए तैयार नहीं थी और वो छूटने की कोशिश करने लग गई...

रूपा को यूँ छटपटाती देख भाभी बोली,"रानी, इतना मत सोचो... मेरी बात मानोगी तो तुम्हें सारी कहानी बता दूँगी..." भाभी की बात सुन रूपा थोड़ी सहज हुई और अपनी तरफ से कर रही प्रयास को रोक दी...

जिसे देख भाभी ताकत लगाना छोड़ बस सिसकियाँ लेती रूपा के बाल सहलाने लगी... रूपा के होंठ भाभी की बूर के होंठ से चिपकी थी... रूपा जब अपने होंठों में हरकत लाई तो वो दंग रह गई... भाभी की बूर भी उसकी हरकतों का ताल से ताल मिला सहयोग देने लगी...मानों वो बूर नहीं,भाभी के होंठ हो...

एक दो बार होंठ से हल्की चूसी और रूपा हल्की सर उठाती हुई बोली,"कैसा बात भाभी..." और रूपा पुनः भाभी की बूर में घुस स्मूच किस की तरह किस करने लगी... भाभी की अब सिसकी तेज होने लगी तो रूपा ने अपनी जीभ उनकी बूर के बीच फंसा नचाने लगी...

डिम्पल भाभी तड़प सी गई और रूपा के बाल जोर से पकड़ ली और लगभग पूरी ताकत से रूपा को बूर से अलग कर दी... रूपा बालों के दर्द से हल्की चीख पड़ी... वो भाभी की तरफ हैरानी से देखने लगी...

डिम्पल लम्बी साँस लेती कुछ नॉर्मल हुई तो रूपा को देख हल्की मुस्कुरा पड़ी और अपने हाथ से रूपा के होंठों पर लगी अपनी बूर की पानी पोंछती बोली,"बेबी, बिल्कुल नई नवेली हो... लगता है सिखाना पड़ेगा सबकुछ...किस करना है तो निरंतर होनी चाहिए... पूरी हवसी बननी होती है ताकि मैं कितनी भी ताकत लगाऊं उससे हर वक्त अधिक ताकत लगानी होगी..."

रूपा भाभी की बात समझ हल्की सी मुस्कुरा दी और वो बेड पर भाभी के ठीक सामने बैठ गई... अपनी नजर सामने बैठी भाभी की नाम की लपेटी साड़ी को पकड़ अलग करती बोली,"भाभी, बताओ ना कौन सी बात माननी होगी.."

डिम्पल भाभी की साड़ी पल भर में हट गई और ब्लाउज ब्रॉ भी उसी पल भी हट अलग पड़ी थी... रूपा डिम्पल भाभी की बनावट को गौर से निहारे जा रही थी... डिम्पल भाभी अपने बाल ढ़ंग से पीछे की और आगे रूपा की तरफ खिसक के बिल्कुल सट गई...

अगली पल भाभी रूपा की समीज पकड़ी और सर की तरफ कर उसे भी नंगी करने लगी... रूपा बिना किसी हिचक के मुस्कुराती पूरी सहयोग दी...अगले ही पल रूपा सिर्फ ब्रॉ में थी... भाभी अब रूपा की सलवार की नाड़े खोलती हुई बोली...

डिम्पल,"देखो रूपा, मेरी बात बस छोटी सी है... बस उसी पर अम्ल करने की जरूरत है..." तब तक नाड़े खुल गई और रूपा घुटनों पर खड़ी हो गई...सलवार नीचे सरक गई...फिर बैठती हुई पैर सीधी करती हुई बोली,"मतलब भाभी..."

डिम्पल रूपा की सीधी पैरों से सलवार खींच अलग करती बोली,"मतलब मेरी इच्छा है कि तुम जो ऐसे जासूसी की तरह जानना चाहती हो ना, वो छोड़ दो... मतलब अभी से इस बारे में तुम कभी सोचोगी भी नहीं... मैं सब बताने को तैयार हूँ..."

रूपा को थोड़ी हैरानी हुई कि आखिर क्यों? भाभी ऐसा क्यों चाहती है? जबकि इनसे उनको भी राहत तो मिल सकती है... भाभी ऐसा नहीं चाहती है मतलब भाभी अपनी मर्जी से ये सब कर रही है...

तब तक डिम्पल की उंगलिया रूपा की पैंटी में फंस गई और खींचने लग गई...रूपा कमर को कुछ पलों के लिए हवा में करती बोली,"भाभी, अगर आप अपनी मर्जी से ये सब करती हो तो कोई बात नहीं... पर आप जैसी सब तो नहीं करती होगी...कोई ऐसी भी तो होगी जिससे जबरदस्ती करवाई जा रही होगी..."

पैंटी रूपा से अलग हो चली थी और डिम्पल भाभी रूपा की कोरी बूर आँख गड़ाए देख रही थी...एकदम कसी हुई... फांक के बदले बस लकीर दिख रही थी... भाभी रूपा की बात सुनने के बावजूद कोई जवाब ना दी और अपनी उंगली उन लकीर पर रख थोड़ी जवाब से चलाने लगी...

अंगली लकीर को दाब जरूर रही थी पर रास्ता नहीं बना पा रही थी... डिम्पल भाभी अचानक मुट्ठी में रूपा की बुर जकड़ ली और जोर से उमेठ दी... रूपा "आहह भाभी" करती चिहुंक पड़ी...

डिम्पल,"हाँ रूपा, मैं भी अपने मन से नहीं गई थी... पर वहाँ इनकी सेवा ऐसी होती है ना कि हर किसी की मर्जी हो जाती..." भाभी कहती हुई हंस पड़ी... रूपा समझ गई थी कि किसकी सेवा...

रूपा कुछ और बोलती इससे पहले कुछ बोलती, डिम्पल रूपा को धक्के देती पीछे कर देती है..रूपा बेड पर चित्त लेट जाती है... डिम्पल भाभी अगले ही पल बूर से बूर , चूची से चूची मिलाती रूपा पर चढ़ जाती है...

रूपा हल्की मुस्कुरा पड़ती...अगली वार डिम्पल भाभी रूपा के होंठों पर करती है... दोनों स्मूच किस में भिड़ जाते हैं...डिम्पल भाभी किस में ही ना जाने कितने पैंतरा दिखा दी... रूपा तो इतनी में ही घायल सी हो गई और भाभी को जकड़ चीखती हुई झड़ गई...

दोनों की रस से बूर नहा चुकी थी दोनों की... डिम्पल भाभी की बूर आदतन रूपा की बूर पकड़ने की कोशिश करती पर कसी बूर कैसे पकड़ पाती... बस रगड़ रही थी... डिम्पल किस तोड़ती बोली...

डिम्पल,"रूपा, मैं तुम्हें अपनी सबसे अच्छी दोस्त मानती हूँ... तभी कह रही हूँ इन बातों से मतलब छोड़ने की... तुम पर हर पल नजर रखी जा रही है... तुम कब किससे मिलती हो, कहाँ जाती हो, वगैरह वगैरह... यहाँ तक कि फोन भी हैक हो चुकी है घर की और तुम क्या बात करती हो वो भी मालूम चल रही है..."

रूपा झड़ने के बाद शिथिल रूप में आँखें बंद की भाभी की बात बस सुने जा रही थी... डिम्पल भाभी,"और तुम अभी तक उनकी नजर में उतनी आगे नहीं बढ़ी हो कि उनका कुछ बिगड़ सके, इसलिए अभी तक सेफ हो... जिस दिन आगे बढ़ गई उस दिन तुम कितनी भी कोशिश करोगी बच नहीं सकती... यहाँ तो कईयों ने उन लोगों को पकड़वाने की कोशिश की पर अगले ही दिन उनके हाथ में उनकी ही बीवी बेटी की क्लिप चली जाती हैं तो क्या कर सकता है फिर वो..."

रूपा अब कुछ नॉर्मल हुई तो आँख खोल ली...भाभी रूपा की ओर देख आगे बोली,"ऐसी बात नहीं है कि वे हर किसी के साथ ऐसा करते हैं... जो उन्हें अपनी आँख दिखाते हैं, सिर्फ वही सब उनका शिकार होते हैं...जो मतलब नहीं रखते वे हमेशा सेफ रहते हैं..."

रूपा सारी बात समझ निश्चिंत होने जैसी मुद्रा में धीमी गति से आँख मूंद खोलती बोली,"पर भाभी वो लोग कौन हैं... ये सब गलत क्यों कर रहे हैं?"

डिम्पल भाभी,"सब बता दूंगी पर पहले प्रॉमिश कर कि तू आज से इन सब से मतलब नहीं रखेगी... मैं अपनी अच्छी दोस्त को ऐसे नहीं देखना चाहती..."

रूपा भाभी की बात सुन अपने दोनों को जोर से भींच कुछ सोची और हल्की सी मुस्कान लाती बोली,"प्रॉमिश भाभी, पर आप हमें सब बताओगी...कुछ नहीं छिपाओगी..."

डिम्पल भाभी खुशी से भर गई और रूपा की एक चुची पकड़ जोर से दबाती बोली,"एकदम सारी बात बता दूँगी... कहोगी तो मैं अपनी सब क्लिप भी दिखा दूँगी... बस ये बात हम दोनों के बीच रहनी चाहिए..."

रूपा की दिमाग घनघना सी गई क्लिप की बात सुन... वो हंसती हुई बोली,"ओके..."

डिम्पल भाभी,"यहाँ तक कि कनक को भी नहीं...समझी..." रूपा तुरंत हामी भर दी... रूपा अब तक जान ही चुकी थी कि भाभी जानती हैं कि मैं कनक के साथ ही ये सब कर रही थी... तो उसने कोई सवाल नहीं की...

डिम्पल भाभी अगले ही पल रूपा से हटी और तुरंत ही अपनी बूर रूपा के मुंह के समीप लाती बोली,"अच्छा पहले मेरी बन्नो की सेवा कर फिर..." रूपा भाभी की बन्नो को देख मुस्कुरा दी जो लार टपका रही थी...

डिम्पल भाभी 6-9 पोज में आ चुकी थी... रूपा भाभी की कमर पकड़ ली और तब तक डिम्पल अपनी कमर नीचे कर अपनी बूर रूपा के होंठ से सटा दी...बूर की मीठी व भीनी सुगंध पाते ही रूपा कामुक हो गई और बूर को लपक सी ली...

डिम्पल भाभी की बूर पर हमले होते ही भाभी आहह भर गई और सिसकती हुई रूपा की दोनों जांघे फैला अपनी होंठ रूपा की नई नवेली बन्नों पर चिपका दी... भाभी की खेली खाई होंठ से रूपा तड़प सी गई और भाभी की कमर कस भाभी की बूर को लगभग काट सी ली...

दोनों की बूर एक दूसरी की मुँह को रस से भिंगोने लगी थी... रूपा जहाँ अंदर तक जीभ आसानी से घुसा स्वाद ले रही थी वहीं डिम्पल भाभी रूपा की बूर खोलने की कोशिश में ही लगी थी... मजबूरन वो बस जितनी संभव होती उतनी ही जीभ से कुरेदती...

करीब दस मिनट तक ये चलता रहा और इस बार रूपा भी थोड़ी रूक गई झड़ने में... डिम्पल भाभी जब चरम सीमा पर पहुंच रही थी तो भाभी कामुकतावश अपने होंठ रूपा की बूर से हटा अपनी एक अंगुली दांत पीसती बूर में ठेल दी...

रूपा के लिए इतनी ही काफी थी...वो भाभी की बूर लगभग काट ही ली...जिसे डिम्पल बर्दाश्त नहीं कर सकी और ढ़ेर सारी पानी बहा दी... रूपा आँख मुंह बंद कर ली और बूर की रस अपने चेहरे पर बरसने दी... रूपा की बूर भी डिम्पल के चेहरे को नहला दी...

झड़ने के बाद डिम्पल बेड पर लुढ़क गई... दोनों हाँफ रही थी... कुछ ही देर में नॉर्मल हो गई तो डिम्पल आँख खोल सर उठा देखी तो रूपा की आँखें अभी भी बंद थी और चेहरे पर असीम सुख...

डिम्पल भाभी के गाल के समीप रूपा की चिकनी जांघे अपनी चमक बिखेड़ रही थी .. डिम्पल भाभी अपने होंठ गोल करती उस पर चुंबन जड़ दी... रूपा इन चुंबन से सिहर कर मुस्कुरा कर शर्मा गई और अपने हाथ अपनी आँखों पर रख ली...

डिम्पल भाभी हल्की उठती हुई जांघों को सहलाती नीचे की तरफ बढ़ी और रूपा के एक पैर उठा अंगूठे को मुंह में भर ली... फिर अंगूठे को चूसती हुई बाहर की और रूपा की गोरी पांवो पर किस की झड़ी लगा दी... रूपा गुदगुदी और रोमांच से भर गई...

जब रूपा से बर्दाश्त नहीं हुई तो आखिर बोल ही पड़ी,"प्लीज भाभीईईईस्स्स...छोड़ दो..." डिम्पल भाभी बैठती हुई बोली,"मजा आया..." रूपा बेचारी क्या कहती... दो दो बार झड़ चुकी और भाभी अब पूछ रही है...

डिम्पल भाभी पुनः किस की और पूछी,"बोल ना...मजा आया या फिर और कुछ करूँ..." रूपा हंसती हुई बोली,"बहुत...अब छोड़ दो ना... दो बार तो हार गई आपसे..."

डिम्पल,"हम्म्म..." डिम्पल भाभी हंसती हुई हामी भरी और अपने पैर सीधी करती सीधी रूपा के होठों पर रख अंगूठे से सहलाती बोली,"तो एक बार मुझे भी हराने की कोशिश तो कर..."

रूपा भाभी के पैर के स्पर्श होंठों पर पा आँख खोली और चूमती हुई बोली,"अगली बार जरूर हरा दूंगी...आज नहीं हो सकती..." और रूपा बेड के सहारे उठ गई... डिम्पल भाभी हंसती हुई रूपा को उठने दी... रूपा उठते ही बाथरूम में घुस गई... पीछे पीछे डिम्पल भी...

दोनों फ्रेश हुई और वापस बेडरूम में आ कपड़े पहनने लगी...साथ ही रूपा बोली,"भाभी, अब बताओ अपने उन लोगों के बारे में..." डिम्पल भाभी रूपा की तरफ देख मुस्काती हुई बोली...

डिम्पल,"इतनी भी क्या जल्दी है... पहले मैं जान तो लूँ कि मेरी रूपा सच में इन सब से अलग हुई या फिर..."

रूपा भाभी की बात सुनते ही नाराजगी सी होती बोली,"क्या भाभी, आपको भरोसा नहीं है मुझ पर..." डिम्पल हंसती हुई बोली,"भरोसा है तभी तो ये सब बताई हूँ... बस भरोसे को मत तोड़ना..."

रूपा,"हम्म्म...अब बता भी दो..."

डिम्पल,"ठीक है...तो आज दो बजे बाहर कैम्पस में रहना...आज वो आर.जे. हैं ना वो तो जानते ही हो तुम..."

रूपा उत्सुकुता भरी नजरों से डिम्पल के होंठों पर नजर टिका दी जो खुलते बंद होते हर शब्द कह रही थी... भाभी के जवाब में रूपा बस "हाँ..." कह सकी...

डिम्पल,"उन्होंने दो बजे आने बोले हैं...कोई बाहर के क्लाइंट हैं... देख लेना किसके साथ जाउंगी..." कहती हुई डिम्पल अपनी एक आँख दबा दी और हंस पड़ी...

रूपा की तो आँखें फटी रह गई... एक बार तो उस पर बिजली गिरने सी महसूस हो रही थी... मन ही मन सोच रही थी कि कैसी है तू...जिस बात से तू परेशान थी उसी बात से भाभी कितनी खुश है...रूपा खुद ठगी सी महसूस कर रही थी...

खैर बिना कुछ बोले रूपा बस मुस्कुरा दी... दोनों अपने कपड़े पहन लिए थे... रूपा कुछ नॉर्मल सी होती बोली,"हम्म्म्म, कितने देर में फ्री होगी वहाँ..."

डिम्पल भाभी तब तक आइने के समीप जा बालों को संवारते बोली,"अधिकतम दो घंटे... मैं इससे ज्यादा समय नहीं देती... घर भी वापस आनी होती है ना..."

रूपा,"हम्म्म्म, फिर तो दो चार राउंड हो ही जाएंगे इतने समय में..." बात कहती हुई रूपा आगे बढ़ भाभी को पीछे से कमर पकड़ हंस दी... जबकि रूपा की बात सुन डिम्पल नाक भौं सिकुड़ाती बोली...

डिम्पल,"इतना आसान नहीं...एक ही बार में इतना निचोड़ लेती कि दुबारा उसमें ताकत ही नहीं बचती कि करने की सोचेगा भी..."

रूपा अब पूरी तरह चुगलबंदी पर उतरती हुई बोल पड़ी,"तब तो आपके लिए कम से कम दो आदमी होने चाहिए, फिर आपकी अक्ल ठिकाने लगेंगे...आर.जे. बात करवाइए उनको बोलती हूँ दो को भेजे..."

डिम्पल रूपा की ऐसी बात सुन चौंकती सी पीछे पलट के देखी तो रूपा झट से हंसती हुई उनके होंठों पर किस जमा दी... फिर डिम्पल मुस्काती हुई बोली,"बड़ी जल्दी जल्दी आगे बढ़ रही है इन बातों में...क्या बात है.."

रूपा,"बात क्या रहेगी भाभी?आपकी ननद हूँ तो कुछ असर पड़ेगी ही..." इतनी बात सुनते ही डिम्पल चट से पीछे पलटी और रूपा की कान पकड़ के उमेठती हुई बोली,"शैतान कहीं की.. इन्हीं सब के लिए मैं तब से इतनी बोली कि तुम भी मेरी तरह बन जाओ..."

रूपा दर्द से बिलबिलाती हुई थोड़ी मुस्कान के साथ बोली,"नहींईईई भाभी...मैं तो बस बातों की असर कह रही थी...और कुछ नहीं..." डिम्पल रूपा की बात सुन कान छोड़ बोली,"चल ठीक है फिर...भरोसा की हूँ तो याद रखना अभी से सोचना भी नहीं है... जो भी जानने की इच्छा हुई तो मुझसे पूछ लेना...और ये सब बातें बस हम दोनों के बीच..."

रूपा डिम्पल भाभी की बात सुन टपक पड़ी,"याद है भाभी...अभी से इस पर कोई बात नहीं...और ना कोई जासूसी...अब खुश..." डिम्पल भाभी बस मुस्कुरा दी... वापस आइने में देख होठों पर लिपलॉज लगाने लगी...

लिपलॉज लगाने के बाद बोली,"पता है आर.जे. आज ऑलरेडी दो क्लाइंट बुक किए हुए हैं..." ये सुनते ही रूपा की लगभग चीख सी निकल गई...

रूपा,"व्हॉट...भाभी... तो सच में आप दो दो से एक साथ...ओह गॉड..." डिम्पल बिल्कुल सामान्य सी मुस्कान देती हुई हां में सर हिला दी... रूपा बड़ी बड़ी आँखें करती देख रही थी...

डिम्पल अब तक हल्की मेकअप कर चुकी...वो अक्सर ऐसी ही रहती थी... वो वापस आ रूपा को ऐसीअपनी तरफ अब तक देखती पा आश्चर्य से बोली,"क्या हुआ.."

रूपा डिम्पल भाभी की बात सुन चौंक गई...वो पता नहीं क्या क्या सीन दिमाग में पैदा कर रही थी... वो अचानक होश में आई और डिम्पल भाभी को सामने देख दांत पीसती हुई हाथ बढ़ा चुचियाँ पकड़ चुटकी से रगड़ती हुई बोली,"शाली, बिल्कुल रंडी हो गई..."

डिम्पल भाभी दर्द से कुलबुला गई पर उन्हें रूपा की ये बात और हैरान कर गई... वो सोच में पड़ गई कि रूपा के मुह से ऐसे शब्द आज तक नहीं सुनी थी... पर आज...

डिम्पल भी पीछे नहीं हटी और दबोचती हुई रूपा की दोनों चुची पर कब्जा जमाती हुई रगड़ती हुई बोली,"रंडी की भाषा सुनने की इच्छा हो रही है तो बोल ना...सुनाती हूँ...और कहो तो इन दोनों को रंडी वाली हालत बना दूँ..."

रूपा अब छूटने की कोशिश करती हुंकारती हुई हंसी जा रही थी पर भाभी की हाथ मानों किसी चुंबक की तरह चुची पर धाक जमा चुकी थी... रूपा किसी तरह बोली,"भाभी प्लीईईईईज...कपड़े खराब हो जाएंगे..."

और तभी दोनों धम्म से बेड पर हंसती हुई...रूपा नीचे,डिम्पल ऊपर... रूपा के दोनों हाथ डिम्पल के हाथ परऔर डिम्पल की हाथ अपनी जगह यानी रूपा की गोल मटोल चुची पर...

डिम्पल,"रंडी की चुची के पास कपड़े हमेशा खराब ही रहते है और बूर की जगह मैली...तेरी भी हो जाएगी तो क्या आफत आ जाएगी..."कहती हुई डिम्पल हंस पड़ी...

रूपा,"मैं रंडी थोड़े ही हूँ...आईईईईईईई भाभीईईई...दर्द कर रही...उफ्फ्फ्फ्फ..."

डिम्पल,"मेरी रंडी तो है ना..."कहती हुई डिम्पल कपड़ों के ऊपर से एक चुची छोड़ उस पर दांत गड़ा काटने लग गई... रूपा किकियाती हुई सर पटकती हुई बोली...

रूपा,"आआआहहहहहईईई भाभी...हाँ हूँ...आपकी हूँ...अब छोड़ो...दर्द हो रही आउच्चचचचचच...."

डिम्पल,"क्या हो...पूरी और शुद्ध शुद्ध बोलो...तब छोड़ूंगी..." अब रूपा और सहन करने की हालत में नहीं थी...उसकी आँखें हल्की आँसू से भर आई थी... वो जल्द से जल्द छूटने में लगी थी...

रूपा,"हाँ...मैं आपकी रंडी हूँ...प्लीज..."

ये सुनते ही डिम्पल भाभी हंसती हुई चुतियाँ को आजाद कर दी अपने कब्जे से... रूपा एक लम्बी राहत की साँस ली और हाँफती हुई चुचियाँ खुद सहला दर्द मिटाने की कोशिश करने लगी...

फिर रूपा उठी और बोली,"भाभी, अब तो रोज कहूँगी... "

डिम्पल,"नो प्रॉब्लम, वैसे मैं भी कह सकती अब...तुम कबूल भी की हो अभी..."

रूपा,"हाँ, जबरदस्ती से कहलवाए हैं..."

डिम्पल,"जैसे भी हो कबूल तो की ना..."

दोनों की हंसी मंद मंद बाहर आ रही थी... रूपा कपड़े ठीक की और बाहर निकलते हुई बोली,"दो बजे...इंतजार करूँगी मेरी रंडी भाभी..."

डिम्पल,"ऑफकोर्स करना मेरी प्यारी रंडी...बस बेहोश मत होना..." फिर रूपा हंसती हुई निकल गई... पीछे डिम्पल भी हंस पड़ी....

तमाचा उधर आर.जे. का नम्बर डायल करने लगा... फोन लगते ही तमाचा नमस्कार कर निवेदन पूर्वक बातचीत करना शुरू किया... पर आर.जे. इतना बुद्धू तो था नहीं... आर.जे. नमस्कार का जवाब दे पूछा,"जी आप कौन..."

तमाचा,"जी मैं...मैं... वो यहीं का हूँ... दरअसल मुझे आपसे कुछ काम था..."

आर.जे.,"जी कहिए, कैसा विवाद है...?"

तमाचा,"विवाद....आपका मतलब झगड़ा... नहीं नहीं... मेरा किसी से झगड़ा नहीं हुआ है..."

आर.जे. थोड़ा रूका फिर आश्चर्य लब्जों से बोला,"तो जमीन-वमीन का मामला है क्या भाइयों में..."

तमाचा अफसोस सा हो बोला,"अरे नहीं सर, मैं अपने बाप एकलौता हूँ तो कैसे हो सकता है... दरअसल मुझे कुछ और काम था..."

आर.जे. ये सुनते ही सख्त लब्जों में बोला,"तो आप बेवजह वकील को क्यों परेशान कर रहे हैं जब कोई लफड़ा ही नहीं हुआ..."

तमाता वकील सुनते ही सन्न रह गया... शाला पेशे से वकील है... तमाचा आर.जे. के तीखे शब्द सुन गुस्सा से भर गया... वो अपने ऊपर कोई गुस्सा करे वो हद से बढ़ने नहीं देता था पर आज सुनने के बाद भी खून का घूंट पी कर रह गया...

तमाचा लंबी सांस छोड़ा और आँख मींचते हुए बोला,"मेरा काम ये है सर कि मुझे ना..."

आर.जे.,"क्या मुझे मुझे लगा रखे हैं...जल्दी बोलिए... मुझे कोर्ट में क्लाइंट इंतजार कर रहे हैं..."

तमाचा,"मुझे एक लड़की चाहिए आज..." तमाचा बोलते के साथ ही चुप हो गया और आर.जे. के जवाब का इंतजार करने लगा...

आर.जे.,"क्या....?"

तमाचा,"जी...मुझे लड़की चाहिए वो भी एकदम मस्त आइटम... पैसे चाहे जितना..."

तमाचा अपनी बात पूरी कर भी नहीं पाया कि आर.जे. बोला,"बदतमीज मुंह संभाल के बात कर...क्या समझ रखा है मुझे..."

तमाचा गाली सुन थोड़ा सकपका सा गया... एक ख्याल उसके जेहन में अब आया कि क्या ये सच आर.जे. है कि कोई और... वो थोड़ा रूकता हुआ बोला,"जी आप आर.जे. ही बोल रहे हैं ना..."

आर.जे.,"कौन आर.जे., काहे का आर.जे.... मैं वकील मो. रियाज खान बोल रहा हूँ...समझे... अब भी समझ में नहीं आया तो कोर्ट आजा और मिल ले... पता नहीं कितने बदतमीज लोग हो..."

और खट की आवाज तमाचे की कान में गूंज पड़ी...फोन कट चुकी थी... तमाचा के तन बदन में करंट लग गई थी... वो एकटक फोन को निहारे जा रहा था... उसका शरीर तो गुस्से से तमतमाने लगा...

उसने अपनी बाइक निकाली और घनघनाते हुए सड़क पर रेस लगा दिया...अब वो कहाँ जा रहा था ये उसे खुद भी मालूम नहीं..

उधर रूपा बार बार घड़ी देख रही थी... वो अपने रूम में थी पर मन डिम्पल भाभी पर टिकी थी... वो बेचैन सी हो बाहर निकली और बाहर बरामदे तक आ गई...वहीं कुर्सी पर बैठ डिम्पल भाभी का इंतजार करने लगी...

तभी अचानक से उनके कानों में जोर से कू की आवाज पड़ी... जिससे रूपा उछल पड़ी और पीछे मुड़ कर देखी कि कौन है... सामने कनक जोर से हँसी जा रही थी...

कनक हँसती हुई बोली,"क्यो महारानी, रोहन साहब की याद में इतनी डूब गई मैं आ के कब से बगल में खड़ी हूँ, मालूम है कुछ?"

रूपा लजाती मुस्काती नजरें झेंपी और आहें भर खुद को नॉर्मल करती हुई बोली,"ऐसी कोई बात नहीं है कनक... बैठो... अचानक से कैसे आ गई..."

कनक बैठती हुई बोली,"मत बता... मैं पापा के लिए लंच ले गई थी... आज सुबह सुबह मम्मी पापा में जबरदस्त फाइट हुई थी और पापा बिना खाए ऑफिस चले गए थे..."

कनक की बात सुन रूपा हँसती हुई बोली,"फाइट ...क्यों?"

कनक,"अरे बात कुछ नहीं थी... ये सब चलती रहती है...शाम में फिर सब ठीक ठाक ही रहेगी... अच्छा छोड़ उन बातों को... ये बता कुछ मालूम पड़ी कि वो क्लिप किसकी थी..."

रूपा,"नहीं यार... और तमाचा से बात हुई क्या?" रूपा मायूसी सी बोली...

कनक,"नहीं पर वो आज आर.जे. से बात जरूर करेगा और सारी बात हमें जरूर बताएगा... क्योंकि कुत्ते के पेट में कोई बात पचती नहीं है..."

रूपा हल्की मुस्कान बिखेरती हुई बोली,"हम्म्म्म..." रूपा हामी भरती हुई बोली... तभी रूपा की नजर सामने आ रही डिम्पल भाभी पर पड़ी... रूपा की नजर तुरंत गेट की तरफ गई पर वहाँ कोई नहीं था... वो फिर से डिम्पल भाभी की तरफ देखने लगी...

कनक की नजर भी रूपा की नजरों की दिशा में घूम गई और सामने डिम्पल को देख कनक जोर से बोले,"नमस्ते भाभी जी..." तेज स्वर से रूपा की तंद्रा भंग हुई और अचकचा सी गई...

डिम्पल भाभी तब तक पास पहुँच चुकी थी और नमस्ते करती बोली,"क्या बात है कनक... आज अचानक ऐसे..."

कनक,"हाँ भाभी बस मिलने की इच्छा हुई तो बस चली आई..."

"बिल्कुल सही... "डिम्पल भाभी कहती हुई रूपा की तरफ देखी तो रूपा अभी भी गेट की ओर ही नजर टिकाए थी कि भाभी बोली कोई आएगा पर अभी तक वो आया क्यों नहीं है...

डिम्पल रूपा की हालत समझ मुस्कुराती हुई बोली,"क्या हुआ रूपा? किसी का इंतजार कर रही हो..." रूपा भाभी की बात सुनते ही सकपकाती नजरें भाभी की तरफ कर ली...

और कनक भला ऐसे में चूकती कैसे..? कनक खिलखिला के बोल पड़ी,"हाँ रूपा, तुम तो कह रही थी कि दो बजे तक आएगा तो मिलवा दूँगी...अब अगले दिन दो बजे आएगा क्या..?"

रूपा मुश्किल में फंस लड़खड़ाती मुस्कुराती शब्दों से बोली,"कनक ,तू बाज नहीं आएगी शैतानी से क्या? भाभी , मैं तो बस ये सोच रही थी कि आप इस वक्त कहाँ जा सकती हो.."

रूपा के ऐसे सवाल सुनते ही डिन्पल भाभी चौक सी गई... वो उम्मीद नहीं की थी क्योंकि सुबह ही तो बताई थी कि कहाँ जाने वाली है और अब फिर पूछ रही है वो भी कनक के सामने...

डिम्पल भाभी थोड़ी हिचकिचाई और बोली,"अच्छा तो उल्टी वार मुझ पर ही...हें... शीला है ना वो...."

डिम्पल इतनी ही बात बोली थी कि रूपा बीच में रोकती बड़बड़ाने लगी,"समझ गई...समझ गई... वो शीला जिन्हें अगर एक सुई भी लेनी हो तो दस दुकान पर जरूर ट्राई करती हैं और जब आप उनके साथ शॉपिंग जा रही हैं तो अभी भी काफी देर हो चुकी है... प्लीज भाभी... जल्दी जाइए...नहीं तो...."

रूपा बात खत्म करते ही जोर से हँस पड़ी साथ में कनक और डिम्पल भी हँसे बिना ना रह सकी... डिम्पल भाभी हंसी रोकती बोली,"ठीक है रूपा, मैं निकलती हूँ... कनक तुम अभी रूकेगी ना..."

कनक,"नहीं भाभी, मम्मी जल्दी आने बोली थी और मैं यहाँ आकर बैठ गई हूँ... मैं भी निकल जाऊँगी..."

डिम्पल,"ओके...अगर चलेगी तो चलो कुछ देर तक साथ तो रहेंगे..." डिम्पल भाभी की बात सुन कनक उठी और रूपा की तरफ देख बोल पड़ी,"बाय रूपा,शाम में कॉल करती हूँ..."

रूपा डिम्पल भाभी को यूँ अकेली जाती देख मायूस सी हो गई थी... मन ही मन गाली भी दे रही थी कि वापस आओ पहले, फिर आपकी खबर लेती हूँ... रूपा एक बार फिर गेट की तरफ नजर करती मायूसी से कनक को बॉय बोली...

डिम्पल भाभी और कनक दोनों चल दी गेट की तरफ... रूपा कुर्सी से उठ देखी जा रही थी... अचानक से रूपा को एक जोर की बिजली चमक गई...

डिम्पल भाभी गेट से बाहर निकलने से पहले वापस रूपा की तरफ मुड़ी और कनक की तरफ इशारा करती अपनी एक आँख दबा दी... रूपा की तो होश उड़ गई... वो वापस धम्म से कुर्सी पर जा गिरी...

रूपा यकीन नहीं कर पा रही थी कनक भी इनमें शामिल है और वो उसके साथ नाटक कर रही थी अभी तक... रूपा सब समझ चुकी थी आखिर डिम्पल भाभी को सारी बातें मालूम कैसे पड़ती थी...

और सीमा भाभी भी एक ही झटके में चारों खाने चित्त क्यों हो गई थी... रूपा ये सब सोचते सोचते शून्य में चली गई थी... वो बिना हिले डुले अब तक गेट की तरफ ही निहारे जा रही थी...

उधर तमाचा अपनी बाइक से लहराता बस बढ़ा जा रहा था... उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था... अगर मामला सीधे उससे होता तो कब तक निपटा चुका होता पर वो बेबस था...

अचानक उसकी बाइक की ब्रेक खुद ब खुद लग गई... बाइक रूकते ही तमाचा आश्चर्य से बाइक को निहारता हुआ बोला,"शाला, बिना लगाए ब्रेक कैसे लग गया..." फिर वो आसपास देखा तो वो फिर चौंक गया... वो ठीक कोर्ट परिसर के बाहर था...

तमाचा,"शाला जब ऊपर वाला यही चाहता है तो यही सही..." और उसने बाइक कोर्ट परिसर में दाखिल कर दिया... उसने बाइक पार्क की और कोर्ट की तरफ चल दिया...

तमाचा वहीं एक फाइल की बंडल ले जा रहे वकील के पाल पहुंचा और पूछा,"सर, यहाँ कोई मो0 रियाज खान वकील हैं.."

उस वकील ने बिना रूके तमाचे की ओर देखा और पूछा,"कैसा केस है..? मैं बड़े से बड़े केस हैंडल कर ...."

तमाचा उसकी वकीली भाषा सुनते ही उसे बीच में रोकते हुए बोला,"नहीं नहीं सर, दरअसल पापा उनसे एक फाइल लेने भेजे हैं और मैं उन्हें पहचानता ही नहीं हूँ इसलिए..."

उस वकील ने यमाचे की बात सुनते ही आँख गुरेरते हुए बोला,"मेन गेट के ठीक सामने दाएँ उसका ऑफिस है..." और वो तेजी से खुद से बड़बड़ाता तमाचे से दूर निकल गया...

तमाचा वहीं से पलटी मारी और धड़धड़ाता रियाज खान के ऑफिस जा पहुँचा... वहाँ मौजूद चपरासी से पूछा तो वो बोला,"सर अभी अभी किसी क्लाइंट से मिलने गए हैं...एक घंटे बाद आकर मिल लेना..."

तमाचा हैरान सा बोला,"पर अभी तो यहीं आने बोले थे फोन पर..."

इतना सुनते ही चपरासी खींझता बोला,"क्या सर, जब बोल रहा हूँ अभी अभी निकले हैं और कुछ देर पहले तक यहीं थे तो समझते क्यों नहीं...जाइए अब, मुझे काफी काम है..."

तमाचा उसकी बात समझ बाहर की तरफ निकलने लगा पर उसके अंदर अजीब सी खलबली मची थी...अंदर की शक्ति उसे बार बार मिलने के लिए आतुर हो रही थी...

तमाचा पुन: रूका और पूछा,"वे किधर निकले हैं...मैं उधर ही मिल लूँगा..."

चपरासी ये सुन गुस्से से बड़बड़ाता बाहर आया और बोला,"उधर गए हैं और उनका गाड़ी नम्बर #### है..जाओ मिल लेना..."

तमाचा बिना कुछ जवाब दिए तेजी से निकला और अपना बाइक निकाल उस दिशा में दौड़ा दिया... वो आगे जा रही हरेक गाड़ी की नम्बर प्लेट देखे जा रहा था...

कुछ ही देर में वो गाड़ी तमाचे को नजर आ गई... वो अपनी गति बढ़ा गाड़ी की ओर तेजी से बढ़ने लगा... कुछ ही देर में तमाचा कुछ फासले दूर ही था कि उसके अंदर मुस्कान तैर गई...

गाड़ी में तमाचे को दो लड़की नजर आई... तमाचा कुटील मुस्कान बिखेरता खुद से बोला,"चल बेटा वकील, तू सिर्फ वकील ही है या लड़कियों के दलाल भी..."

अब वो थोड़ा और पीछे हो लिया और इतनी दूरी पर था कि उसे बस गाड़ी सामने रहे हर वक्त...

कोई दस मिनट बाद शहर के छोर पर स्थित एक 5-स्टार होटल M के परिसर में घुस गई... होटल की पार्किंग काफी बड़ी थी... तमाचा भी अपनी बाइक अंदर कर लिया और झटपट पार्क कर साइड हो उस गाड़ी को पार्क होता देखने लगा...

गाड़ी रूकते ही वकील उतरा और साथ में दोनों लड़की भी... दूरी ज्यादा थी तो वो किसी को पहचान नहीं पा रहा था... तभी वो तीनों होटल के मेन गेट की तरफ बढ़ गए...

तमाचा भी मेन गेट के पास ही था... उसके दिमाग में तुरंत ये आइडिया आया कि क्यों ना पहले तीनों को पहचान लें... फिर बाद में लड़की से ही पूछ लेंगे कि वो आर.जे. ही है या कौन है?

वो उन तीनों का वेट करने लगा... वे जितने नजदीक आते तमाचे के चेहरे की रंग भी उसी अनुपात में उड़ने लग गई... और कुछ ही पल में तमाचा घुटने के बल सर पर हाथ रख नीचे बैठ गया...

तमाचा की बत्ती गुल हो गई थी... कनक इस आर.जे. के साथ ही धंधा करती है और मुझे उल्लू बना रही थी कि ये गलत है...वो गलत है... तमाचा वहीं पड़े पड़े ना जाने कितनी गालियाँ बोल डाला...

"ओ हैल्लो, यहाँ क्या कर रहे हो... ये बैठने की जगह है क्या..?" एक तेज आवाज तमाचे के कान में पड़ी तो वो आवाज की तरफ मुड़ा...सामने सिक्योरिटी उसे ही कह रहा था...

तमाचा झट से उठा और बोला,"नहीं, फीता बाँध रहा था... " और वो मेन गेट की ओर नजर किए बाइक की तरफ बढ़ने लगा... होटल के अंदर क्या है ये बाहर से कैसे मालूम पड़ती... और वो ऐसे अंदर जाना नहीं चाहता था... कहीं गलती से भी कनक की नजर...

वो बाइक निकाला और होटल के ठीक सामने एक कॉफी हाउस में जा बैठा... उसकी नजर होटल के गेट पर ही थी...तमाचा कुछ सोच नहीं पा रहा था कि क्या करे... कभी कभी तो वो सोचता कि जो होगा देखा जाएगा...जाते हैं कनक के सामने ही...

कुछ ही देर में वो वकील तमाचा को नजर आया... वो चौंकता हुआ उठ के देखने लगा... उसके साथ दो और लोग थे जो उससे बात कर रहा था... तमाचा समझ गया कि यही दोनों उन दोनों की बजाएगा...

और फिर वकील उन दोनों से विदा ले निकल गया और वो दोनों वापस होटल में... तमाचा परेशान जरूर था पर होटल के अंदर होने वाले दृश्य को याद कर उत्तेजित भी हो गया... वकील अपनी कार से वापस चला गया...

तमाचा अचानक से फोन निकाला और रूपा के नम्बर पर फोन करने लगा... कई रिंग हो चुकी पर रूपा फोन रिसीव नहीं कर रही थी... कैसे रिसीव होती रूपा भी तो जख्मी ही थी तो फोन बज रही है या नहीं उसे क्या पता?

आखिर फोन रिसीव हुई और रूपा की हैलो तमाचे के कान में पड़ी... तमाचा तेजी से बोला,"रूपा, कॉफी पिएगी..?"

रूपा मायूस बुझी सी आवाजों में बोली,"सॉरी यार, मेरी मूड ठीक नहीं है...बाद में बात करना..."

तमाचा,"ऐ रूपा, मेरी बात तो सुनो... कुछ जरूरी काम है इसलिए बुला रहा हूँ..."

रूपा जरूरी काम सुन कुछ सोचने सी लग गई...रूपा के दिमाग में ढ़ेरो सवाल जवाब उभरने लगे... कहीं तमाचा भी कनक की तरह ही मुझसे छिपा रहा है और मौका मिलते ही कोई फायदा ना उठा ले...

रूपा की चुप्पा पर तमाचा हैरान सा बोला,"प्लीज रूपा, मैं सीरीयस कह रहा हूँ... अभी मैं जो कुछ देखा हूँ वो मैं सोच भी नहीं सकता..."

रूपा तमाचे की बात सुन थोड़ी सोच में पड़ गई...क्या देख सकता है..? कहीं भाभी और कनक पुलिस के... नहीं ...नहीं... तो फिर... रूपा सोची जा रही थी...भाभी कह रही थी कि वे सब तो पुलिस को यूँ रखते हैं जेब में...

अचानक रूपा सर को झटकी और साँस लेती हुई बोली,"देखो, तुम क्या देखे,नहीं देखे...उससे मुझे कोई मतलब नहीं है और ना मतलब रखना चाहती... अब फोन रखो और अपना टेंशन खुद सुलझाओ...गुड बॉय..."

फोन रूपा काटने के लिए हटा भी नहीं सकी कि तमाचा बोल पड़ा,"रूपा, वो सब तुम्हें ब्लैकमेल करना चाहते हैं...प्लीज मेरी बात समझो..."

रूपा तमाचे की बात सुन थम सी गई... उसे अपने कानों पर यकीं नहीं हो रही थी... रूपा कुछ बोल नहीं पा रही थी... तमाचा रूपा की इस चुप्पी पर अफसोस सा बोला,"रूपा..."

पर रूपा कोई जवाब दिए बिना फोन काट दी... तमाचा आँख मींचता सा टेबल पर जोर से हाथ दे मारा... वहाँ मौजूद सब उसे ही देखने लगे... तमाचा स्थिति को देख तुरंत सॉरी बोल वहाँ से निकल गया...

रूपा फोन रखते ही फूट फूट कर रोने लगी... ये सब क्या हो रहा है...? वो सोच सोच के पागल सी हुई जा रही थी... जितनी देर हो सकी रोती रही फिर वो अपने कमरे में घुस तकिए में मुंह छिपा सुबकती हुई सो गई...

तमाचा वहाँ से निकल सीधा एक पार्क में जा पहुँचा... एकांत जगह देख वो लेट गया और सारा वाक्या याद करने लगा... तमाचा आगे की वाक्या पर जब नजर डाला तो सिहर सा गया... रूपा जैसी लड़की के साथ अगर ये घिनौना खेल खेलने में ये सब सफल हो गए तो भारी गड़बड़ हो जाएगी...

रूपा काफी देर तक यूँ ही बैठी रही... फिर वो उठी और अपने में जा लेट गई...सो तो नहीं पाई पर जग भी नहीं रही थी...

"रूपाऽ...कितना सोएगी ये लड़की...." मम्मी बडबड़ाती हुई आई...रूपा ने सर घुमा कर मम्मी पर नजर डाली... मम्मी के पीछे कोई और भी थी जिसे रूपा देख नहीं पा रही थी...

रूपा अचरज सी उठती हुई बोली,"नहीं मम्मी, बस लेट रही थी... और तुम्हारे पीछे कौन है जो छुप रही है..."

मम्मी हँसती हुई बोली,"तुमसे मतलब कौन है... तू चुपचाप सोती रह ना... "

रूपा बेड से उठती हुई मम्मी को पकड़ साइड की तो उसकी आँखे खुली रह गई और होंठों को होल करती हुई बोली,"वॉव....सुनैना तुम.... थैंक्स यार..."

रूपा सुनेना की कलाई पकड़ खींचती सी बेड पर बिठा दी और बोलती गई,"कैसी है तू...कब आई... आई तो मुझे क्यों नहीं बुलाई ...मैं आ जाती स्टेशन रिसीव करने... " रूपा नॉनस्टॉप ना जाने बोलती रही और सुनती कुछ नहीं...

सुनैना जोर से हँसती हुई बोली,"स्टॉप रूपा, साँस तो ले लो फिर सब बातें बता रही हूँ...ही...ही..ही.."

"हाँ हाँ...बेचारी इतनी दूर से आई हैं तो बातों से ही पेट भर दो... आते ही तुम्हें ही खोजती आई है..." मम्मी बीच में बोल पड़ी...

रूपा,"टेंशन क्यों लेती हो मॉम, आज सुनैना के साथ मैं बाहर खाने जा रही हूँ...आप बस चाय पिला दो...प्लीज.."

मम्मी,"ओके..ओके... जो तेरी मर्जी कर..." कहती हुई मम्मी बाहर निकल गई...

मम्मी के बाहर निकलते ही सुनैना बोली,"ये सोने का समय है क्या जो तुम सो रही थी..."

रूपा,"नहीं, बस यूँ ही लेटी थी...और सुना, होने वाले से मिल ली..."

सुनैना,"नो...तुम्हारे बगैर कैसे मिल सकती..."

रूपा मुस्कुराती हुई बोली,"अच्छा, फिर तो मैडम रिस्क है इसमें..."

सुनैना हैरान सी हो बोली,"कैसी रिस्क..?"

रूपा,"वो क्या है ना कि मैं थोड़ी लोभी व्यक्तिव की हूँ... अगर मुझे पसंद आ गए तो तेरी तो वाट लग जाएगी...हीहीही..."

सुनैना,"अच्छा तो मुझे उल्लू समझ रही है क्या? मैं भी तेरे वाले को उड़ा सकती हूँ...समझी क्या?"

रूपा,"नो प्रॉब्लम, उड़ा लेना... ही..ही..ही..."
सुनैना भी हंस पड़ी साथ में...

तभी मम्मी चाय लेती हुई आ गई और चाय सुनैना को देती बोली,"आपके मामा जी चीनी वाली चाय नहीं पीते हैं क्या.."

सुनैना,"नहीं मम्मी जी, वो उन्हें सुगर प्रॉब्लम है..."

मम्मी सुनैना की बात सुन हामी भर दी... तभी रूपा बोली,"ऐसा क्यूँ..."

मम्मी,"क्या मतलब? प्रॉब्लम है तो कैसे पी सकते...डॉक्टर मना किए होंगे... वैसे भी बिना चीनी वाली चाय बना रही उनके लिए..."

मम्मी बोल कर वापस चल दी तो पीछे से रूपा बोली,"मम्मी, अंकल जी को सुगर से प्रॉब्लम है तो बिना शक्कर वाली कैसे पी सकते.."

मम्मी रूपा की बात सुन पलटती हुई सवाल की,"..तुम डॉक्टर हो क्या?"

रूपा,"हाँ... आप अपने होंठों वाली सुगर मिला देंगी तो कोई प्रॉब्लम नहीं आएगी उन्हें...ही...बी...ही..."

"शैतान की नानी, रूक...बताती हूँ..."कहती हुई मम्मी रूपा की ओर थप्पड़ उठाती बढ़ी तो रूपा "सॉरी..सॉरी..मम्मी...ही..ही..."कहती हुई दूसरी तरफ भाग गई... सुनैना रूपा की बात सुन बेड पर ही लोट पोट सी हो गई....

एक दो राउण्ड चेयर टेबल के इर्द गिर्द घूमने के बाद जब रूपा पकड़ नहीं आई तो मम्मी तीखी आवाज में बोली,"कब तक भागोगी... जब पकड़ी जाएगी तो बताऊंगी..."

रूपा,"समधी साहब लगेंगे तो थोड़ी दे दी तो क्या हो जाएगा मॉम..."

"फिर बोली...रूक..."मम्मी एक बार फिर दौड़ी तो रूपा भागती सी बोली,"चाय उबल जाएगी मम्मी..."

"ओह...आती हूँ फिर पूछती हूँ.. "मम्मी रूक कर गेट से बाहर निकल सरपट किचन की तरफ निकल गई... मम्मी के बाहर जाते देख रूपा पीछे से बोली,"मम्मी, लिपस्टिक डीप रेड वाली यूज करना...ही..ही..ही..."

सुनैना की तो हँसते हँसते पेट फूल रही थी... वो कुछ कहना चाह रही थी पर हँसी रूकती तो ना कह पाती...

"ओड मैडम,चाय पी लो..ठंडी हो रही है.. मम्मी के साथ ये सब चलती रहती है..."रूपा अपनी चाय पकड़ती हुई बोली तो सुनैना भी रूक रूक चाय पीने लगी...

चाय खत्म होते ही बाथरूम फ्रेश होने "अभी आई.." कह घुस गई... सुनैना वहीं इधर उधर देखने लगी... अचानक से सुनैना को फोन की रिंग सुनाई देने लगी... जल्द ही फोन सुनैना के हाथों में थी...

सुनैना Unknown नम्बर देख रूपा को आवाज दी,"रूपा ,फोन है?"

रूपा,"किसका है.." अंदर से ही रूपा बोली... सुनैना,"पता नहीं, नया नम्बर है.." रूपा अंदर से ही बोली,"रहने दे ,आ रही हूँ..."

सुनैना रूपा के इस जवाब से चौंक सी गई और तरह तरह की शंका नाचने लगी उसके दिमाग में...वो अचानक से मुस्कुराई और फोन रिसीव कर कान में सटा ली...

"प्लीज रूपा,मेरी बात समझने की कोशिश करो...सिर्फ एक बार तुमसे मिलना चाहता हूँ... मेरी बात से तुम्हें तकलीफ जरूर हुई होगी पर जहाँ तक मेरा यकीं है कि वो यही चाहता है..."फोन रिसीव होते ही तमाचा बोलने लगा....

सुनैना की आँखे चमक उठी कि फोन गलत नहीं लगी पर ये है कौन... वो अगर कुछ बोलती तो आवाज सुन वो कहीं पूछ बैठता कि कौन हो या फिर फोन काट देता...सुनैना कुछ सोच बस "हम्म्म्म "कर रह गई...

तमाता इस आवाज से रूपा की हामी समझ खुशी से बोला,"थैंक्स रूपा...मैं बस तुम्हारी गली के बाहर कॉफी सेन्टर पर हूँ...प्लीज कम..."

सुनैना तेजी से "ओके.."बोली और फोन काट दी... सुनैना के अंदर ढ़ेरों सवाल पैदा हो रही थी... वो बस रूपा का वेट कर रही थी कि कब निकलेगी और उससे इन्क्वायरी की जाए...

कुछ ही देर में रूपा गुनगुनाती हुई बाहर निकली... सुनैना सवालिसा नजरों से एकटक बस उसे ही देखी जा रही थी... रूपा सुनैना को ऐसे देख पूछ ली,"क्या हुआ..?"

सुनैना हल्की मुस्कान लेती बोली,"कॉफी सेन्टर पर कोई इंतजार कर रहा है..."

रूपा शॉक सी हो गई और बोली,"क्या...? फोन रिसीव की थी तुम...?"

सुनैना,"करनी पड़ी... कई बार कट कर दी तो वो बार बार कर रहा था तो रिसीव की..."

रूपा सुनैना की बात सुन फोन चेक करने लगी... रूपा के चेहरे पर नम्बर देख गुस्से की रेखा साफ झलकने लगी...सुनैना रूपा को गुस्से में देख बोली,"तुम नहीं चाहती कि मैं आऊं तो मैं नहीं आऊंगी..."

रूपा सुनैना की बात सुन फोन रखती बोली,"मुझे इससे मिलने की कोई जरूरत नहीं...भांड़ में जाए..." सुनैना चौंक सी गई रूपा की बात से...

रूपा को गुस्से में देख सुनैना समझाने की कोशिश में बोली,"क्या रूपा, नाराजगी है तो एक बार मिल लो सब ठीक हो जाएगा...क्योंकि जितना परेशान था वो शायद मना ही लेगा....और प्यार में तो झगड़े होते रहते हैं..."

रूपा सुनते ही जबरदस्ती हँसी हँस बोली,"प्यार...और इससे... ही..ही...ही... शाला ये दुश्मन के भी काबिल नहीं है..."

सुनैना,"..तो फिर कौन था..."

रूपा,"कनक का फ्रेंड है...चल छोड़ इसे, जल्दी से फ्रेश हो जा... बाहर चलते हैं घूमने...आते वक्त खाना भी खा लेंगे..."

सुनैना कुछ बोलना चाह रही थी पर बोली नहीं... बोलती क्यों बाहर तो जा ही रही है... वो उठ के चुपचाप बाथरूम में फ्रेश होने घुस गई...

कुछ ही देर में दोनों स्कूटी से सड़क पर थी... तमाचा बाहर खड़ा बस बगुले की तरह नजर गड़ाए था... उसने रूपा को निकलते देखा पर रोक नहीं सका... वजह थी सुनैना... वो समझ नहीं पाया कि कौन है ये...

वो बस तेजी से बाइक तक गया और रूपा के पीछे हो लिया... कुछ ही पलों में रूपा को अहसास हो गई कि कोई ठीक उसके पीछे है...वो गुस्से से जल भुन गई...

तभी सुनैना चहकती सी बोली,"रूपा,गोलगप्पे.." रूपा नजर दौड़ाई तो उसकी भी मुस्कान निकल गई और स्कूटी गोलगप्पे वाले के ठीक समीप स्वत: रूक गई...

तड़तड़ सुनैना उतरी और गोलगप्पे वाले को बोली,"भैया झटपट से शुरू हो जाओ...रूपा जल्दी आ..."

रूपा स्कूटी खड़ी कर हँसती हुई बोली,"अरे भैया जी भाग नहीं रहे हैं जो इतनी उतावली हो रही है...क्यों भैया जी..."

बेचारा गोलगप्पे वाला क्या बोलता ,बस हाँ में मुंडी डुला दिया...और दोनों के हाथ प्लेट थमा दिया... पीछे से तमाचा भी तब तक आ पहुँचा और गोलगप्पे वाले को इशारा कर दिया कि मैं भी हूँ...

गोलगप्पे वाला मुस्कुरा पड़ा... उसके साथ तो ये नियम था कि कोई लड़की आए तो उसके पीछे दो चार तो यूँ ही आ जाते हैं...वो एक और प्लेट तमाचे को थमा दिया और लगा पानी भरने गोलगप्पे में...

तमाचा की नजर रूपा के चेहरे पर ही टिकी थी... रूपा ना चाहते भी एक दो बार तमाचे से नजर टकरा ही ली...वो बस गुस्से को पीने की कोशिश कर रही थी...पर कब तक..?

आखिर रूपा बरस ही पड़ी... रूपा भड़कती सी बोली,"ऐ मिस्टर, मैं तुमसे कोई बात नहीं करना चाहती...चुपचाप खिसक लो नहीं तो..."

रूपा की तीखी आवाज सुनते ही सब के सब अचंभित... सुनैना तुरंत समझ गई कि ये वही फोन वाला है...जबकि गोलगप्पे वाला की तो फटने सी लग गई...

तमाचा आँख मींचते हुए अपने पर काबू किया और बोला,"बस पाँच मिनट रूपा... उसके बाद मैं चला जाउंगा और आगे तेरी मर्जी..."

रूपा कुछ बोलती बीच में सुनैना बोल पड़ी,"दे दे पाँच मिनट...करना वही जो तुम्हें ठीक लगे..." रूपा सुनैना की बात सुन सोचती हुई हामी भर दी और बोली,"ओके... तुम गोलगप्पे खाओ... मैं आ रही हूँ..." सुनैना हामी भर दी...

रूपा टिमटिमाती पैर पटकती सुनैना से कुछ कदम हट खड़ी हो गई... तमाचा भी पीछे पीछे रूपा के निकट पहुँचा तो रूपा बोली,"भौंकना शुरू कर..." तमाचे की तो जल गई...

तमाचा,"शाली मुझसे प्रॉब्लम क्या है तुझे...कल तक तो ठीक थी और अचानक से क्या हो गया..?"

रूपा,"शाले मुँह संभाल के बात कर...और सिर्फ पाँच मिनट...याद रख.."

तमाचा पाँच मिनट सुन मुंह बंद कर लिया और रूपा की तरफ देख बोला,"होटल M जानती हो ?" रूपा ये प्रश्न सुन आँख तरेरनी लगी कि यहाँ कौन नहीं जानता होटल M...

तमाता आहे बोला,"जानती ही होगी...ओके... आज वहाँ मैंने कनक और तुम्हारी डिम्पल भाभी को देखा था... वो भी आर.जे. के साथ... और..."

रूपा बीच में तुनकती हुई बोली,"शाले मैं शक्ल से उल्लू लगती हूँ क्या..?"

तमाचा अचरज में पड़ गया...फिर हल्के से बोला,"..मतलब?"

रूपा,"नौटंकी किसी और को दिखाना...शाले तुम सब मिले हुए हो... तुम क्या हो मैं अच्छी तरह जानती हूँ और ये इमोशनली ब्लैकमेल कर मुझे पाने की भूल सपने में भी मत करना..."

तमाचा ये सुनते ही आग बबूला सा होता बोला,"स्टॉप रूपा... किसी भी चीज की एक लिमीट होती है... और तुम हो कि..."

रूपा,"ओह...तो मैं लिमीट पार कर गई... और तुम सब मिल कर क्या कर रहे हो मेरे साथ... इतना ही शौक है तो अपनी मां बहन के साथ खेलो ना गेम... खूब मजे देगी.."

रूपा की बात सुन तमाता का दिमाग सुन्न रह गया और वो एक तड़के से झन्नाटेदार थप्पड़ रूपा के गालों की तरफ दौड़ा दिया... रूपा की चीख थप्पड़ पड़ने से पहले ही निकल गई और चीख सुन तमाचे के हाथ गालों के ठीक पहले रूक गई...

रूपा सुबकने लगी थी डर से... तमाचा हाथ झटक के खींचा और बालों को सहलाता अंदर उबल रही गुस्से को शांत करने लगा... दोनों खामोश थे... बस खुद पर काबू पाने की कोशिश कर रहे थे...

कुछ पलों के बाद खामोशी टूटी... तमाचा,"सॉरी रूपा...तुम हमसे इतनी नाराज क्यों हो सब समझ में आ गया... शायद कनक के बारे में तुम भी जान गई हो और तुम समझ रही हो कि ये सब मुझे भी मालूम है और शायद मैं भी शामिल हूँ..."

रूपा सिसकना छोड़ तमाचे की बात सुनने लगी... तमाचा आगे बोला,"तो तुम गलत हो रूपा... रूपा मैं लड़कियों के पीछे जरूर रहता पर सिर्फ उसी के जिसकी रजामंदी हो... जो ना चाहती उसे तो मैं देखता भी नहीं और कॉलेज में तुम देखती भी हो... पर ये सब... मर जाऊंगा पर ऐसा घिनौना खेल कभी नहीं खेल सकता..."

तमाचा,"कई लड़कियाँ तो ऐसी भी है जिसे मैं जो कहूँगा वो हंसती हुई कर लेगी पर नहीं... पर इससे हमें क्या मिलेगा? आज कुछ पैसे मिल जाएंगे और बाद में जिंदगी भर बददुआ जिसकी लाइफ बर्बाद हो जाएगी उससे..."

तमाचा की बात रूपा अब एकटक सुने जा रही थी चुपचाप... तमाचा,"अब भी विश्वास नहीं है तो कोई बात नहीं...मैं जा रहा हूँ... तुम बस किसी तरह इन सब के झांसे में मत आना... और मेरा विश्वास है कि तुम इसे हैंडल कर लोगी...फिर भी अगर मेरी जरूरत पड़ी तो बेझिझक याद कर लेना...चलता हूँ...बॉय.."

तमाचा हारा सा मुड़ा और सीधा अपने बाइक की तरफ चल दिया... रूपा ठिठकी सी खड़ी देखती रही... कुछ ही पलों में तमाचा की बाइक दूर निकल चुकी थी... तभी सुनैना रूपा को झकझोर कर होश में लाई...

रूपा,"अ..ह...हाँ... खा ली तुम..."

सुनैना,"हाँ, चलो अब तुम भी खा लो..." सुनैना रूपा को परेशान देख कुछ पूछी नहीं... वो बस रूपा को नॉर्मल करने की सोच रही थी... रूपा वापस गोलगप्पे की तरफ आई और दो चार खाई और बस कर दी...

रूपा के दिमाग में बस तमाचे की बात घूम रही थी...वो पैसे निकाली और गोलगप्पे वाले को दी... अचानक से रूपा एक बार फिर चिल्ला पड़ी...

रूपा,"ओए, खाई इतनी सी और पैसे लिए ढ़ेर सारी..."

"मैडम, दस का वो आपका दोस्त था ना वो खा के चला गया..."गोलगप्पे वाले इत्मीनान से समझा दिया...

रूपा दांत पीसती हुई बोली,"खाया वो और पैसे भरूँगी मैं... रूक.. अभी बताती हूँ..." रूपा के तेवर देख सुनैना बीच में आ गई और बोली,"छोड़ ना रूपा, जाने दे..."

"ऐसे कैसे जाने दूँ.. अभी शाले को दो चार सुनाती हूँ फिर देखना..."रूपा रूक तो गईपर तुरंत फोन निकाल तमाचे को फोन घुमा दी...

रूपा,"ओ भिखारी, जब खाने का इतना ही शौक है तो जेब में पैसे ले कर चला कर...समझा ना..."रूपा फोन रिसीव होते ही बरस पड़ी...

तमाचा,"ओ शिट... सॉरी यार... मैं अभी आया...प्लीज... गलती से चला आया..."

रूपा,"रहने दे, मैं दे दी..."

तमाचा,"थैंक्स यार..."

रूपा,"थैंक्स...? शाले चुपचाप मेरे पैसे पहुँचाओ रेस्टोरेंट में... मैं वहीं डिनर करने जा रही हूँ..." और फोन कट... रूपा फोन रखी और सुनैना के साथ रेस्टोरेंट पहुँच गई...

तब तक तमाचा भी आ गया था... वो रूपा के पास पहुँच बोला,"वो सॉरी रूपा, गलती से मैं निकल गया था...कितने देने हैं?"

रूपा हल्की मुस्काई और बोली,"कितने तो नहीं पूछी...एक काम करो... तुम खा के निकले तो हम पे की और अब हम दोनों खाएंगे तो तुम पे कर देना...हिसाब बराबर.."

तमाचा ये सुनते रही हँसे बिना ना रह सका...वो अंदर चलने का इशारा कर बोला,"श्योर,ऐसे मौके रोज थोड़े ही आएंगे..." साथ ही इस बात की भी खुशी थी कि आखिर रूपा समझ तो गई कि मैं उनमें शामिल नहीं हूँ...

रूपा और सुनैना ये सुन हंसती हुई टेबल तक पहुँच गई और आर्डर करती हुई तमाचे से बोली,"तुम भी खाओगे..?"

"ना, तुम्हारी क्यूट शक्ल देख अपना पेट भर लूँगा...बात करती है..." तमाचा चिढ़ता सा बोला और हँस पड़ा... आर्डर के बाद तमाचे के अंदर काफी देर से फूल रही एक बात फट ही गई...

तमाचा,"ये कौन हैं? पहले कभी देखा नहीं..."

रूपा तमाचे की बात सुन सुनैना की तरफ देख हंसी और आहिस्ते से अगल बगल देखती बोली,"तेरी भाषा में सुपर टंच रसदार मालऽ"

रूपा की ये बात सुनते ही तमाचे के साथ सुनैना भी शॉक रह गई... तमाचा तुरंत ही संभला और सुनैना की तरफ देख रूपा से बोला,"ओर तुम्हारी भाषा में..?"

रूपा,"शाली.." ये सुनते ही तमाचा चौंक पड़ा,"..क्या?"

रूपा,"क्या यार, बड़े भैया की शाली हैं तो मेरी भी शाली हुई ना..." तमाचे समझ "ओ.." कर हामी भरा तब तक सुनैना अपना हाथ आगे तमाचे की ओर बढ़ाती बोली,"सुनैना... "

तमाचे तुरंत हाथ मिलाता बोला,"मस्त शाली हो..." तमाचे की बात सुन रूपा खड़ी हुई और तमाचे से बोली,"उठो..."

तमाचा सन्न...अब क्या हो गया इसे... वो समझने की कोशिश करता उठा तो रूपा बाहर निकलने के लिए इशारा कर दी... सुनैना भी कुछ समझ नहीं पाई कि क्या हो गया इसे... हाथ ही तो मिलाई हूँ...

रूपा भी तब तक बाहर निकली और तमाचे के पास आ बोली,"मजे लेने वाली चीज है तो जा कर बगल में बैठो और मजे लो... ही..ही..ही..."

तमाचा माथा पीट लिया और सुनैना मुंह छिपा कर हंसने लगी "अजीब नौटंकी है ये रूपा..." सोच कर... तब तक तमाचा जम्प लगाता सुनैना के बगल में सट के "हाय.."करता बैठ गया और रूपा सामने...

खाना भी तब तक आ गया और तीनों मस्ती में डिनर करने लगे...

"आप दोनों लड़ क्यों गए थे.." सुनैना खाने के कौर मुंह में डालती हुई बोली जिसे सुन रूपा-तमाचा एक दूसरे की ओर ताकने लग गए... दोनों असमंजस में पड़ गए... सच बताने से तो रहे...

"कोई ऽ खास बात नहीं थी... बस थोड़ी ज्यादती हो गई थी..."तमाचा चुप्पी तोड़ते हुए बोला... रूपा तमाचे की ओर आँखें तरेर दी पर तमाचे बेफिक्री से नजरअंदाज कर दिया...

सुनैना,"कैसी ज्यादती..."

तमाचा,"मैडम जी, पहले खाना तो खा लीजिए...बकवास के लिए तो पूरी रात अपनी है..." तमाचा रोमांटिक सुरों में सुनैना की आँखों में झाँकते हुए बोला...

रूपा बातों में उलझाते देख तमाचे को थोड़ी सपोर्ट करती हुई बोली,"पूरी रातऽ..?"

"हाँ...इत्ती मस्त शाली हैं तो पूरी रात सेवा भगत तो करनी ही होगी ना..."तमाचा ने ऐसे आराम से कह दिया मानों वो सुनैना को पहले से अच्छी तरह जानता हो...

उसकी बात पर रूपा और सुनैना हँसे बिना ना रह सकी... सुनैना हँसती हुई बोली,"ओ हैलो, सपने यहाँ वहाँ मत देखा कीजिए नहीं तो कहीं पैंट गीली हुई ना तो घर जाना भी दुर्लभ हो जाएगा..."

तमाचा सुनैना की सीधी वार के निशाने को सोच चौंक सा गया... वो ऐसे जवाब की उम्मीद भी नहीं किया था... वह ठिठक कर रूपा जो बस हँसने में मशगूल थी, के साथ हँस दिया...

"ओए हीरो हीरालाल, खुद को इतना साना मत समझा कर... यहाँ हर एक बाप होता है... समझा क्या? चल अब बिल दे..." रूपा खाना खा चुकी थी और वो हाथ मुंह साफ करती हुई तमाचे को आर्डर सी देती बोली...

तमाचा मुस्काता हुआ उठा और बिल अदा किया वो भी सीना फुला के... उसके मन में ये ऐसी डिनर आज तक कभी नहीं आई थी... रूपा जैसी लड़की तमाचे के संग... समय की चाल होती है ये सब...

तीनों बाहर निकले तो रोशनी तो जगनगा रही थी पर थोड़ा नजर ऊपर किए तो गुप्प अंधेरा और ढ़ेर सारी आँखमिचौली खेलते तारे... रूपा समय देखी तो आठ बज रहे थे... तुरंत गणित के जोड़ घटाव कर तसल्ली कर ली कि घर नौ बजे तक पहुँच ही जाउंगी... पापा नौ बजे के बाद ही आते हैं...

बाहर आते ही तमाचा बोला,"रूपा, दो मिनट वेट करोगी... मैं बस यूँ गया और यूँ आया..."

रूपा अचरज भरी निगाहों से पहले तो चारों तरफ नजर दौड़ाई कि कोई है तो नहीं ना जिससे ये मिलने जा रहा है और फिर पूछी,"आसपास बाथरूम तो है नहीं तो जाओगे कहाँ...ऐसे बीच सड़क पर पैंट तो नहीं ना....?"

तमाचा ये सुनते ही दांत पीसते हुए रूपा की तरफ लपका पर तब तक रूपा हिहीयाती सुनैना के चक्कर काट हंसने लगी... सुनैना मुंह बंद करने की कोशिश कर रही थी पर उसकी हँस रूक ही नहीं रही थी...

तमाचा चाहता तो आसानी से जल्दी तो नहीं पर पकड़ जरूर सकता था पर वो रूकतासा बोला,"कमीनी, सिगरेट पीने की इच्छा हो रही है... वो लेने जा रहा हूँ और वैसे तुम जान लो मेरी अंदरूनी ताकत इतनी कमजोर नहीं कि दिखने बोलने भर से जरूरत आ पड़ेगी..."

रूपा तमाचे की बात सुन थोड़ी शर्मा सी गई पर जाहिर नहीं होने दी... पता नहीं क्यों? खुद तो बेशर्मों की तरह बिना पलक झपकाए बोल दी और जब सुनने की पड़ी तो लाल टमाटर बन गई...

रूपा,"चल जा जा, हम दोनों के लिए भी दो ब्लैक क़श लेते आना..."

तमाचा ब्लैक क़श सुनते ही ऐसे चौंका मानों सोते हुए आदमी के शरीर पर पानी की कुछ बूँद छिड़क गई हो... वो अपनी दोनों हैडलाइड गोल गोल करता बस देखे जा रहा था,मुंह खुला का खुला रह गया; और फिर हल्के से बोला,"तुम भी सिगरेट पीती हो...?"

सुनैना,"क्यों, उस मोहर मोहर लगी होती है कि सिर्फ मर्दों के लिए.. " सुनैना दो कदम आगे बढ़ तमाचे के बिल्कुल समीप जा तीखे लब्जों में सवाल की...इतनी देर से तमाचे की खुली मुंह को अब आराम मिला... सुनैना की बात सुनते ही...चप्प... मुंह बंद...

वो चुपचाप मुड़ा और खुद से बड़बड़ाता सरपट भाग खड़ा हुआ और कुछेक मिनटों में ही दो सिगरेट रूपा के सामने लिए खड़ा था...

रूपा होंठों को गोल करती, जीभ से गालों को करती, हल्की सर को हिलाती जैसे किसी मधुर संगीत पर शरीर में थिरकन पैदा हो जाती है और मुस्काती हुई दोनों सिगरेट उठा ली...

तमाचा की तो बस बीमारी सी लग गई थी, मुँहतक्का की... टुकुर टुकुर रूपा को बस देखे जा रहा था... वो ये सोच ही नहीं पा रहा था कि ये रूपा है या कोई और...

तब तक रूपा स्कूटी निकाल उस जम्प सी लगाती पीं पीं करने लगी... तमाचा हड़बड़ाता अपनी बाइक की तरफ भागा और चंद सेकेंड में वो रूपा के बगल में आ पहुँचा...

"शाली सुनैना जी, कुछ तो सेवा का मौका दीजिए... आप मेरे साथ..." तमाचा विनम्रता से ऑफर किया... जिसे रूपा बीच में काटती हुई बोली,"बस बस, नौटंकी मत कर... तू भी क्या याद करेगा..."

रूपा सुनैना की ओर देखी तो सुनैना मुस्कुराती तमाचे की बाईक की शोभा बढ़ाने बढ़ गई... तमाचे सुनैना की ओर देख मुस्काता हुआ रूपा से बोला,"रूपा, तुम तो मेरी आदत जानती हो ना कि खाने के बाद..."

अचानक रूपा को पिछले दिन की किस वाली बात याद आ गई और वो हलकट सी सूरत बना ली... फिर अचानक से बोल पड़ी,"जुगाड़ दे दी हूँ, लेना तेरा काम..." रूपा की बात पर तमाचा मुस्कुरा के सुनैना की ओर देख "ओके" बोल चलने का इशारा किया...

सुनैना कुछ समझ नहीं पाई... बस दोनों को देखती रह गई... स्कूटी वाली तो अपने तरीके से ही स्कूटी चलाएगी... इस वजह से तमाचा को बीच बीच में अचानक सी ब्रेक लगानी पड़ती तो सुनैना चढ़ सी जाती तमाचा...

तमाचा ऐसे मौके पर चूकता भला... वोढीठ की तरह बोला,"मैडम जी, ऐसे चढ़िएगा तो आपका ये जो फुलौना है ना बूम्म कर जाएगा..."

सुनैना तमाचे की पीठ पर एक चपत लगाती हुई बोली,"गॉड गिफ्टेड है, नहीं होगी बूम्म...आप बस थोड़ा ध्यान से चलाइए..."

"अब आपकी रूपा जी ऐसी चलाएगी तो मैं क्या कर सकता..." तमाचा रूपा की तरफ इशारा कर दिया... सुनैना भी देख रही थी कि रूपा की वजह से ही ब्रेक लेनी पड़ रही है...

सुनैना तभी से पुनः तमाचे पर लद गई... वो इस बार पीछे ना खिसकी, बल्कि अपने हाथ आगे ले जा तमाचे के सीने पर जमा दी...

सुनैना,"अब नहीं ना फटेगी...?"

तमाचा तो हवा में उड़ने लगा... वो अपनी खुशी बयां नहीं कर पा रहा था... पहली मुलाकात और इतनी मस्ती... सुनैना की ठुड्डी तमाचे के कंधों पर जा अटकी थी... तमाचा अनुमान लगा रहा था कि साइज क्या है?

तमाचा सोचता हुआ पूछ ही लिया,"३४" साइज?"

सुनैना अपनी साइज के बारे में सुन शर्माई और हाथों को जोर से जकड़ती हुई तमाचे में समाने की कोशिश करती हुई कान में फुसफुसाती हुई बोली,"३४सी..."

"मस्त है...!" तमाचा मुस्काता हुआ बोला... दोनों ऐसी ही मस्ती भरी बातें करते चले जा रहे थे... कुछ ही देर बाद रूपा रूक गई... तमाचा भी बगल में रूका और पूछा क्या हुआ?

जवाब में रूपा जगह दिखा दी... घर पहुँच गई थी... गली के मोड़ पर थी... तमाचा ओह करता हुआ बोला,"इतनी जल्दी कैसे पहुँच गए..."

तब तक सुनैना तमाचे सी बाइक से उतर रूपा की स्कूटी पर बैठ गई...तमाचा कुछ बोलता उससे पहले रूपा बोल पड़ी,"तेरी गलती है... नहीं लिया तो मैं क्या करूँ...बाय!"

और रूपा तेजी से चल पड़ी... तमाचा पीछे से एक बार आवाज भी दिया पर कोई फायदा नहीं... अगर तमाचा चलता भी पीछे तो तब तक रूपा घर पहुँच चुकी होती... अफसोस करता बेचारा यू-टर्न कर लिया...

रूपा और सुनैना घर पहुंची तो मम्मी बोली,"रूपा, डिम्पल बुलाई है सुनैना को..."

रूपा,"ओके मॉम, और मामाजी कहाँ गए..."

मम्मी,"डिम्पल ले गई खाना खिलाने..."

सुनैना,"रूपा, आ रहीहूँ जीजी से मिल के..."

रूपा,"मैं भी चल रही हूँ..." कहती हुई अपने रूम में गई...सुनैना भी साथ चली आई... अंदर आई तो रूपा बेड पर पसरती फोन निकालती बोली,"भाभी को चिढ़ाती हूँ पहले..."

सुनैना मुस्काती बगल में बैठ गई... फोन लग चुकी थी पर रिसीव नहीं हो रही थी... काफी रिंग होने के बाद फोन रिसीव हुई पर कोई उत्तर नहीं...

रूपा,"हैलो...हैल्ल्ल्लो....भाभी..."

"आहहऽ हाँ....रूपाऽ बोलोऽ ईस्स्स्स..."कई बार हैलो के बाद डिम्पल भाभी लड़खड़ाती हुई बोली... जिसे सुनते ही रूपा चौंक सी गई...

रूपा,"क्या हुआ भाभी, आप ठीक तो हैं ना और कहाँ हो अभी...?"

"हम्म्म...हाँ मैं ठीक हूँ रूपाऽ...ऊफ्फ...घर ही हूँ..." डिम्पल भाभी नॉर्मल होने की कोशिश कर रही थी पर हो नहीं पा रही थी...

"ओके, दो मिनट में पहुँच रही हूँ...बाय.."रूपा के दिमाग में पता नहीं क्या घुस गई और ज्यादा देर ना लगाती हुई सुनैना से चलने बोल बाहर की तरफ रूख कर ली...

"रूपा, दो मिनट...मैं थोड़ी फ्रेश होती हूँ..."सुनैना अचानक रूपा से बोली और हड़बड़ाती बाथरूम में घुस गई... रूपा कुछ समझ नहीं पाई... जब बाथरूम की हड़बड़ी थी तो तब से बैठी क्यों थी...

रूपा बूत सी वहीं खड़ी बाथरूम की तरफ बस देखती रह गई... वो ऐसे जा नहीं सकती थी... सुनैना कोई पाँच मिनट बाद बाहर निकली और रूपा से चलने बोली... रूपा बस मुंडी हिला पीछे हो ली...

रूपा की चोल दिमाग सोचती ही रही कि आखिर ऐसे सुनैना क्यों की? आखिर दोनों डिम्पल भाभी के घर तक पहुँच गई... डिम्पल भाभी गेट खोली और सामने सुनैना से चिपक कर गले लगा ली...

रूपा पीछे खड़ी डिम्पल भाभी को गौर से देखने लगी... और डिम्पल भाभी के खुले बाल, तुरंत पोंछी हुई पसीने वाली चेहरे जो अभी भी बता रही थी ये पूरे पसीने से लथपथ थी...

डिम्पल भाभी सुनैना से अलग होती हुई रूपा से बोली,"हैलो मिस आर. क्या हुआ जो ऐसे बुत बनी खड़ी है... सिर्फ मिलने के लिए इसे बुलाई हूँ...जाते वक्त लेती जाना इसे..."

डिम्पल भाभी की बात सुनते ही रूपा झेंप सी गई और हंसती हुई उन दोनों की हंसी में शामिल हो गई... अंदर आये ही रूपा नजर दौड़ाई बेडरूम की ओर जैसे कोई चीज ढ़ूंढ़ रही हो...

रूपा,"भाभी, मामाजी कहाँ गए? मम्मी बोली कि..."

डिम्पल,"बाथरूम गए हैं..."

रूपा हल्की मुस्कुरा दी पर उसके मन में ढ़ेरों सीन खुद ब खुद उभरती जा रही थी... उधर दोनों बहने अंतिम मुलाकात के बाद से फ्लैशबैक ले चुकी थी...

रूपा कुछ देर बाद उठी और बोली,"भाभी, बात खत्म हो जाए तो इसे पास कर देना मेरे रूम में ...मम्मी की थोड़ी हेल्प कर आ रही हूँ..." डिम्पल भाभी "ओके "कह रूपा को जाने की इजाजत दे दी...

रूपा चल तो दी पर अंदर बेचैनी और बढ़ती जा रही थी... वो जैसे जैसे अपने रूम की ओर बढ़ी जा रही थी, उसके पांव और जड़वत होते जा रहे थे... अपने घर के पास पहुँच रूपा आगे चल नहीं पाई और अगले ही क्षण पलटी और पलक झपकते वापस डिम्पल भाभी के घर के पास...

रूपा अंदर तो नहीं जा सकती थी...वो तुरंत ही जुगाड़ ढूँढ़ ली... घर और बाउंड्री के बीच हल्की गैप जो रहती है., वो उसी से गुजरती डिम्पल भाभी के बेडरूम तक पहुँच गई... इसके अंदर रूपा बस खड़ी रह सकती थी...

वो स्टैचू बन कान अंदर बेडरूम में कर ली... पर अभी किसी तरह की आवाज नहीं आ रही थी... वो इंतजार करने लगी... वो समझ तो गई ही थी कि कुछ गड़बड़ है पर अब वो बस कॉन्फार्म होना चाहती थी...

कुछ ही पल में अंदर हलचल हुई... रूपा चौकन्ना होती कान सटा दी...थोड़ी हड़बड़ी के बाद रूपा को कुछ आवाजें सुनाई पड़ने लगी...

सुनैना,"दीदी, जब आप बिजी थी तो फोन रिसीव क्यों की..? वो तो शुक्र है कि मैं बहाने से देर कर दी नहीं तो पता नहीं क्या होता?" रूपा सुनैना पर दांत पीस कर रह गई...

डिम्पल,"ही..ही... जब तुम थी तो मुझे क्या दिक्कत होती भला..."

सुनैना,"हाँ..हाँ... समझ गई खुदगर्ज कहीं की... खुद लंबे लम्बे घोंट रही थी और मैं वहां टेंशन से मरी जा रही थी..."सुनैना गुस्से से बोली... तभी रूपा के कानों में मामाजी की आवाज पड़ी...

मामाजी,"आह मेरी रानी,झगड़ा क्यों करती हो... अभी तो पूरी रात पड़ी है... लो तुम भी घोंट लो... देखो पूरी तरह साफ कर आया हूँ..."

रूपा की फ्यूज लगभग उड़ सी गई थी... वो सोच ही नहीं पा रही थी ये क्या हो रहा है..? पहले डिम्पल भाभी, फिर सुनैना... मतलब दोनों मामाजी से फंसी है...

तभी सुनैना जोर से खिलखिलाती हंसती हुई चीख पड़ी... रूपा अनुमान लगा ली थी कि सुनैना सी ये चीख कैसी हो सकती है...शायद मामाजी कस के उसे जकड़े होंगे...

सुनैना,"अउच्च्च्च मामाजी... अभी नहीं... आप अभी अभी तो डिम्पल दी की धुनाई किए हैं..."

मामाजी,"अरे मेरी रानी, तुम लोग जैसी गरमागरम चीज सामने हो तो दस को भी लगातार रौंद सकता हूँ... देख कैसा अकड़ गया..."

रूपा चिहुंकती सी अपनी आँख हल्की दबाती सन्न सी हो गई थी... वो नाक भौं सिकुड़ कर सोच रही थी कि कैसे ये दोनों खुद के मामा से... तभी रूपा को मामाजी की सिसकी सुनाई दी...

मामाजी,"आहहहहहह ईस्स्स्सससस सुनैनाआआआआऽ... शाबाससससऽ ऐसे ही करती रहो...औफ्फ....."

रूपा की हालत खराब... उसके अंदर की चींटी कुलबुलाने लगी... उसके हाथ खुद ब खुद जगह पर पहुँच गई और रगड़न मसलन चालू....

अंदर की गरमागरम बातें सुन रूपा बेचैन सी हो थोड़ी लम्बी हो खिड़की में झाँकी पर कोई सफलता नहीं... वो वापस फिर पीछे देख सुनने में लग गई... कुछ ही देर में मामाजी की सिसकी बंद हुई और थोड़ी हड़बड़ी...

फिर जोर से "घप्प्प" की आवाज के साथ सुनैना की दर्द भरी चीख... रूपा मचल कर रह गई... अंदर कुटाई जो शुरू हो गई थी... सुनैना पल पल आहें भर रही थी... मामाजी उसी की धुन में हुंकारें लगा रहे थे...

थोड़ी देर और रूपा रगड़ती रही और लाइव कमेंटरी सुनती रही... नतीजन कुछ ही देर में मामाजी और सुनैना की जोरदार चीख गूंजी और फिर बिल्कुल शांत... पर रूपा अभी शांत नहीं हुई थी.. वो और तेज हाथ चला रही थी और अंदर ही अंदर चीख रही थी...

तभी रूपा एक झटके के साथ शिथिल पड़ गई... अंदर से आई मामाजी की बात उसे हिला सी गई...

मामाजी,"और डिम्पल, तुम अपनी ननद रूपा से कब सेवा का मौका दिलवा रही हो...?"

डिम्पल भी वहीं थी... वो हँसती हुई बोली,"बहुत जल्द मामाजी, बस एक कदम की और दूरी है...अभी तक तो सब चीजें ढ़ंग से होती आई है... फिर वो आपकी बाँहों में ही रहेगी..."

मामाजी और डिम्पल की बातें रूपा को छलनी सी कर गई... रूपा की आँखें बहनी शुरू हो गई थी...

"दीदी, ये तमाचा कौन है... इसका नाम तो पहले नहीं सुनी थी..."सुनैना हल्की कराहती हुई बोली...

डिम्पल,"वो... वो कनक का दोस्त है...चोदू नम्बर वन... ही..ही..ही... तुम कैसे जानती उसे..?"

सुनैना,"आज रूपा उससे मिली थी..."

डिम्पल,"क्या..?रूपा और उससे... "

सुनैना,"हाँ दीदी, पर रूपा उस पर काफी गुस्सा थी और वो गिड़गिड़ा रहा था सॉरी सॉरी बोल के... बाद में रूपा मान गई तो उसने हम दोनों को डिनर भी करवाया... हम दोनों को यहाँ गली तक छोड़ कर गया है अभी वो..."

डिम्पल भाभी की हँसी एक बार फिर सुनाई पड़ी... रूपा बार बार अपने आँसू पोंछ रही थी पर उसकी आँख तो जिद्द पर थी कि आज नहीं रूकनी...

डिम्पल,"अरे वो भी रूपा का आशिक है... कनक उसे थोड़ा मौका दिलवा दी रूपा से बात करने का तो वो थोड़ा को पूरा करना चाहता है... और रूपा जैसी शरीफ उसे भाव तक नहीं देती... हो सकती है वो कुछ ऊटपटांग बोल दिया होगा जिससे वो गुस्से में थी..."

रूपा अचानक से सर दिवाल पर पटक दी... मैं तमाचे को कितना गलत समझ रही थी कि वो भी होगा मिला पर वो.... वो अब खुद की गलतफहमी पर अफसोस भी कर रही थी... पर खुशी इस बात की भी थी कि वो तमाचे से गुस्सा नहीं थी अब...

अगले ही पल रूपा सारी दुनिया भुला के तमाचे से मदद की सोच ली थी... अब वही था बचा...जो इन दरिंदों वाली नियत से बचा था...

डिम्पल,"सुनैना, कपड़े पहन लो अब... जीजू आने ही वाले हैं..."

सुनैना,"क्या दी, सब दिन आप चढ़वाती ही हो...एक दिन मैं चढ़वा ही ली तो क्या हो जाएगा..." और सुनैना हंस पड़ी...

डिम्पल हंसती हुई बोली,"अरे... मामाजी... सुन रहे हैं ना आप... अब आप ही बताइए कि मैं इसे कब मना की हूँ..."

मामाजी,"हाँ मना तो नहीं की...एक काम करते हैं डिम्पल... आज इसे यहीं सोने दो और तुम मेरे साथ..."

तभी सुनैना भड़कती सी बोली,"मजाक की भी हद होती है... जीजू कभी नहीं तैयार होंगे..."

मामाजी की कुटील हँसी निकल गई और डिम्पल की भी... तभी डिम्पल बोली,"तुम नहीं जानती फिर अपने जीजू को सुनैना...तुम बस हाँ कर दो फिर सारी जिम्मेदारी मेरी..."

सुनैना की बस हल्की हँसी निकल गई डिम्पल की बात पर... पर तभी मामाजी राज की बात कह उसे चौंका दिए....

मामाजी,"डॉर्लिंग सुनैना, एक दफा मैं और तुम्हारे जीजू एक साथ एक लड़की की आगे पीछे धज्जियाँ उड़ा चुके हैं..."

सुनैना ना चाहती हुईपूछ ही ली,"किसकी?"

मामाजी इत्मीनान से बोले,"आपकी प्यारी चहेती दीदी डिम्पल रानी की...पूछ लो!"

ये सुन सुनैना बस क्या कह रह गई... इधर रूपा पर एक और बम आ गिरी... वो अब सहन करने की काबिल नहीं थी... वो हल्की घूमी और वापस बाहर की तरफ निकल ली...

बाहर निकलते ही आँसू पोंछती सर पकड़ी घर की तरफ भागती हुई चल दी..
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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